मंगलवार, 23 सितंबर 2025

प्रदीप छंद

 प्रदीप छंद- अशिक्षा

जोत जलालव शिक्षा के जी, मन मंदिर के द्वार मा।

धरे अशिक्षा के दुख ला तुम, झन रोवव अँधियार मा।।


शिक्षा शिक्षित करथे सब ला, कहिथे ग्रंथ कुरान हा।

शिक्षा ले ही मिलथे जग मा, आदर अउ सम्मान हा।।

पढ़े-लिखे शिक्षित होये ले, आथे सुख परिवार मा।

जोत जलालव शिक्षा के जी, मन मंदिर के द्वार मा।।


बेटी-बेटा मा शिक्षा बर, झन तो होवय भेद हा।

सार्थक तभे हवय शिक्षा हा, कहिथे गीता वेद हा।

नर- नारी ला शिक्षा पाना, हे मौलिक अधिकार मा।

जोत जलालव शिक्षा के जी, मन मंदिर के द्वार मा।।


शिक्षा ले संस्कार समाहित, होथे ज्ञान समृद्ध जी।

शिक्षा पाये बर नइ लागे, उमर युवा अउ वृद्ध जी।।

शिक्षा अगम अथाह समुंदर, बैतरणी के पार मा।

जोत जलावव शिक्षा के जी, मन मंदिर के द्वार मा।।


शिक्षा के बलबूते गढ़ही, भारत देश विकास ला।

रोजगार के अवसर देही, हरही जग-जन त्रास ला।।

नाम देश के ऊँचा होही, सुन लौ तब संसार मा।

जोत जलालव शिक्षा के जी, मन मंदिर के द्वार मा।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 19/08/2025

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प्रदीप छंद- *गरीबी*

भूख गरीबी के पीरा ला, समझे जेन गरीब हे।

नौकर-चाकर कार बंगला, सब ला कहाँ नसीब हे।।


रोज कमाथें रोजे खाथें, रहिथें काम तलाश मा।

आही इक दिन सुख जिनगी मा, बाँध रखे मन आस मा।।

ये आँखी के बस सपना ये, सच तो कहाँ करीब हे।

भूख गरीबी के पीरा ला, समझे जेन गरीब हे।।1


पोट-पोट तो पेट करे अउ, भूख मरे परिवार हा।

महँगाई के मार दिखावत, हावँय नित सरकार हा।।

दूर गरीबी कइसे होही, करे काय तरकीब हे।

भूख गरीबी के पीरा ला, समझे जेन गरीब हे।।2


हे अभिशाप गरीबी जग मा, ये समाज बर दाग ये।

हक ले वंचित जिनगी जीना, का गरीब के भाग ये।।

हे सरकार विधाता कइसे, खेले खेल अजीब हे।

भूख गरीबी के पीरा ला, समझे जेन गरीब हे।।3

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/09/2025

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*(मातृ दिवस पर स्मृतिशेष मोर महतारी ला सादर समर्पित🙏🏻💐)*


प्रदीप छंद- *दाई* 

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दाई के अँचरा मा मिलथे, दुनिया के सुख छाँव हा।

लगथे चारो धाम बरोबर, पबरित ओखर पाँव हा।।


रखे ओद्र मा नौ महिना ले, बन के सिरजनहार जी।

सहे प्रसव पीड़ा ला भारी, बड़का हे उपकार जी।।

जनम दिये तब ये दुनिया मा, वंदन हे जग नाँव हा।

लगथे चारो धाम बरोबर, पबरित ओखर पाँव हा।।


अमरित गोरस ला तो पीके, लइका भरे हुँकार ला।

नइ तो कभू चुका जी पावँय, कोनों पूत उधार ला।।

दवा दुआ दाई के पा के, भरथे दुख के घाँव हा।

लगथे चारो धाम बरोबर, पबरित ओखर पाँव हा।।


गजानंद हे आज अभागा, पाये मया दुलार ला।

कइसे छोड़ चले गे दाई, रोवत ये परिवार ला।।

दाई बिन तो बिरथा लगथे, खोर गली घर गाँव हा।

लगथे चारो धाम बरोबर, पबरित ओखर पाँव हा।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/05/2025

गुरुवार, 11 सितंबर 2025

सत्यबोध वाणी (दोहावली)

 सत्यबोध वाणी (1)

सत्यबोध वाणी सुनो, पाओ नेक सलाह।

कर्म राह को थामकर, पूर्ण करो सब चाह।।


लक्ष्य साधकर जो बढ़े, पाये वही मुकाम।

खुद में रख कर हौसला, गढ़े नया आयाम।।


भाग्य भरोसे बैठना, काम आलसी लोग।

सफल नहीं होते कभी, खोते नित सुख योग।।


क्या लेकर आया यहाँ, क्या जायेगा साथ।

इसीलिए जग में खुशी, बांटो दोनों हाथ।।


जीवन योग वियोग का, जग में अचरित खेल।

सत्यबोध संघर्ष से, होता सुख से मेल।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 06/09/2025

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सत्यबोध वाणी (2)

सत्यबोध संसार में, फैला भ्रम भय जाल।

इसीलिए बदतर हुआ, है लोगों का हाल।।


अंधभक्ति तो इस कदर, फैलाया है पाँव।

ढोंग रूढ़ि पाखण्ड का, घना हुआ है छाँव।।


लोगों को यश कर्म का, रहा नहीं परवाह।

भागे अंधाधुंध बस, रख दौलत की चाह।।।


जीवन जीने की कला, लोग गए हैं भूल।

सुख सुविधा भोगी बने, खो बैठे हैं मूल।।


सूझबूझ इंसान का, हो गया चौपट आज।

मन में बस लिप्सा बढ़ी, पाने को सरताज।।


बची नहीं इंसानियत, शर्मशार है कर्म।

थामे पाप अधर्म को, भूल गए सतधर्म।।


संतो की वाणी अमर, अमर नाम गुरु नाम।

अमल जिंदगी में करो, कर लो नेकी काम।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 07/09/2025

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सत्यबोध वाणी (3)

