सोमवार, 16 जून 2025

विधाता छन्द-

विधाता छन्द (मुक्तक)

मापनी- 1222 1222 1222 1222

विषय- *रोटी*

तरसते लोग रोटी को तरसते हैं निवाले को।

कभी देखे नहीं हैं वे खुशी चाहत उजाले को।।

गरीबी ने सताया है गरीबी ने रुलाई है।

सिसकते हैं हमेशा ओढ़ दर्दों के दुशाले को।।


रहा मजबूर बन मजदूर रोटी दाल पाने को।

मिटाने भूख अपनों की शहर आया कमाने को।।

नहीं इंसान शहरों में रहा करते लुटेरे हैं।

दिखाई चोर देते हैं खुशी सपने मिटाने को।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 13/06/2025

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विधाता छन्द

सृजन शब्द- *किनारा*

मापनी- 1222 1222 1222 1222

मिला जो साथ तेरा तो मिला मुझको सहारा है।

बिखरते आँसुओं ने आज तुमको ही पुकारा है।।

सही जाती नहीं तेरी जुदाई दूरियाँ अब तो।

तुम्हीं से जिंदगी की नाव ने पाया किनारा है।।


अदा तेरी क़यामत है खुदा की तुम खुदाई हो।

झुकी नजरें उठा दो तो सनम मेरे दुहाई हो।।

करूँ तारीफ तेरी हुस्न की तो शब्द कम पड़ता।

गजब की यार मेरे तुम जवानी रूप पाई हो।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 16/06/2025

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विधाता छन्द (मुक्तक)

सृजन शब्द- *तकदीर*

मापनी- 1222 1222 1222 1222

दिया तकदीर मुझको है यहाँ मेरे विधाता ने।

दुखों से दूर रख मुझको खिलाया कौर दाता ने।

चुका पाऊँ भला मैं कर्ज कैसे दूध का यारों।

पिता से नाम पाया है दिया जग जन्म माता ने।।


सिखाया जुल्म से लड़ने बढ़ाया हौसला मेरा।

बुलंदी में चढ़ाया है मुसीबत राह जब घेरा।।

कभी पीछे नहीं देखा हमेशा ही रहा बढ़ते।

करूँगा जिंदगी भर नित्य प्रभु आभार मैं तेरा।।


जलाऊँ सत्य का दीपक तमस जग से मिटाने को।

रहें सब लोग खुशियों में न तरसे अन्न दाने को।।

बढाऊँ पाँव नेकी को बनाकर कर्म को पूजा।

रहे माता पिता का साथ आशीर्वाद पाने को।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 18/06/2025

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विधाता छन्द

सृजन शब्द- *प्रतीक्षा*

मापनी- 1222 1222 1222 1222

हुई है आँख मेरी नम तुम्हें अब याद कर करके।

पुकारूँ रात दिन तुमको दुआ में प्रेम भर भरके।।

परीक्षा है प्रतीक्षा की चले तुम लौट भी आओ।

नहीं जीना पड़े मुझको सनम सुन आज मर मरके।।


निगाहों में बसी हो तुम दिलों में राज करती हो।

जलाकर प्रेम का दीपक मिलन की आस भरती हो।।

अदा तेरी कयामत है सितम दिन रात ढाती है।

प्रतीक्षा की घड़ी में आप क्यों चुपचाप रहती हो।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 20/06/2025

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विधाता छंद- कलम तलवार बन जाये

मापनी- 1222 1222 1222 1222

भरो कवि सत्य की स्याही कलम तलवार बन जाये।

सदा ये जुल्म प्रति आवाज हक अधिकार बन जाये।।

नहीं चमचागिरी अरु चाटुकारी कवि कलम करना।

उजागर झूठ का करना सुखी संसार बन जाये।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

प्रदीप छंद

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