बुधवार, 25 सितंबर 2024

हिंदी सवैया-

 सवैया चार चरणों का समपाद वर्णछंद है। वर्णिक वृत्तों में 22 से 26 अक्षर के चरण वाले जाति छन्दों को सवैया कहने की परम्परा है। इसमें एक ही गण की कई आवृत्ति होती है।  इस प्रकार सामान्य जाति-वृत्तों से बड़े और वर्णिक दण्डकों से छोटे छन्द को सवैया कहा जाता है।  प्रत्येक छंद सामान्य छंद की लंबाई का एक चौथाई होता है। 

                  *महाभुजंगप्रयात*

महाभुजंगप्रयात सवैया 24 वर्णों का छन्द कहा जाता है, यह छंद आठ यगणों (122) के द्वारा लिखा जाता है। इसे भुजंगप्रयात छंद का दुगुना छन्द कहा जाता है तभी इसका नाम महाभुजंगप्रयात छंद पड़ा है। 

           यगणाश्रित सवैया 24 वर्ण

बाती /महाभुजंगप्रयात सवैया गणावली -- 8 यगण

(अंकावली -ISS-ISS-ISS-ISS-ISS-ISS-ISS-ISS)

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*परिचय-- यगणाश्रित सवैया , 24 वर्ण

*आधार छंद- बाती/ महाभुजंगप्रयात सवैया*

*गणावली-- 8×यगण*

*अंकावली-- 122-122-122-122-122-122-122-122*

*सृजन शीर्षक- पुराने जमाने मुझे याद आये। (3 युग्म)*

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पुराने जमाने मुझे याद आये गली गाँव साथी मुझे हैं बुलाये।

किनारा नदी का पुकारे सदा ही चले लौट आओ खुशी को सजाये।।

अनोखा जहाँ प्रेम पाया सभी से कभी भूल पाता नहीं हूँ भुलाये।

गले से लगा लूँ सुनो मीत मेरे सुहाना गजानंद गाना सुनाये।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 18/09/2024

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*परिचय-- यगणाश्रित सवैया , 24 वर्ण

*आधार छंद- बाती/ महाभुजंगप्रयात सवैया*

*गणावली-- 8×यगण*

*अंकावली-- 122-122-122-122-122-122-122-122*

*सृजन शीर्षक- किसे मैं कहानी सुनाऊँ। (3 युग्म)*

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लुटा प्यार मेरा हुआ बेसहारा बताओ किसे मैं कहानी सुनाऊँ।

सँजोये रखा था वफ़ा की वफायें दिया दर्द ऐसा किसे मैं बताऊँ।।

मिली है सजा चाहतों की बखूबी सदायें उसी की भुला भी न पाऊँ।

गजानंद यादें जगाती सताती बताओ उसे आज कैसे भुलाऊँ।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 18/09/2024

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*परिचय-- यगणाश्रित सवैया , 24 वर्ण

*आधार छंद- बाती/ महाभुजंगप्रयात सवैया*

*गणावली-- 8×यगण*

*अंकावली-- 122-122-122-122-122-122-122-122*

*सृजन शीर्षक- सुहानी घड़ी है (3 युग्म)*

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सुहानी घड़ी है खुशी की झड़ी है चले लौट आओ गले भी लगाओ।

मुझे छोड़ जाना नहीं है तुम्हें प्रेम पाना निभाना हमें भी सिखाओ।।

पुजारी बने प्रेम में हूँ पड़े पास आओ जरा यूँ न दूरी बढ़ाओ।

रखा प्रीत तेरे लिए ही गजानंद साथी सदा साथ वादा निभाओ।।

-----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 20/09/2024

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*परिचय-- यगणाश्रित सवैया , 24 वर्ण*

*आधार छंद- बाती/ महाभुजंगप्रयात सवैया*

*गणावली-- 8×यगण*

*अंकावली-- 122-122-122-122-122-122-122-122*

*सृजन शीर्षक-वही प्रीत आओ निभाये।(3 युग्म)*

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किये प्रीत राधा कन्हैया सुदामा सुनो तो वही प्रीत आओ निभायें।

