रविवार, 9 फ़रवरी 2025

हिंदी सजल-

सजल की संक्षिप्त जानकारी:-

 सजल हिंदी साहित्य की नई विधा है।

1). सजल में दो-दो पंक्तियों के पांँच या अधिक विषम संख्या में पदिक होंगे। 

2). प्रथम पदिक को आदिक अंतिम पदिक को अंतिक  कहा जाता है।

 3). प्रत्येक पदिक  के अंत में हर बार आने वाला एक शब्द या शब्द समूह को पदांत कहते हैं।

 4). पदिक में इस पदांत के पहले आने वाले तुकांत शब्द को समांत कहा जाएगा।

5). सजल विभिन्न स्वतंत्र कथ्यों से गुँथी सांकेतिक अभिव्यक्ति को आधार बनाकर प्रतीकों, मुहावरों, 

बिम्ब आदि से सुसज्जित होती है।

6). क्लिष्ट उर्दू शब्दों से बचें (दूर रहें)।

7). पंक्ति का कोई निश्चित मीटर की बाध्यता नहीं है।

8). लय सजल कार की अपनी पसंद की होगी।

9). सभी पंक्तियों में मात्रा समान होनी चाहिए।


सजल का उदाहरणइ:-

इसने उसकी खाई है रोटी ।

गोल चांँद बन आई है रोटी।


 मजदूरी कर दिन गुजरा फिर

 भर के पेट ना पाई है रोटी।


भूख की आग सताए न जिसको,

 उसको कभी न भायी है रोटी।


भूखे उस पर टूट पड़े थे जब,

 खुद से ही शरमाई है रोटी ।


त्यागे थे प्राण इसी के खातिर 

कितनी तू दुखदाई है रोटी।

उपरोक्त सजल में

1.*रोटी* :- पदांत है

2.*आई है*:- समांत

  "मनीषा भट्ट"

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----------------------------सजल--------------------------------

विधा- सजल

मात्रा भार- 18

समान्त- आना

पदान्त- होगा

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हौसला खुद का बढ़ाना होगा

फासला दिल का मिटाना होगा।


शिकायत करो नहीं जिंदगी से 

तुम्हें स्वयं भाग्य बनाना होगा।


पाठ इंसानियत का पढ़ लेना

गले से सबको लगाना होगा।


धूप और छाँव सिखाते जीना

हर हाल में मुस्कुराना होगा।


छोड़ दो रंजिशें सब अपने हैं

बात यह सबको बताना होगा।


सत्य की राह में बढ़ना आगे

झूठ से पर्दा उठाना होगा।


गजानंद हार कभी मत मानों

तभी कदमों में जमाना होगा।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 01/02/2025

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विधा- सजल

मात्रा भार- 16 

समांत- ओरी

पदांत- को

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बाँध लूँ प्रीत की डोरी को

प्रिय अपने चाँद चकोरी को।


बन चातक हूँ प्यासा बैठा

करने को नैन निहोरी को।


मन करता बाहों में भर लूँ

शर्माती सजनी गोरी को।


प्रीत रंग से अंग रंग दूँ

तन लिपटे चुनरी कोरी को।


गजानंद जी तरस रहा है

करने को मस्ती खोरी को।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 05/02/2025

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विधा-सजल

मात्रा भार- 14

समांत- इला

पदान्त- करना

**********************************

यूँ न मुझसे गिला करना।

मुस्कुराकर मिला करना।।


मत शिकायत करे भौंरे।

तुम कली बन खिला करना।।


छोड़ दो नफ़रतें भरना।

प्यार का सिलसिला करना।।


झूठ की न इज्जत होती।

सत्य से मत हिला करना।।


गजानंद जी रखो हौसला।

तुम बुलंदी किला करना।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 07/02/2025

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विधा- सजल

मात्रा भार-22

समांत- आन

पदांत- करना

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प्रभु नाम का निस-दिन ही गुणगान करना।

इस नाशवान तन का न अभिमान करना।।


सत्य कर्म करना अटूट ध्येय बना लो।

कमजोर असहायों का तुम ध्यान करना।।


मजबूर न हो कोई जीवन जीने को।

बन दाता गरीबों को सुख दान करना।।


व्यवहार सरल रखना आदर पाने को।

छोटे-बड़े जन सबका ही सम्मान करना।।


गजानंद छोड़ दो पत्थर को पूजना।

माता-पिता को जग में भगवान करना।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 09/02/2025

-------------------------------------------------------------------विधा- सजल

मात्रा भार- 14

समान्त- आली

पदांत- है

                ------------------

देश खजाना खाली है।

यह कैसी रखवाली है।।


बंजर जमीन जंगल अब

बची नहीं हरियाली है।


बाग चमन है पतझड़ में

सुसक रहा चुप माली है।


सिर्फ सफाई नारों में

बदबू मारे नाली है।


खादी वर्दी टोपी में

नेता लगे मवाली है।


चरम लाँघती महँगाई

गायब रोटी थाली है।


अंधभक्त अंधभक्ति में

हँस-हँस ठोके ताली है।


सच्चाई की बातें अब

लगते कड़ुवी गाली है।


गजानंद सुख शांति कहाँ?

