घनाक्षरी छंद-
यह वर्णिक छंद है । इसमें वर्णो को
गिना जात है । घनाक्षरी के अनेक प्रकार होते हैं ।सबसे प्रचलित मन हरण धनाक्षरी है । हम उसी का अभ्यास करेंगे ।
नियम -
(1) आधे अक्षरों को नहीं गिना जाता ।
उदाहरण : मध्य को दो वर्ण ही गिनेंगे ।
(2) मनहरण घनाक्षरी में 31 वर्ण होते हैं ।16 , 15 पर यदि अनिवार्य है।
( 3 )यदि 8 - 8 - 7 पर यदि हो तो यह
ज्यादा सुंदर होता है ।
अंत में गुरु होना जरूरी है 8 -8 8 की यति पर भी तुक रहे तो घनाक्षरी और सुंदर हो जाती है ।
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विधा- घनाक्षरी (मनहरण घनाक्षरी)
सृजन विषय:- सावन
सावन उल्लास भरा, मन झूमे जरा-जरा,
धरा दिखे हरा-भरा, मगन किसान है।
घटा घिरे घनघोर, पवन करे हिलोर,
दादुर झींगुर मोर, छेड़े शुभ तान है।।
छाया बागों में बहार, रिमझिम की फुहार,
खुशियाँ मिले अपार, मुख में मुस्कान है।
नभ की छटा निराली, देख झूमे पात डाली,
गजानंद गाते शुभ, सावन गुणगान है।।
----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 02/08/2024
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विधा- मनहरण घनाक्षरी
सृजन विषय- भोले शंकर
जय हो शिव शंकर, महादेव हर हर,
भूतनाथ अगोचर, सर्व जग नाथ हो।
कालों का हो महाकाल, रूप दिखे विकराल,
भभूत सजे हैं भाल, त्रिशूल भी हाथ हो।।
जटा बहे गंगा धार, किये चंद्र का श्रृंगार,
रूप दिए हैं निखार, नागनाथ माथ हो।
डमरू भी डम-डम, बोले भोले बम-बम,
कृपा रहे हरदम, आपका ही साथ हो।।
-----✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 04/08/2024
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विधा- मनहरण घनाक्षरी
सृजन शब्द- पेड़
आओ सब ध्यान धरें, रहें नहीं कोई परे,
धरा का श्रृंगार करें, पेड़ लगायें चलो।
प्रकृति का वरदान, पेड़ पुत्र के समान,
बात मानना सुजान, पेड़ बचायें चलो।।
सबका है हितकारी, औषधि है गुणकारी,
छाँव फल लगे न्यारी, लाभ बतायें चलो।
पेड़ से ही हरीतिमा, हम सबकी गरिमा
मधुरम पेड़ महिमा, गीत सुनायें चलो।।
-----✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 05/08/2024
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विधा- मनहरण घनाक्षरी
सृजन विषय- नागपंचमी
ढम-ढम बजे ढोल, बम-बम भोले बोल,
आया नागपंचमी ये, पावन त्यौहार है।
भर दोना घी मलाई, चलो खेत मेड़ भाई,
बाँबी में चढ़ते लाई, बहे दूध धार है।।
भीड़ भारी पंचू बाड़ा, आज देखने अखाड़ा,
पहलवान कुश्ती को, खुशी से तैयार है।
संस्कृति है ये पुरानी, कहते हैं लोग ज्ञानी।
नागदेव भर देंगे, सुख का भंडार है।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 08/08/2024
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विधा- मनहरण घनाक्षरी
विषय- तुलसी दास
महा ज्ञानी तुलसी जी, माँ जिनकी हुलसी जी,
पिता आत्माराम दुबे, राजापुर गाँव है।
रामभक्ति कमी थमी, सावन माह सप्तमी,
पंद्रह सौ चौवन में, पाये जन्म छाँव है।।
रामचरित मानस, है दोहावली पावस,
हनुमान चालीसा तो, पुण्य प्रभु पाँव है।
तुलसी लिख ग्रंथ को, सौंपा आगे पंथ को,
आजीवन तरसे वे, पाने सुख ठाँव है।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 10/08/2024
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विधा- मनहरण घनाक्षरी
सृजन शब्द- सनातन
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धर्म मेरा सनातन, कर्म मेरा सनातन,
सनातनी हिन्दू हम, सनातनी देश है।
पूर्व से पश्चिम तक, उत्तर-दक्षिण तक,
राम राज्य रहा यहाँ, सदा परिवेश है।।
गोकुल व वृंदावन, अवधपुरी नमन,
अर्पित है तन-मन, प्रार्थना अशेष है।
सब में समानता है, जन-जन जानता है,
एक बनो नेक बनो, गीता का संदेश है।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 12/08/2024
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विधा-- मनहरण घनाक्षरी
विषय-- *आजादी/ तिरंगा*
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तिरंगा हो घर-घर, गर्व करें इस पर,
आन-बान शान यह, राष्ट्र पहचान है।
आजादी की है कहानी, गाथा यह बलिदानी,
अमर शहीदों पर, हमें अभिमान है।।
त्याग शांति हरियाली, छाये रहे खुशहाली,
तिरंगा संदेश देता, भारत महान है।
आओ सब प्यारे आओ, वन्देमातरम गाओ,
गजानंद जनगण, मन राष्ट्र गान है।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 14/08/2024
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विधा- मनहरण घनाक्षरी
सृजन विषय- किसान
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धरा का है भगवान, नमन है अवदान,
है महान तो किसान, बना कर्मवीर है।
श्रम उसका साधना, नेक पावन भावना,
सर्व हिताय कामना, रखे मन धीर है।।
सहकर जाड़ घाम, करते अथक काम,
रहते सदा बेनाम, पहाड़ो सी पीर है।
लोभ लालसा से दूर, श्रम करे भरपूर,
कर्म फसलों को सींचे, सदा नैन नीर है।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 17/08/2024
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विधा- मनहरण घनाक्षरी
सृजन शब्द- निर्भया
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खो गई इंसानियत, बढ़ी है हैवानियत,
निर्भया दरिंदगी की, हुई जो शिकार है।
कलंकित मानवता, पोषित है दानवता,
शोषित होती बेटियाँ, देखो बार-बार है।।
हैवान फैलाते बाँह, मिली किसकी पनाह,
सरकार मूक बैठी, कानून लाचार है।
बेटी सभी जाग जाओ, हौसला चिंगारी लाओ,
स्वयं की सुरक्षा करो, थाम लो कटार है।।
---✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 23/08/2024