करे याद सारा जमाना हमें भी चलो साथ मेरे वफायें निभायें।।

लगा लो गले से मुझे आप साथी करो प्रीत ऐसा भुला भी न पायें।

सताना हमें छोड़ देना गजानंद हो दूरियाँ तो उसे भी मिटायें।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 20/09/2024

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*परिचय-- भगणाश्रित सवैया , 22 वर्ण*

*आधार छंद- मदिरा सवैया*

*गणावली-- 7 भगण+ गुरु*

*अंकावली-- 211-211-211-211-211-211-211-2*

*सृजन शीर्षक- अभिवादन है (3 युग्म)*

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स्वागत है उनका अभिवादन जो जग कर्म महान करे।

दूर रहे भ्रम झूठ सदा सच को खुद का परिधान करे।।

मातु पिता गुरु श्री पग वंदन शीश झुका गुणगान करे।

जीवन नाम उतार चढ़ाव गजानन जी सुख ध्यान करे।।


जाप करो सुख मंत्र सदा अनुशासन जीवन पालन हो।

साथ रहे प्रभु नाथ कृपा तन साँस सुखी परिचालन हो।।

प्रेम विधान करो प्रतिपादित ज्ञान जहाँ अभिवादन हो।

भाव गजानन हो करुणा सबके हित का प्रतिपादन हो।।

-----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 23/09/2024

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*दिन -- सोमवार*

*परिचय-- भगणाश्रित सवैया , 22 वर्ण*

*आधार छंद- मदिरा सवैया*

*गणावली-- 7 भगण+ गुरु*

*अंकावली-- 211-211-211-211-211-211-211-2*

*सृजन शीर्षक- ज्ञान प्रभाकर ध्यान करो (3 युग्म)*

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दीन दुखी बन द्वार खड़ा प्रभु ज्ञान प्रभाकर ध्यान करो।

दूर करो तम लोभ अहं मन में सबके सुख प्रेम भरो।।

आप दया करुणाकर सागर जीवन का हर कष्ट हरो।

नेक गजानन कर्म करो पर पाप निरादर आप डरो।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 23/09/2024

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*परिचय-- भगणाश्रित सवैया , 22 वर्ण*

*आधार छंद- मदिरा सवैया*

*गणावली-- 7 भगण+ गुरु*

*अंकावली-- 211-211-211-211-211-211-211-2*

*सृजन शीर्षक- मातु पिता नित याद करो (3 युग्म)*

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जन्म दिये जिसने हमको उस मातु-पिता नित याद करो।

प्रीत मिले अपनेपन का सुख जीवन में रस प्रेम भरो।।

नैन बहे दुख नीर कभी मत लाँछन से खुद आप डरो।

पूत सपूत गजानन जी बनके हर दर्द विलाप हरो।।


वंदित है जिनके पग पावन मातु-पिता भगवान कहो।

सार समाहित है इनमें सब वेद पुराण कुरान कहो।।

मातु-पिता सुख छाँव सदा इनसे खुद का पहचान कहो।

मान गजानन शान यही इनको जग का वरदान कहो।।

-----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 24/09/2024

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*परिचय-- भगणाश्रित सवैया , 22 वर्ण*

*आधार छंद- मदिरा सवैया*

*गणावली-- 7 भगण+ गुरु*

*अंकावली-- 211-211-211-211-211-211-211-2*

*सृजन शीर्षक- मनभावन हो (3 युग्म)*

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गीत लिखें मन प्रीत सुहावन जो सबके मनभावन हो।

भाव रखें करुणा सुख सागर जो सबके हित पावन हो।।

तृप्त धरा करने बरसे जल माह सदा सुख सावन हो।

मान मिले जग याद रखे जब कर्म महान गजानन हो।।

-----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 24/09/2024

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*परिचय-- भगणाश्रित सवैया , 22 वर्ण*