मन को अब चुभने लगी, अच्छाई की बात।

लोग मुफ्त में ले रहें, झूठ भरी खैरात।।


बड़े बुजुर्गों का नहीं, घर में अब सम्मान।

पर पत्थर को पूजते, घूम रहें इंसान।।


द्वेष अहं ईर्ष्या बढ़ा, बढ़ा लोभ सुख चाह।

मानव पर उपकार का, भूल गए हैं राह।।


करते अपने ही यहाँ, अपनों पर प्रतिघात।

तोड़ रहें विश्वास को, मन में रख कटु बात।।


छिड़क रहें तन पर नमक, देकर खुद ही घाव।

मानव मन में मर गया, मानवता का भाव।।


पद पैसा का रौब मत, दिखलाना इंसान।

रह जायेगा सब धरा, धरो बात तुम ध्यान।।


सत्यबोध सत्कर्म पर, रख चलना विश्वास।

जिंदा आत्म जमीर हो, जब तक तन में साँस।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 08/09/2025

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सत्यबोध वाणी (4)

उनको संत न मानिए, जिनके हृदय कठोर।

मन मानवता के लिए, होय न भाव विभोर।।


नाशवान इस देह का, मत करना अभिमान।

होगा जग में सुन सदा, कर्मों से पहचान।।


करना कभी गुरूर मत, समय जवानी काल।

वर्तमान का भोग सुख, रहो सदा खुशहाल।।


मानव ज्ञान विवेक से, कर लो कर्म विशेष।

रखना मत मन में कभी, औरों के प्रति द्वेष।।


कभी किसी कमजोर को, नहीं सताना आप।

दुनिया में इससे बड़ा, और नहीं कुछ पाप।।


तरसें नहीं गरीब जन, जब खाने को अन्न।

गजानंद तब तो हुए, संत कबीर प्रसन्न।।


दया- दीनता जीव प्रति, मुक्ति युक्ति का सार।

सत्यबोध प्रभु नाम जप, कर लो भव को पार।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 09/09/2025

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सत्यबोध वाणी (5)

नीयत नियति नितांत है, पाने को सम्मान।

कहते संत सुजान अरु, गीता ग्रंथ कुरान।।


स्वयं बुराई झाँक कर, मिटा चलो मन मैल।

संबल खुद को दीजिये, बन कोल्हू का बैल।।


वृहद वेदना जो सहे, पर उपकार हितार्थ।

है जग में मानव वही, सत्यबोध परमार्थ।।


करने नेकी कर्म को, कर लो दृढ़ संकल्प।

माया मनका जाप में, उम्र करो मत अल्प।।


पकड़ा चाबुक है समय, होकर अश्व सवार।

लेकर इससे सीख नित, मानव कर्म सुधार।।


संगत संतत संत का, निर्मल करे स्वभाव।

कुत्सित संगत से मिले, मन को गहरा घाव।।


सत्यबोध संसार सुख, पाता वह इंसान।

जिनके शब्द विचार में, हो सुचिता गुणगान।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 10/09/2025

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सत्यबोध वाणी (6)

अभिरंजित है चेतना, लिए वेदना घाव।

सत्यबोध जब से बढ़ा, रिस्तों में अलगाव।।


बार-बार मन सोचता, दिखे बहुत बेचैन।

राह कटीली हो गई, शूल चुभे दिन रैन।।


कागा मोती चुग रहा, हंस न पीये क्षीर।

तभी दिखाई पड़ रही, जग में चिंतन पीर।।


कल्पित कल की कल्पना, करो न व्यर्थ विचार।

देख न मुड़कर भूत को, वर्तमान है सार।।


धर्मनीति नित घट रही, पाप बढ़ा चहुँओर।

सज्जन पाये हैं सजा, लूट रहें सुख चोर।।


बाँट रहें ज्ञानी बने, सबके सब अब ज्ञान।

पर ध्यानी कोई नहीं, करने गुरु का ध्यान।।


सत्यबोध सच सामने, सच को मिले न मोल।

राज किये हरदम वही, जिनके झूठे बोल।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/09/2025

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सत्यबोध वाणी (7)

सहज सरल व्यवहार हो, पनपे हृदय न द्वंद।

सत्यबोध कहते फिरे, अनुनय में आनंद।।


सुख का जड़ विश्वास है, संशय दुख का शूल।

शक से सर्वविनाश है, कर लो बात कबूल।।


जरा जवानी तो सदा, फिसले रेत समान।

समय कभी रुकता नहीं, कर लो कर्म महान।।


पद पैसे की लालसा, पाल रखा इंसान।

जायेगा कुछ भी नहीं, तेरे साथ श्मशान।।


चिंता चिंतन में घटे, मानव रूप शरीर।

कर्मवीर होते नहीं, जग में कभी अधीर।।


किये घृणा ने है यहाँ, प्रेमवृष्टि का अंत।

इसीलिए पतझड़ हुआ, खिलता हुआ बसंत।।


जीवन का यह ध्येय हो, रहना संत समान।

मिश्री घोलें प्रेम का, करें सभी रसपान।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 12/09/2025

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सत्यबोध वाणी (8)

मैं का रोगी सब यहाँ, मैं से सभी उदास।

सत्यबोध मैं ने किया, नाश यहाँ विश्वास।।


क्रोध विसर्जन कीजिये, त्याग सभी मन द्वेष।

प्राप्ति शांति सुख के लिए, यही उपाय विशेष।।


प्रेम पराया हो गया, घृणा हुई मनमीत।

गायब है अपनत्व पन, अब के जग की रीत।।


काँटों पर खिलने लगे, रंग बिरंगे फूल।

घायल माली हो गए, सहते-सहते शूल।।


मानव माया मोह में, भूल गया ईमान।

स्वार्थ भरे संसार में, वफादार अब श्वान।।


नजर गड़ाये काग अब, बैठा है मुंडेर।

छीन न रोटी दाल ले, करो नहीं तुम देर।।


जीवन व्यर्थ प्रलाप में, नहीं बिताओ आप।

छोड़ो पश्चाताप सब, कर लो गुरु का जाप।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 13/09/2025

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सत्यबोध वाणी (9)