सभी तरफ बदहाली है।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/02/2025

-------------------------------------------------------------------विधा- सजल

मात्रा भार- 22

समांत- अने

पदांत- लगा हूँ


अपना हमदर्द उनको कहने लगा हूँ।

खुशियों का रंग मैं अब भरने लगा हूँ।।


खोया रहता हूँ बस उनकी यादों में।

दिन रात प्रेम-प्रेम मैं जपने लगा हूँ।।


जब से साँसों में वो समाई हुई है।

बनके परछाईं साथ रहने लगा हूँ।।


माना हूँ जीवन की पतवार उसी को।

मैं तो प्रेम धारा में बहने लगा हूँ।।


गजानंद बन बैठा पागल दीवाना।

ताने लोगों का सुनो सहने लगा हूँ।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 13/02/2025

-------------------------------------------------------------------विधा- सजल

मात्रा भार- 22

समांत- अने

पदांत- लगा हूँ

अपना हमदर्द उनको कहने लगा हूँ।

खुशियों का रंग मैं अब भरने लगा हूँ।।


खोया रहता हूँ बस उनकी यादों में।

दिन रात प्रेम-प्रेम मैं जपने लगा हूँ।।


जब से साँसों में वो समाई हुई है।

बनके परछाईं साथ रहने लगा हूँ।।


माना हूँ जीवन की पतवार उसी को।

मैं तो प्रेम धारा में बहने लगा हूँ।।


गजानंद बन बैठा पागल दीवाना।

ताने लोगों का सुनो सहने लगा हूँ।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 13/02/2025

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विधा- सजल

मात्रा भार- 22

समान्त- आले

पदान्त- को


मत तरसे कोई लोग दो निवाले को।

सब पायें जग में प्रेम के उजाले को।।


परवाह नहीं उनको लोक भलाई की।

नफरत के ओढ़ बैठे जो दुशाले को।।


लोग दिखावे कर हमदर्दी करते हैं।

पर देख नहीं पाते मन के छाले को।।


दिलवाले बहुत दिल के इंसान काले।

फिर भी नहीं क्यों चाहते हैं काले को।।


गजानंद उसके पथ कीचड़ भरा पड़ा।

महाकुंभ में नहला दो अब नाले को।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 18/03/2025

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विधा- सजल

मात्रा भार- 22

समांत- अण

पदांत- कर दूँ

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माता पिता को सर्व मैं अर्पण कर दूँ।

उनकी सेवा में जीवन तर्पण कर दूँ।।


विश्वास नहीं मुझको झूठे लोगों पर।

सच्चाई सिद्ध करने प्राण रण कर दूँ।।


पसंद नहीं चमचागिरी चाटुकारिता।

बोल शब्द प्यारे जन आकर्षण कर दूँ।।


मत भटको मंदिर मस्जिद दर्शन प्रभु को।

हैं भगवान बसे घर में लक्षण कर दूँ।।


गजानंद अंधभक्ति करना नहीं कभी।

ढोंग मिटाने कदमें पर्दापण कर दूँ।।


✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 18/03/3025

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सादर समीक्षार्थ- 

विधा- सजल

मात्रा भार- 16

पदांत- आते

समांत- हैं

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खूब झूठ कसमें खाते हैं।

भूल अपना फर्ज जाते हैं।।


सिर्फ घोषणाओं में तो वे।

नाली पुल सड़क बनाते हैं।।


बरसाती मेढ़क बनकर जो।

चुनावी समय टर्राते हैं।।


जाति-धर्म के आड़ लिए वे।

आपस में हमें लड़ाते हैं।।


तन पर जिनके खादी वर्दी।

देश का नेता कहाते हैं।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 20/03/2025

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विधा- सजल

मात्रा भार- 20

पदांत- आना

समांत- होगा

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मन से भ्रम मनभेद मिटाना होगा।

मानवता का पाठ पढ़ाना होगा।।


जाति-धर्म के नाम लड़े मत कोई।

सबको सबका साथ निभाना होगा।।


मिलकर सभ्य समाज हमें है गढ़ना।

संस्कारो का अलख जगाना होगा।।


हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई भाई।

धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाना होगा।।


गजानंद भारत सोने की चिड़िया।

डाल-डाल पर अब चहकाना होगा।।


✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/03/2025

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विधा- सजल

मात्रा भार- 24

समांत- आल

पदांत- लिखता हूँ


लोग कहते हैं सजल मैं कमाल लिखता हूँ।

सुनो सच्चाई मैं दिल का हाल लिखता हूँ।।


है अनाथ आश्रमों में आँसू का सैलाब।

बूढ़े माता पिता का मैं ख्याल लिखता हूँ।।


बेच खाये देश को खादी वर्दी वाले।

नेताओं की कूटनीतिक चाल लिखता हूँ।।


अंधभक्ति का तो राग मैं अलापता नहीं।

करे खून में उबाल वो सवाल लिखता हूँ।।


गजानंद को तर्कपूर्ण बाते हैं पसंद।

कलम को अपनी ताकत सच ढाल लिखता हूँ।।


✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 25/02/2025

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विधा- सजल

मात्रा भार- 19

समांत- आई

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जब-जब यारा तेरी याद आई।

घटा इस दिल में दर्दों की छाई।।


न तड़पाओ कभी अपने प्रेम में।

सनम मेरे प्यार की है दुहाई।।


तोड़ आओ दस्तूर जमाने की।

सहा नहीं जाता दूरी जुदाई।।


हीर तू अपने प्रेम कहानी में।

रांझा की मैं तो बनूँ परछाई।।


आ जाओ मेरे गले लग जाओ।

गजानंद छोड़ देगा रुसवाई।।


✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 28/02/2025

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