*आधार छंद- मदिरा सवैया*

*गणावली-- 7 भगण+ गुरु*

*अंकावली-- 211-211-211-211-211-211-211-2*

*सृजन शीर्षक- दुर्जन लोग छले (1युग्म)*

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ऊपर मीठ जुबान रखे निज स्वारथ दुर्जन लोग छले।

जाल बिछा ठगते सबको उनके मन भीतर लोभ पले।।

साथ कुसंगत लोग करे वह त्याग खुशी सुख हाथ मले।

कर्म गजानन नेक करो तब जीवन में सुख दीप जले।।

-----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 27/09/2024

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*परिचय-- भगणाश्रित सवैया , 23 वर्ण*

*आधार छंद- मत्तगयंद सवैया*

*गणावली-- 7 भगण+ गुरु गुरु*

*अंकावली-- 211-211-211-211-211-211-211-22*

*सृजन शीर्षक- मैं जब सैनिक होता (1युग्म)*

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देश समाज विकास सदा करता नित मैं जब सैनिक होता।

दीन दुखी जन के हित खातिर मैं लड़ता दिन रात न सोता।।

जोश युवा मन में भरता रग में उनके नव अंकुर बोता।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 01/10/2024

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*परिचय-- भगणाश्रित सवैया , 22 वर्ण*

*आधार छंद- मत्तगयंद सवैया*

*गणावली-- 7 भगण+ गुरु*

*अंकावली-- 211-211-211-211-211-211-211-2*

*सृजन शीर्षक- संत विचारक गाते (1युग्म)*

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सत्य उपासक साधक ज्ञान गुणी गुण संत विचारक गाते।

काज करे जग के हित खातिर प्रेम दया करुणा कर जाते।।

मानवता शुभ राह दिखाकर प्रेम चराचर बोध कराते।

संत गुणी गुरु संगत से सुख जीवन ज्ञान गजानन पाते।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 04/10/2024

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*परिचय-- भगणाश्रित सवैया , 22 वर्ण*

*आधार छंद- मत्तगयंद सवैया*

*गणावली-- 7 भगण+ गुरु*

*अंकावली-- 211-211-211-211-211-211-211-2*

*सृजन शीर्षक- मानवता हम पाठ पढ़ायें (1युग्म)*

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भारत देश महान सदा हम आप सभी मिल मान बढायें। त्याग अहं भ्रम द्वेष चलें नित मानवता हम पाठ पढ़ायें।। एक बनें सब नेक बनें सुमता समता हित पाँव मढ़ायें। हो महिमा गुणगान गजानन भक्ति सुहावन फूल चढ़ायें।। ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 22/11/2024

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*परिचय-- भगणाश्रित सवैया , 22 वर्ण*

*आधार छंद- मदिरा सवैया*

*गणावली-- 7 भगण+ गुरु*

*अंकावली-- 211-211-211-211-211-211-211-2*

*सृजन शीर्षक- शब्द पिता जग सार समाहित (1युग्म)*

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शब्द पिता जग सार समाहित जो वट वृक्ष समान खड़े।

जाड़ सहे दुख धूप तपे फिर भी रहते वह मौन पड़े।।

जोड़ रखे परिवार सदा बनके मुखिया सुख धाम बड़े।

पूज्य पिता पग को कर वंदन रत्न गजानन प्रेम जड़े।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 05/10/2024

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*परिचय-- भगणाश्रित सवैया , 22 वर्ण*

*आधार छंद- मदिरा सवैया*

*गणावली-- 7 भगण+ गुरु*

*अंकावली-- 211-211-211-211-211-211-211-2*

*सृजन शीर्षक- माता-पिता जग जन्म दिए (1युग्म)*

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मान करो यशगान करो गुरु ज्ञान सुधा वरदान कहो।