सत्यबोध कथनी करें, करनी से साकार।

तभी मिलेगी हर खुशी, सुखद लगे संसार।।


निर्झर बन झरना झरे, नदिया करे न शोर।

पक्षी के कलरव बिना, हुए आजकल भोर।।


सोचे मन में मधुमती, देख दृश्य मधुमास।

सभी तरफ वीरानगी, कलियाँ लगी उदास।।


जीते जी माँ-बाप का, किये न सेवा आप।

गंगा मृत्युपरांत में, नहीं धुलेगा पाप।।


बहू सास से लड़ रही, पूत लड़े हैं बाप।

सत्यबोध संसार में, बढ़ा पाप संताप।।


जिस घर में होता नहीं, बेटी का सम्मान।

उस घर में तो पूत बन, पैदा ले शैतान।।


हर दामन में दाग है, दिखते कर्म मलीन।

माया के पीछे सभी, मानव हुए अधीन।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 17/09/2025

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सत्यबोध वाणी (10)

गहन तमस है हर तरफ, नहीं कहीं उजियार।

सत्यबोध मैं की चढ़ी, सबको आज बुखार।।


मन में आशा की लहर, मारे सदा हिलोर।

परे निराशा से रहो, मिले तभी सुख भोर।।


दृढ़ संकल्पित हो चलें, पाने स्वयं मुकाम।

बाधाओं को लाँघना, कर्मवीर का नाम।।


माला जपिये प्रेम की, प्रेम बिना सब शून्य।

दान दीजिये प्रेम का, बहुत बड़ा यह पुण्य।।


बची नहीं इंसानियत, बचा नहीं ईमान।

मानवता मन में नहीं, बदल गए इंसान।।


त्याग विसंगति को सभी, रखें आत्म को शुद्ध।

सत्य अहिंसा प्रेम पथ, चलकर मिलते बुद्ध।।


अपनों में तकरार है, रिस्तों में अलगाव।

सत्यबोध कटु बोल के, असहनीय है घाव।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 18/09/2025

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सत्यबोध वाणी (11)

मति जग की मारी गई, हो गई बुद्धि नाश।

तर्कशक्ति भी खो गई, बढ़ी झूठ पर आस।।


सजा रखे हैं स्वर्ण से, पत्थर को इंसान।

जो न कभी बोले हँसे, देंगे क्या वरदान।।


घर पर तो माता-पिता, भूख मरे हैं पूत।

मंदिर छप्पन भोग दें, यह कैसी करतूत।।


मन्दिर मस्जिद ढूँढ़ते, शांति प्राप्ति को लोग।

घट के देव जपे बिना, मिले नहीं सुख योग।।


लोग दिखावे के लिए, देते बेच जमीर।

दूर भलाई से रहे, भूल पराये पीर।।


बजते हैं थोथा चना, खुद में रख अभिमान।

क्योंकि कभी पाया नहीं, सत संगत गुरु ज्ञान।।


सर्व धर्म सम्मान का, जिन्हें नहीं है कद्र।

सत्यबोध कैसे कहें, लोग उसे हम भद्र।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 19/09/2025

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सत्यबोध वाणी (12)

भरी दुखों से याचना, सुनें जगत में कौन।

समय चले विपरीत तब, सुख भी रहते मौन।।


सच्चाई का कौन कब, किये यहाँ पर मान।

जग में झूठ फरेब का, होता है गुणगान।।


स्वार्थ भरे संसार में, किस पर करें यकीन।

शूल गड़ाते लोग हैं, खुद में रह तल्लीन।।


देख लिया संसार को, देख लिया जग रीत।

मतलब के सब यार हैं, मतलब के सब मीत।।


बस पद पैसों के लिए, जिंदा हैं इंसान।

लोक भलाई के लिए, बचा नहीं ईमान।।


नैतिकता का कब कहाँ, हुआ भला सम्मान।

लोग अनैतिक काम कर, बनते यहाँ महान।।


जो करते चमचागिरी, उसके बनते काम।

सत्यबोध सत राह पर, हुए सदा बदनाम।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 20/09/2025

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सत्यबोध वाणी (13)

सम्बन्धों के तार को, रखिये जोड़ जरूर।

दो दिन की है जिंदगी, रहो नहीं मगरूर।।


मानव तृष्णा बढ़ रही, कम न हुआ संतोष।

फिर भी मनुज विधान को, देते हैं नित दोष।।


लोग दिखावे के लिए, पीट रहें हैं ताल।

करें जरूरत कम तभी, जीवन हो खुशहाल।।


सभी खजानों से बड़ा, है मुख मीठे बोल।

सत्यबोध वाणी कहो, हिये तराजू तोल।।


पद पैसा अरु प्यार का, करें सही उपयोग।

इन तीनों के योग से, सफल हुए हैं लोग।।


आज तुम्हें जो प्राप्त है, समझो वह पर्याप्त।

अधिक प्राप्ति की चाह में, होता है दुख व्याप्त।।


औरों के सुख देखकर, रहें न व्याकुल आप।

सत्यबोध जीवन सुखद, करो कर्म पथ नाप।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/09/2025

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सत्यबोध वाणी (14)

सच्चाई को कह सकें, नहीं किसी में जोर।

लूट लिए इस देश को, देखो काले चोर।।


फैला भ्रष्टाचार का, सभी तरफ है जाल।

शोषण अत्याचार से, जन-जन हैं बेहाल।।


दीन-दुखी को है नहीं, रोटी दाल नसीब।

फिर भी लोग हबीब बन, खेलें खेल अजीब।।


नेता लेता बस यहाँ, जनताओं से वोट।

पर बदले में कुछ नहीं, नियत भरी है खोट।।


खुद का भरने जेब बस, नेता हैं मशगूल।

सिर्फ घोषणा ही किये, काम धरातल भूल।।


राजनीति मैदान में, होते अजीब खेल।

झूठे सत्तासीन अरु, सच्चाई को जेल।।


लोगों के विश्वास पर, नित्य कुठाराघात।

वादें झूठी खोखली, झूठे सब जज्बात।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 22/09/2025

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सत्यबोध वाणी (15)

