बुधवार, 18 मार्च 2026

कुण्डलिया छंद - (छत्तीसगढ़ी जनउला)

[01] कुण्डलियाँ छंद - जनउला


रहिथे दू ठन गोलवा, एक बीच मा छेद।
घूमे चिपका अंग ला, जानौ येखर भेद।।
जानौ येखर भेद, दबा मुट्ठा भर लेना।
बइठे टाँग पसार, डार दाना तॅंय देना।।
सत्यबोध बड़ काम, के हरे ये जी कहिथे।
छितका कुरिया बैठ, दरद मा कलरथ रहिथे।।

इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 07/03/2026
उत्तर- (जाॅंता)

[02] कुण्डलिया छन्द- *जनउला*

छितिका कुरिया मा करै, भुक्कुड़दुम आवाज।
नवा जमाना आय ले, हवय नँदावत आज।।
हवय नँदावत आज, गाँव ले ये हा भाई।
कूटॅंय छरॅंय अनाज, जेन मा मिल भौजाई।।
नइ जानँय जी फेर, आज के नवा बहुरिया।
सत्यबोध सुनसान, पड़े हे छितिका कुरिया।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 09/03/2026
उत्तर- (ढेंकी)

[03] कुण्डलिया छंद- *जनउला* 

हावय का तुॅंहला पता, संगी येखर नाँव।
गोल-गोल चाकर रहै, दू ठन जेखर पाँव।।
दू ठन जेखर पाँव, रहै जे लम्बा ठाढ़े।
खेत किसानी काम, बिना येखर नइ माढ़े।।
बइला भइॅंसा फाॅंद, बराती सब झन जावय।
सत्यबोध फिर आज, नॅंदावत ये हर हावय।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 10/03/2026
उत्तर - (गाड़ा)

[04] कुण्डलिया छंद- *जनउला*

माटी-गोटी ला सुघर, देवय छाँट निमार।
भौजी लेके हाथ मा, फूनय चाँउर दार।।
फूनय चाँउर दार, संग मा कनकी कुटकी।
रँधनी घर के शान, कहत हे बहिनी छुटकी।।
रोज बिहनिया शाम, बहू मन बैठ मुहाटी।
फूनँय चाँउर दार, निमारँय गोटी-माटी।।
उत्तर -(सूपा)

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/03/2026

[05] कुण्डलियाँ छंद- *जनउला*

कारी जंगल बीच मा, जेखर रहय निवास।
पानी पीयय लाल ये, जब-जब मरय पियास।।
जब-जब मरय पियास, चाल तब तुरतुर चलथे।
परजीवी बन जीव, हमेशा ये हर पलथे।।
सत्यबोध जी नाँव, हवय पूछत सॅंगवारी।
देहू आप बताय, रहय जे छोटे कारी।।
उत्तर - (जुआँ)

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 12/03/2026

[06] कुण्डलियाँ छंद- *जनउला*

दिन भर जे अल्लर रहय, रतिहा मा ठड़िहाय।
पतला पर लंबा इही, छूये मा अटियाय।।
छूये मा अटियाय, रखय ये कसके बाँधे।
जेन करय उदबास, पाँव ला वोखर छाॅंदे।।
बबा जमाना खूब, मिलय जी ये हर घर-घर।
सत्यबोध चुपचाप, रहय कोना मा दिन भर।।
उत्तर - (गेरवा)

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 13/03/2026

[07] कुण्डलियाँ छंद- *जनउला*

राहय डबरी नानकुन, जेमा बुड़े जहाज।
पानी पीयय पूॅंछ ले, बूझव येखर राज।।
बूझव येखर राज, जला लौ मन के बाती।
घर करथे उजियार, जलय जब ये हा राती।।
सत्यबोध धर धीर, बहुत पीरा ला साहय।
मंदिर मा नवरात, जगमगावत ये राहय।।
उत्तर - (दीया)

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 14/03/2026

[08] कुण्डलियाँ छंद- *जनउला*

बाँधय टूरा नानकुन, कूद-कूद के पार।।
देहू उत्तर ला बता, संगी बन हुशियार।।
संगी बन हुशियार, बुता येमा तो करथें।
धारदार जी नोंक, देख मनखे मन डरथें।।
सत्यबोध बड़ काम, खाँध मा ये हर खाँधय।।
कूद-कूद के पार, नानकुन टूरा बाँधय।।
उत्तर- (सूजी)

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 15/03/2026

[09] कुण्डलिया छन्द- *जनउला*

जीयय जब तक आदमी, तक तक येला खाय।
कहिथें सब येखर बिना, स्वाद घलो नइ आय।।
स्वाद घलो नइ आय, घरो-घर पाये जाथे।
रंगत धरे सफेद, मान सब ले बड़ पाथे।।
नीबू शरबत संग, घोल येला तो पीयय।
सत्यबोध उपयोग, करै जब तक जग जीयय।।
उत्तर- नून

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 16/03/2026

[10] कुण्डलिया छंद- *जनउला*

रस राहय बड़ भीतरी, देह दिखे जी लाल।
बिंदी सजे हे माथ मा, चिक्कन-चिक्कन गाल।।
चिक्कन-चिक्कन गाल, देख के मन ललचाथे।
 बइठे बीच बजार, भाव ये अब्बड़ खाथे।।
तभो सुवारी मोर, बिसा के लाना काहय।
सत्यबोध जी अंग, भराये बड़ रस राहय।।
उत्तर- पताल

✍🏻 इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 17/03/2026

[11] कुण्डलिया छंद- *जनउला*

लाली-लाली तन रहय, आगी कस अंगार।
मूड़ी मा ठाड़े  मुकुट, छूवत  मा बड़ झार।।
छूवत  मा  बड़ झार, देख  के  बाबू  खाबे।
नइ राहय  जी दाँत, तभो  ला ये  हा चाबे।।
सत्यबोध  डर्राय,  रहे   राजा   या  माली।
तरकारी के शान, दिखे मा  लाली-लाली।।
 उत्तर- लाल मिर्चा

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 18/03/2026

[12] कुण्डलियाँ छंद- *जनउला*

बत्तिस भाई एक घर, धरके खुशी उमंग।
लाल महल के बीच मा, रहिथें मिलके संग।।
रहिथें मिलके संग, चबावत चना चबेना।
का हड्डी का मांस, चीथ दय सबके डेना।।
आगू रहय कपाट, पीछु मा गहरा खाई।
सत्यबोध मिल संग, रहय जी बत्तिस भाई।।
उत्तर- दाँत 

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 19/03/2026

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कुण्डलिया छंद - (छत्तीसगढ़ी जनउला)

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