शुक्रवार, 26 जुलाई 2024

छंद- मलयज

 छंद- *मलयज*

मात्रा भात्रा- 8 (ननलल- नगण नगण लघु लघु)


प्रलय विलय पर।

सतत मनन कर।।

बिखर प्रचुर धन।

विकल बहुत मन।।


गरल कपट छल।

सहज सरल चल।।

शमन दमन भ्रम।

सतत मदद क्रम।।


अमिय अमित मन।

वृहत विशद तन।।

चपल प्रखर पल।

प्रमुद कुमुद जल।।


सुफल सफल कृत।

मनुज हृदय स्मृत।।

धवल नवल घट।

भजन नमन पट।।


----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 23/06/2024

बुधवार, 10 जुलाई 2024

आभार सवैया-

आभार सवैया-

गुरु महिमा

हे बंदना तोर घासी गुरू जी सुनौ मोर अर्जी खड़े हाथ हौं जोर।

माया मया लोभ फ़ाँसा कटे हो दया प्रेम के तो सदा ही नवा भोर।।

दे ज्ञान के राह ज्ञानी गुरू आप आके बिराजौ हिया द्वार मा मोर।

काया सजा सेत कंठी जनेऊ जपे नाम बाबा गजानंद हा तोर।।


बढ़ै हाथ सेवा गरीबी- 

आगू बढ़ै हाथ सेवा गरीबी पड़े ना सहे भूख भारी इहाँ आज।

भाई भलाई करौ काम नेकी तभे जी बनाबो भला सत्य के राज।।

रोवै बुढ़ापा हँसै जी जवानी धियानी धरे थेगहा जोर के लाज।

बाते गजानंद सच्चा बतावै रहौ दूरिहा चोर झूठा दगाबाज।।


आसाढ़ के माह- 

आसाढ़ के माह छाये घटा खूब पानी गिरे खेत नाला बहे धार।

ताली बजा झींगुरा साँप नाचै सुनौ गीत ला मेचका के मजेदार।।

माटी बुझा प्यास भागी बने धन्य होगे किसानी सबो लोग के द्वार।

बोले गजानंद जी धान बोबो चलौ रे सँगी साथ मा बाहरा खार।।


धंधा बना धर्म लूटे सबो ला

बाबा बने ढोंग थामे चले भक्त आँखी दुनों मूँद दौड़े करे जाप।

धंधा बना धर्म लूटे सबो ला दिये रूढ़ि पाखंड ला आज जी थाप।।

बाबा बता देव का रोक पाये करोना समे त्रासदी घोर संताप।

बोले नहीं देव डोले नहीं वो तभो ले बने हे सदा बाप के बाप।।

::::::::::::::::आभार सवैया::::::::::::::

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"


नेकी भलाई चलौ राह थामे

बाजार माया मया के लगे हे, करौ सत्य सौदा इहाँ झूठ ला छोड़।

नेकी भलाई चलौ राह थामे, दया दीन सेवा खुदे कर्म ला जोड़।।

धोखा दिखावा छलावा बिछे, पाँव आगू बढ़ा फाँस पाखंड के तोड़।

मानौ गजानंद जी बात मोरो, सदा सोच ला सत्य के राह मा मोड़।।

:::::::::::::::आभार सवैया:::::::::::

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 10/09/2024


बढाबो चलौ देश के शान

चारी बने हे बिमारी बड़े छीन लेवै खुशी एकता शांति ईमान।

दूरी बढ़ाये पड़ोसी सगा बीच मा ये तभो ले बने लोग नादान।।

काँटा बिछाये गड़ाये दगा शूल बैरी बने आज इंसान-इंसान।

बोले गजानंद बाँधौ मया मीत भाई बढ़ाबो चलौ देश के शान।।

::::::::::::::::::आभार सवैया:::::::::::::::

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 27/09/2024


खाले कमाले कमा नाम लेना

खाले कमाले कमा नाम लेना, रखे मीठ बोली सदा मीत ला जोड़।

पंछी बसेरा इहाँ चार राती, तहाँ छोड़ जाही मया पिंजरा तोड़।।

नेकी भलाई चलौ राह साँचा, भरे द्वेष ईर्ष्या अहं के घड़ा फोड़।

बोले गजानंद माटी बने देह, माटी मिले मोह माया मया छोड़।।

::::::::::::::::::आभार सवैया::::::::::::::::

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 28/09/2024





प्रदीप छंद

  प्रदीप छंद- अशिक्षा जोत जलालव शिक्षा के जी, मन मंदिर के द्वार मा। धरे अशिक्षा के दुख ला तुम, झन रोवव अँधियार मा।। शिक्षा शिक्षित करथे सब ल...