सत्यबोध संसार का, बदल गया परिवेश।

धारण मानव ने किए, हैं अब रूप विशेष।।


मातु-पिता दुश्मन हुए, सास ससुर अब मीत।

भाई से बढ़कर हुए, साला-साली प्रीत।।


सास-बहू के बीच में, होते निस-दिन रार।

इसीलिए तो आजकल, बिखर रहा परिवार।।


भाई से भाई लड़े, बँटवारा के नाम।

बाँट लिए माता-पिता, बाँट लिए सुख धाम।।


सम्बन्धों के बीच में, बचा नहीं विश्वास।

क्योंकि हो गए लोग अब, ईर्ष्याओं के दास।।


सिसक बुढ़ापा है रहा, करके बचपन याद।

चिंताओं से मुक्त तब, रहते थे आजाद।।


सत्यबोध करना नहीं, पद धन रूप घमंड।

यहीं मिलेगा एक दिन, सब कर्मों का दंड।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 23/09/2025

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सत्यबोध वाणी (16)

सत्यबोध संसार में, दर्द सभी का एक।

बाँटे औरों को खुशी, कर्म यही है नेक।।


जीव चराचर के लिए, रखें प्रेम सद्भाव।

कर्म वचन व्यवहार से, कभी न देवें घाव।।


दूर बुराई से रहें, त्यागें क्रोध घमंड।

हृदय जलाता है सदा, ईर्ष्या आग प्रचंड।।


बोलें कभी न बोल कटु, है यह तीर समान।

बोली बोलें प्रेम का, मानवता रख ध्यान।।


पढ़ लो पोथी लाख तुम, पढ़ लो वेद पुराण।

दर्द पराया जब कभी, किये नहीं संत्राण।।


मानव-मानव एक सब, नहीं जन्म में फर्क।

भेद करे जो जाति में, पाये गति वह नर्क।।


जन्मजात से हैं नहीं, लोग विशेष महान।

सत्यबोध संसार में, कर्म दिलाते मान।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध "

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 24/09/2025

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सत्यबोध वाणी (17)- शिक्षा


शिक्षा से संस्कार की, होती है पहचान।

सत्यबोध शिक्षा बिना, मिले नहीं सम्मान।।


शिक्षा से होता सदा, मानव बुद्धि विकास।

मिटता है मन का तमस, बढ़ता है विश्वास।।


भरता है व्यवहार में, शिक्षा शिष्टाचार।

ढोंग रूढ़ि पाखण्ड पर, करता वज्र प्रहार।।


शिक्षा उन्नति मंत्र का, करते रहिए जाप।

मिले सफलता हर कदम, मिटे सभी संताप।।


शिक्षा सभ्य समाज का, गढ़ता है प्रतिमान।

आर्थिक देश विकास का, प्रथम यही सोपान।।


कर लो जीवन में सभी, शिक्षा का उजियार।

संविधान से है मिला, सबको यह अधिकार।।


सत्यबोध संसार में, शिक्षा दिव्य प्रकाश।

आनंदित जीवन करे, देकर ज्ञान उजास।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 25/09/2025

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सत्यबोध वाणी (18)- श्रम

सत्यबोध श्रम से सृजन, सुख आशा विश्वास।

श्रम की रोटी में सदा, होती बहुत मिठास।।


शक्ति सभी श्रम से सृजित, सृजित शांति संसार।

श्रम से सर्वहिताय है, श्रम से सुख विस्तार।।


मन में जब सच्ची लगन, का जागे ख्यालात।

श्रम का मोती माथ पर, चमके तब दिन-रात।।


श्रम से पर्वत पर पड़ी, जाये बड़ी दरार।

करती है धरती गगन, श्रम की जय जयकार।।


जो श्रम से रहता विमुख, पाता न सुख करीब।

दास बने आलस्य का, देता दोष नसीब।।


श्रमजीवी श्रम से सुनो, रहते कभी न दूर।

फिर भी सुविधा से परे, जीने को मजबूर।।


पूजा श्रम की कीजिये, श्रम से सुख संत्राण।

सत्यबोध श्रम से सुनो, होता कष्ट प्रयाण।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 26/09/2025

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सत्यबोध वाणी (19)- संत

सत्य आचरण जो करे, वही कहाता संत।

सत्यबोध सतधर्म का, जिनको ज्ञान अनंत।।


करिए जीवन में सदा, संगत संत सुजान।

निर्मल करे स्वभाव जो, चंदन पेड़ समान।।


भेदभाव से दूर रह, समझे सबको एक।

देते सबको ज्ञान सम, संत वही है नेक।।


दया-क्षमा-संतोष ही, संतो का है धर्म।

सोच विचार पवित्र रख, करते हैं सत्कर्म।।


होते दर्शन हैं यहाँ, संत रूप में नाथ।

स्वार्थ भावना से परे, उठे मदद जब हाथ।।


भक्ति प्राप्ति का संत ही, सदा दिखाते राह।

संत बदौलत ही मिले, सबको ज्ञान अथाह।।


उदाहरण में संत का, सतगुरु घासीदास।

नानक दास कबीर भी, संत कहाये खास।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 27/09/2025

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सत्यबोध वाणी (20)- कुरीति

जग में ढोंग कुरीति का, बिछा हुआ है जाल।

सत्यबोध भ्रम रूढ़ि नित, नोंच रहा है खाल।।


अंधभक्ति की आग में, झुलस रहें हैं लोग।

दर-दर भटका खा रहें, पाने को सुख योग।।


जाति-धर्म में भेद कर, बढ़ा रहें अलगाव।

भूल सभी इंसानियत, अंतस देते घाव।।


जानबूझकर लोग हैं, सच्चाई से दूर।

इसीलिए तो बढ़ रहा, तथाकथित दस्तूर।।


आडंबर पाखंड पर, बढ़ा लिए हैं आस।

कौन झूठ अब कौन सच, हो कैसे विश्वास।।


समझें परखें तथ्य को, तभी करें विश्वास।

ऑंख मूँद कर मत बनें, ढोंग रूढ़ि का दास।।


नए-नए अब रूप में, ढोंग रूढ़ि है व्याप्त।

सत्यबोध आगे बढ़ो, करने इसे समाप्त।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 28/09/2025

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सत्यबोध वाणी (21)- बेटी

बेटी घर की शान है, बेटी घर का मान।

जन्म दिए जो बेटियाँ, हैं वें मातु महान।।


पापा की होती परी, माँ की होती जान।

होती बहुत पसंद है, बेटी की मुस्कान।।


त्याग समर्पण भावना, बेटी की पहचान।

शीतल छाया प्रेम का, संस्कारों की खान।।


बेटी बागों की सुमन, बन खिलते दिन-रात।

देती है परिवार को, खुशियों की सौगात।।


बेटी को अबला कभी, नहीं समझना आप।

सबला बनकर हैं दिए, आसमान को नाप।।


मातु-पिता का हाल तब, होता है बेहाल।

बेटी सूना कर हृदय, जाती जब ससुराल।।


बेटी भारत देश की, कभी नहीं कमजोर।

सत्यबोध बेटी किये, सदा सुनहरा भोर।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 29/09/2025

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सत्यबोध वाणी (22)- पिता

पिता समर्पण प्रेम का, परिभाषा है त्याग।

पिता सिखाता है हमें, दया धर्म अनुराग।।


दर्द सभी सहकर पिता, रहता है चुपचाप।

कभी किसी के सामने, करता नहीं प्रलाप।।


आसमान बनकर पिता, किए नेह बरसात।

इस धरती पर हैं पिता, ईश्वर की सौगात।।


पिता उठाते बोझ सब, पाल रखे परिवार।

जिनके कंधों पर टिका, है खुशियों का भार।।


खून पसीना सींच कर, देते छाँव मकान।

तपते खुद ही धूप में, होते पिता महान।।


नहीं और कुछ चाहिए, मुझको तो वरदान।

पिता रूप में पा लिए, सत्यबोध भगवान।।


पिता बुढ़ापे में कभी, होवे नहीं अनाथ।

सत्यबोध सच पूत बन, थामे रखना हाथ।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 30/09/2025

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सत्यबोध वाणी (23)- माँ

माँ होती ममतामयी, माँ करुणा की खान।

माँ से बढ़कर है नहीं, दुनिया में भगवान।।


उम्मीदों की डोर माँ, आशा में विश्वास।

माँ से ही संसार है, माँ धरती आकाश।।


माँ के आँचल छाँव में, सुख है स्वर्ग समान।

माँ से ही साँसे मिली, माँ से ही पहचान।।


माँ फुलवारी नेह का, माँ है प्रेम पराग।

माँ से ही गुलजार है, जीवन रूपी बाग।।


गोद उठाकर माँ हमें, बचपन दिया दुलार।

कभी चुका सकते नहीं, माँ का दूध उधार।।


दुआ दवा से कम नहीं, माँ का आशीर्वाद।

हर कोई तकलीफ में, माँ को करते याद।।


माँ से ही जीवन शुरू, माँ पर जीवन अंत।

सत्यबोध माँ से मिले, सबको खुशी अनंत।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 01/10/2025

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सत्यबोध वाणी (24)- रावण

रावण-रावण सब कहे, है पर रावण कौन।

द्वेष अहं रावण बने, बैठा मन में मौन।।


सबमें रावण है बसा, लेकर स्वार्थ तमाम।

करते हो फिर व्यर्थ ही, रावण को बदनाम।।


मन का रावण मारिए, मरा न रावण आज।

करते हो पुतला दहन, जरा न आई लाज।।


असली रावण तो रहा, ज्ञानवान विद्वान।

रक्षा धर्म जमीर हित, दे दी अपनी जान।।


एक भूल की मिल रही, जिसे सजा हर साल।

किये सैकड़ों भूल जो, तिलक सजे हैं भाल।।


वर्तमान में कौन है, असली रावण खोज।

निगल रही सबकी खुशी, शोषण करते रोज।।


रावण-रावण को जला, रहा आज बन राम।

सत्यबोध जिनका रहा, नाम कर्म बदनाम।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 02/10/2025

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सत्यबोध वाणी (25)- रोटी

सत्यबोध संसार में, है रोटी का खेल।

कोई रोटी के लिए, फिरे काटते जेल।।


मानव की जठराग्नि को, रोटी करती शांत।

जीव चराचर के लिए, रोटी बहुत नितांत।।


रोटी सब दो जून की, पाने हैं बेताब।

करते हैं श्रम रात दिन, पूरा करने ख्वाब।।


रोटी की चिंता लिए, बाप गया परदेश।

खुश रखने परिवार घर, सहा रात-दिन क्लेश।।


बित्ता भर इस पेट की, बहुत बड़ी है भूख।

डाका इस पर डालते, फिर भी चोर रसूख।।


खून पसीना एक कर, कृषक उगाते अन्न।

श्रम की रोटी खा तभी, होते सभी प्रसन्न।।


बची रोटियों को कभी, डाल न कूड़ादान।

देना किसी गरीब को, होगा पुण्य महान।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 03/10/2025

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सत्यबोध वाणी (26)- समाज

मानव आज समाज का, मर्म चुका है भूल।

डूब अहं निज स्वार्थ में, हृदय चुभाते शूल।।


इज्जत दौलत नाम यश, सब कुछ दिया समाज।

सामाजिक बनकर मनुज, कर लो विशेष काज।।


ढोंग कुरीति समाज से, करना है अब दूर।

आडम्बर पाखण्ड का, मिट जाए दस्तूर।।


शिक्षित सभ्य समाज से, संभव देश विकास।

करना है इसके लिए, मिलकर सतत प्रयास।।


बोना नहीं समाज में, कभी घृणा का बीज।

बनकर पूत समाज का, सबका रहो अजीज।।


बाँटो नहीं समाज को, जाति धर्म के नाम।

दिन-दिन देखो हो रही, मानवता बदनाम।।


हो संस्कार समाज में, संस्कारित हो लोग।

सबके जीवन में तभी, सत्यबोध सुख योग।।

✍🏻 इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 04/10/2025

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सत्यबोध वाणी (27)- मनन

मनोभावना है मनन, करने शांति विचार।

मनन योग तप साधना, मनन ज्ञान आधार।।


मनन करें हम आप सब, करने कर्म महान।

अमल करें हम सत्य पथ, त्याग द्वेष अभिमान।।


मननशीलता भाव ही, मानव की पहचान।

सत्य आचरण कर बनें, सच्चा हम इंसान।।


मनन कराता है सदा, आत्म ज्ञान का बोध।

होता है एकाग्र मन, सत्य प्रमाणित शोध।।


मान मनन की बात को, पाओगे सद्ज्ञान।

करके ही सज्जन मनन, बनते मनुज महान।।


मन में मानव कर मनन, करने दूर विकार।

जीवन को करने सरल, बाँटे जग में प्यार।।


सत्यबोध आओ करें, मनन शक्ति मजबूत।

चिंताओं को त्याग दें, वर्तमान कल भूत।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 05/10/2025

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सत्यबोध वाणी (28)- शरद

आयी आँगन में शरद, लेकर ठंडक साथ।

पात-पात पड़ने लगा, शबनम मोती माथ।।


लगा चहकने खग गगन, अपना पंख पसार।

चादर ओढ़े ऋतु शरद, किये सर्द सत्कार।।


सर्द शीत की रात में, जलने लगे अलाव।

आतुर देने को शरद, तन को ठिठुरन घाव।।


छन-छन कर है झाँकती, पेड़ों से अब धूप।

हवा छेड़ती रागिनी, लगती छटा अनूप।।


कलियाँ सारी खिल गई, महक उठा अब बाग।

फूलों के प्रति बढ़ गया, भौंरो में अनुराग।।


स्वर्ण धान की बालियाँ, झूम रही है खेत।

करने लगे किसान अब, फसल काटने चेत।।


नवल रूप बिखरी धरा, लेकर शरद उमंग।

गगन शुशोभित कर रहा, स्वर्ण किरण का रंग।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 06/10/2025

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सत्यबोध वाणी (29)- अपराध

दिन-दिन भारी बढ़ रहा, पैमाना अपराध।

पनप रहा है हर तरफ, अपराधी निर्बाध।।


हत्या चोरी लूट तो, हुई बात अब आम।

शर्मसार इंसानियत, मानवता बदनाम।।


कारण क्या अपराध का, इस पर करें विचार।

नशा नाश की हर गली, बेच रही सरकार।।


कारण है अपराध का, शोषण भ्रष्टाचार।

तोड़ कमर सबकी रखी, महँगाई की मार।।


बेरोजगार आज हैं, दिखते युवा हताश।

नहीं हाथ में नौकरी, व्यर्थ पढ़ाई पास।।


संविधान कमजोर अब, पंगु हुआ कानून।

दहशतगर्दी कर रहे, नित्य नियम का खून।।


अपराधों का आँकड़ा, देखो गूगल खोज।

सत्यबोध अपराध अब, गाँव शहर है रोज।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 09/10/2025

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सत्यबोध वाणी (30)- अश्पृश्य

जरा ध्यान अब दीजिये, विद्यमान परिदृश्य।

वर्तमान परिवेश में, भेदभाव अश्पृश्य।।


जाति-धर्म में हो रही, आज श्रेष्ठता जंग।

मानवता अब मर चुकी, शांतियता है भंग।।


छूत अछूत समाज पर, लगा आज है दाग।

नोंच रहें इंसानियत, मानव बनकर काग।।


पशु पक्षी से प्रेम पर, घृणापात्र इंसान।

हुए आज इस दौर में, पढ़े लिखे नादान।।


आग हवा भू जल गगन, किये कभी क्या फर्क।

फिर मानव क्यों दंभ भर, करते फिरे कुतर्क।।


सबके तन में एक ही, होता रक्त प्रवाह।

हाड़ मास भी एक ही, देखो उठा निगाह।।


आओ सभ्य समाज का, स्वप्न करें साकार।

मानव-मानव एक का, पाठ पढ़ें हम सार।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/10/2025

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सत्यबोध वाणी (31)- विज्ञान

मानव जीवन शून्य है, बिना ज्ञान विज्ञान।

सभी काम विज्ञान ने, किया सरल आसान।।


पहिये से हल आग तक, खोज हुई शुरुआत।

सूर्य चंद्रमा गति दिशा, आज हमें है ज्ञात।।


खाते कच्चा मांस थे, जब वनमानुष लोग।

आज पकाकर खा रहें, कर विज्ञान प्रयोग।।


झोपड़ियों से हम निकल, रहते आज मकान।

नहर सड़क पुल रेल पथ, देन सभी विज्ञान।।


उगल रही बंजर धरा, स्वर्ण अन्न तो आज।

उपजाऊ मिट्टी हुई, हुआ अनोखा काज।।


वैज्ञानिक विज्ञान का, प्रतिपादित सिद्धांत।

करके यह साबित किये, अपना शोध वृतांत।।


सदुपयोग विज्ञान का, है जीवन वरदान।

दुरुपयोग अभिशाप है, सत्यबोध धर ध्यान।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 13/10/2025

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सत्यबोध वाणी (32)- फल

सेवन फल का कीजिये, बहुत फायदेमंद।

रखते स्वस्थ शरीर को, मन को दे आनंद।।


कम कैलोरी युक्त ही, फल खाना उपयुक्त।

रह पायेंगे हम तभी, मोटापा से मुक्त।।


दमा मरीजों के लिए, सर्वोत्तम है सेव।

सही करे पाचन क्रिया, बनकर यह सुखदेव।।


कब्ज अपच में लाभ-प्रद, है केला अंगूर।

होते जिसमें फाइबर, लौह तत्व भरपूर।।


खून बढ़ाने के लिए, खायें फल अंजीर।

हड्डी को मजबूत कर, हरते तन की पीर।।


दुबले पतले लोग जन, खायें चीकू रोज।

वजन बढाने में हुए, फलदायक यह भोज।।


रक्तचाप को कम करे, हृदय रोग को दूर।

सत्यबोध फल एक हम, खायें रोज जरूर।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 15/10/2025

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सत्यबोध वाणी (33)- दशा दिशा इस देश की

दशा दिशा इस देश की, बद्तर और खराब।

खुलेआम अब बिक रहा, गांजा भांग शराब।।


पढ़े लिखे शिक्षित युवा, रोजगार से दूर।

दर-दर भटका खा रहें, सपना चकनाचूर।।


महँगाई की मार ने, कमर दिये हैं तोड़।

ऊपर से हर चीज में, दिये टैक्स हैं जोड़।।


लड़ते कुर्सी के लिए, अफसर नेता लोग।

भूल भलाई काम को, खाते छप्पन भोग।।


दीन दलित पर हो रहा, शोषण अत्याचार।

रहा सुरक्षित अब नहीं, संविधान अधिकार।।


लोग निकम्मे हो गए, खाकर फ्री का अन्न।

देख फलित खुद चाल को, है सरकार प्रसन्न।।


खाकर धर्म अफीम को, लोग नशे में चूर।

सत्यबोध जी इसलिए, सच से सब हैं दूर।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 17/10/2025

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सत्यबोध वाणी- (34)-दीपावली


ले आई दीपावली, खुशियों की सौगात।

घर-घर में दीपक जले, उठी जगमगा रात।।


रंगोली से हैं सजे, सबके आँगन द्वार।

फोड़ पटाखे कर रहें, बच्चे सब मनुहार।।


देशी मिट्टी से बना, सदा खरीदें दीप।

दे पायेंगे हम तभी, खुशियाँ दीन समीप।।


धनतेरस को धन गया, दीवाली को तेल।

सत्यबोध किसने रचा, झूठ लूट का खेल।।


कोई है कंगाल तो, कोई मालामाल।

सार्थक हो दीपावली, मिटे भेद विकराल।।


दीप जलायें एक हम, उन वीरों के नाम।

सीमा पर जिसने रखी, देश सुरक्षा थाम।।


तिमिर मिटायें आत्म का, करके ज्ञान प्रकाश।

दूर दिखावे से रहें, सुख आयेंगे पास।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/10/2025

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सत्यबोध वाणी (35)- छत्तीसगढ़

धन्य धरा छत्तीसगढ़, कीर्ति करूँ गुणगान।

जहाँ प्रेम संस्कृति सुखद, संस्कारों की खान।।


पूर्व दिशा में रायगढ़, पश्चिम कबीरधाम।

उत्तर में है सरगुजा, दक्षिण सुकमा ग्राम।।


गूँजे बोल कबीर का, दामाखेड़ा धाम।

धाम गिरौदपुरी जहाँ, गुरु घासी पैगाम।।


मेला राजिम कुम्भ है, संत समागम धाम।

चंद्रखुरी ननिहाल प्रभु, पुरुषोत्तम श्री राम।।


धान कटोरा गोद में, पर्वत नदी पहाड़।

खनिज सम्पदा से भरा, बस्तर अबूझमाड़।।


छत्तीसगगढ़ी बोल ही, है इसकी पहचान।

सबके मन को मोहते, सुवा ददरिया तान।।


महतारी छत्तीसगढ़, नमन तुम्हें सौ बार।

कीर्तिमान चारो दिशा, गूँजे जय जयकार।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 01/11/2025

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सत्यबोध वाणी (36)- सच्चाई

सच्चाई से आजकल, दूर भागते लोग।

लगा लिए हैं आत्म पर, झूठ ढोंग का रोग।।


सच्चाई से न्याय का, रहा नहीं प्रिय दौर।

मूक बधिर कानून अब, पैसा है सिरमौर।।


दिए सदा हैं संत गुरु, जग को सच संदेश।

इसीलिए है शांतिमय, देश धरा परिवेश।।


कौन भला पढ़ते यहाँ, सच्चाई का पाठ।

मन मानव निज स्वार्थ में, बन बैठे हैं काठ।।


सच्चाई की जड़ बहुत, होती है मजबूत।

नहीं मिटाने से मिटे, लाख करो करतूत।।


सच का करें बखान हम, और करें गुणगान।

सच के पथ पर चल बनें, आओ अब इंसान।।


सच के पथ पर शूल है, सच के पथ पर फूल।

सत्यबोध सच के लिए, सच को करो कबूल।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 07/11/2024

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सत्यबोध वाणी (37)- चिंता

खुद चिंता कारण लिए, भटक रहा इंसान।

करते लाख उपाय पर, मिलता नहीं निदान।।


लोभ लालसा से हुए, चिंता की शुरुआत।

पद पैसे की प्यास ने, शांति किये प्रतिघात।।


व्यर्थ लिए चिंता मनुज, करना समय न व्यर्थ।

चिंता में मति मन घटे, होता काम अनर्थ।।


चिंता तुम किसके लिए, करते हो नादान।

रह जायेगा सब धरा, चले न साथ श्मशान।।


चिंता करना छोड़िए, चिंता चिता समान।

होनी होकर ही रहे, कहता यही विधान।।


जीना सीखें नित्य ही, वर्तमान लें साथ।

कल की चिंता छोड़िए, है ऊपर परमार्थ।।


कर्म नेक करते रहें, करने चिंता दूर।

सत्यबोध सुख शांति तब, पहुँचे द्वार जरूर।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 08/11/2025

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सत्यबोध वाणी (38)- सम्मान

आप मुझे मैं आपका, करें मान सम्मान।

दौर यही अब चल रहा, बात दीजिये ध्यान।।


पाने जग सम्मान नित, रहते हैं बेचैन।

प्रेम दया करुणा नहीं, बसते जिनके नैन।।


मत बाँटो खैरात में, मान और सम्मान।

लायक को ही दीजिये, होगा तब गुणगान।।


चाटुकारिता लोग कर, पाते हैं सम्मान।

मिथ्या भ्रम मन पालकर, चलते सीना तान।।


लोग बना धंधा लिए, मान बाँटना आज।

इसके पीछे है छुपा, अर्थ उपार्जन राज।।


रूप विकृत सम्मान का, लोग किये जो आज।

चमक रहा फिर भी सुनो, सिर पर उनके ताज।।


होवे मान मलीन मत, रख चलना नित ध्यान।

सत्यबोध सम्मान का, करना है सम्मान।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/11/2025

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सत्यबोध वाणी (39)- झूठ

जीवन यह अनमोल है, करो प्रेम अनुराग।

नहीं लगाना आत्म में, झूठ बुराई दाग।।


सर्व विदित है झूठ की, जड़ होती कमजोर।

पर जीवन सुख शांति को, देती है झकझोर।।


झूठ छुपाने के लिए, पड़े बोलना झूठ।

झूठ बोलते बोलते, हुई जिंदगी ठूठ।।


झूठ जीत सकती नहीं, लोगों का विश्वास।

क्योंकि झूठ रहती नहीं, कभी सत्य के पास।।


झूठ बोलने की सजा, पाते हैं वे लोग।

स्वार्थ साधने जो किये, ढोंग दिखावा जोग।।


झूठ बोलते आदमी, स्वयं छुपाने दोष।

पर सुन लो सच बोलकर, मिलता है संतोष।।


सत्यबोध जी झूठ को, करना नहीं पसंद।

थाम सदा सच राह को, रहना है स्वच्छंद।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 12/11/2025

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सत्यबोध वाणी (40)- कर्म नेक करते रहो

पैमाना इस साँस का, कोई सके न माप।

इसीलिए करते रहो, सदा ईश का जाप।।


मेहमान बन इस धरा, आये हो इंसान।

मिट्टी की इस देह पर, करना नहीं गुमान।।


मैं मेरा मन सोच को, लाना कभी न आप।

धन पद माया मोह से, बढ़ता है संताप।।


पढ़ लो जीवन में सदा, प्रेम दया का पाठ।

थाम घृणा करना नहीं, इस जीवन को काठ।।


पछतावा कुछ मत रहे, मानों मन की बात।

डूब चले कोई घड़ी, पूर्ण अमावस रात।।


कर्म नेक करते रहो, जब तक तन में साँस।

गड़े कभी मत सोच में, द्वेष द्वंद की फाँस।।


छोड़ो करना आप तो, दुनिया की परवाह।

सत्यबोध करना वही, जो है मन की चाह।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 13/11/2025

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सत्यबोध वाणी (41)- जिंदगी

कठपुतली बन जिंदगी, नाच रही है आज।

रौनकता दिखती नहीं, सूना है सब साज।।


कभी छाँव है जिंदगी, कभी जिंदगी धूप।

कभी सुखों से है भरी, कभी दुखों की कूप।।


सत्यबोध यह जिंदगी, है परिवर्तनशील।

कभी बिछाये फूल पग, कभी चुभोये कील।।


उम्मीदों की राह पर, बनकर मोटर कार।

भाग रही है जिंदगी, तेज लिए रफ्तार।।


चढ़ा रखी है स्वार्थ का, मन मटमैला रंग।

खेल रही है जिंदगी, खुद से ही खुद जंग।।


जीत जिंदगी से सको, कर लो ऐसा कर्म।

थाम चलो इंसान बन, मानवता का धर्म।।


हो मत जाये जिंदगी, पत्थर सी बेजान।

सत्यबोध हँसकर सदा, रखना होगा ध्यान।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 15/11/2025

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सत्यबोध वाणी (42)- संविधान प्रस्तावना

संविधान प्रस्तावना, का कर लें हम पाठ।

समानता बंधुत्व का, मूल तत्व है आठ।।


हम भारत के लोग सब, भारत को सम्पूर्ण।

राष्ट्र बनाने के लिए, करें प्रयास अक्षुण्ण।।


संविधान ने है दिया, सबको सम अधिकार।

धर्म पंथनिरपेक्षता, निहित स्वतंत्र विचार।।


लोकतंत्र गणराज्य में, लोग सभी आजाद।

करतें सभी स्वतंत्र हो, अभिव्यक्ति फरियाद।।


सामाजिक आर्थिक सभी, राजनीति सम न्याय।

उपासना विश्वास की, आजादी पर्याय।।


मान प्रतिष्ठा के लिए, अवसर सभी समान।

राष्ट्र एकता साथ में, अखंडता है प्राण।।


दृढ़ संकल्पित हो सभी, संविधान प्रति आज।

करें सुनिश्चित आप हम, रक्षा को आगाज।।


आओ अंगीकृत करें, संविधान को आज।

जिससे हमको है मिला, अधिकारों का ताज।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 16/11/2025

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सत्यबोध वाणी (43)- कहाँ खड़ा है देश

बिगड़ रहा सौहार्द अब, बिगड़ रहा परिवेश।

आँख खोलकर देखिए, कहाँ खड़ा है देश।।


जाति धर्म की हो रही, राजनीति चहुँओर।

ऐसे में कैसे भला, आयेगा सुख भोर।।


समरसता में कौन अब, दिए जहर हैं घोल।

पर मुख मीठे बोल रख, पीट रहे हैं ढोल।।


बड़बोले का बोल नित, हृदय चुभोये तीर।

जिसने खुद झाँका नहीं, कभी पराई पीर।।


बढ़ा हुआ है हर तरफ, शोषण अत्याचार।

नहीं सुरक्षित नारियाँ, कौन सुने चित्कार।।


दीन दलित पर लाठियाँ, बरस रही है रोज।

सत्यबोध इस जुल्म की, कौन करेगा खोज।।


सोया चौकीदार है, सीना छप्पन तान।

अंधभक्त फिर भी कहें, मेरा देश महान।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 18/11/2025

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सत्यबोध वाणी (44)- शून्य पड़ी है चेतना

शून्य पड़ी है चेतना, व्यथित हुआ है भाव।

कलम मौन हो रो रही, देते मन पर घाव।।


बिखर गई खुशियाँ सभी, भरा हृदय में शूल।

प्रभु के लिखे विधान को, करना पड़ा कबूल।।


मन का मनका टूटकर, विलग हुआ प्रभु जाप।

दिए विधाता आप ने, यह कैसा संताप।।


बदल लिया करवट समय, सुख के पल को छोड़।

निष्ठुर होकर तो दिए, दुख से नाता जोड़।।


कैसे पायें भूल हम, अब तो याद अतीत।

बढ़कर नाता खून से, जुड़ा हुआ था प्रीत।।


करता हूँ प्रभु से अरज, करो विनय स्वीकार।

बना महामानव उन्हें, देना फिर अवतार।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 03/12/2025

प्रदीप छंद

  प्रदीप छंद- अशिक्षा जोत जलालव शिक्षा के जी, मन मंदिर के द्वार मा। धरे अशिक्षा के दुख ला तुम, झन रोवव अँधियार मा।। शिक्षा शिक्षित करथे सब ल...