मातु- पिता जग जन्म दिये उनको खुद का भगवान कहो।।

पावन वंदन हैं जिनके पग गर्व करो अभिमान कहो।

मंदिर मस्जिद चर्च गजानन ग्रंथ पुराण कुरान कहो।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 07/10/2024

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*परिचय-- भगणाश्रित सवैया , 22 वर्ण*

*आधार छंद- मदिरा सवैया*

*गणावली-- 7 भगण+ गुरु*

*अंकावली-- 211-211-211-211-211-211-211-2*

*सृजन शीर्षक- अपने सपने सजते (1युग्म)*

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मन में शुभ स्वच्छ विचार रखें इससे अपने सपने सजते।

बन कर्म परायण मानव भी जग में श्रम का मनका भजते।।

खुद को सुखदा सुचिता रखने भ्रम द्वेष विकार चलो तजते।

रख लें सबसे नित प्रीत गजानन शंख खुशी मुख से बजते।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 08/10/2024

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*परिचय-- भगणाश्रित सवैया , 22 वर्ण*

*आधार छंद- मदिरा सवैया*

*गणावली-- 7 भगण+ गुरु*

*अंकावली-- 211-211-211-211-211-211-211-2*

*सृजन शीर्षक- कर लो गुरु का गुणगान (1युग्म)*

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कर लो गुरु का गुणगान सदा मन से जग का भय दूर करो।

जप लो मनका सतनाम बसा गुरु आप कृपा भरपूर करो।।

मत रार बढ़े नित प्यार बढ़े मत दीन दुखी मजबूर करो।

बन कर्मपरायण आप गजानन नाम यहाँ मशहूर करो।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 08/10/2024

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-------------------*आधार छंद- दुर्मिल सवैया*--------------

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*परिचय-- सगणाश्रित सवैया , 24वर्ण*

*आधार छंद- दुर्मिल सवैया*

*गणावली-- 8 सगण

*अंकावली-- 112-112-112-112-112-112-112-112*

*सृजन शीर्षक- दुनिया मनमोहक है। (2 युग्म)*

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दुनिया मनमोहक है तुमसे प्रभु दामन में खुशियाँ भर दो।

सबके सुख कारज सिद्ध करो तकलीफ सभी जग से हर दो।।

सब लोग निरोग रहे तन से मन से सबको सुफला कर दो।

सब मानव मानव एक गजानन मान यहाँ नित आदर दो।।


मतभेद मिटे नित प्रीत बढ़े सब नेक बनें शुभ काम करें।

तज द्वेष विकार सभी मन से खुद का जग में कुछ नाम करें।।

पग वंदन मातु पिता करके इस जीवन को सुख धाम करें।

रख लें शुभ सोच विचार गजानन आत्म स्वयं अभिराम करें।।

-----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 08/10/2024

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*परिचय-- सगणाश्रित सवैया , 24वर्ण*

*आधार छंद- दुर्मिल सवैया*

*गणावली-- 8 सगण*

*अंकावली-- 112-112-112-112-112-112-112-112*

*सृजन शीर्षक-- प्रेम पुराण लिखो कविता । (3 युग्म)*

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मन में भर लो सुचिता मुदिता प्रिय पावन प्रेम पुराण लिखो।

सब याद करे फरियाद करे अवलोकन सत्य प्रमाण लिखो।।

सच साथ रहे बन साँस सदा सुख जीवन राह प्रयाण लिखो।

भ्रम झूठ मिटे भय ढोंग गजानन लेखन शब्द कृपाण लिखो।।


मत थाम तथाकथिता पथ को इसमें दुख शूल बिछे मिलते।

जब तर्क वितर्क खरा उतरे तब तथ्य हिया मन में खिलते।।

जब झूठ नकाब खुलासित हो तब राज सिंहासन हैं हिलते।

कुछ धर्म गुलाम गजानन जी खुद जीवन को दुख से सिलते।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 09/10/2024

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*परिचय-- सगणाश्रित सवैया , 24वर्ण*

*आधार छंद- दुर्मिल सवैया*

*गणावली-- 8 सगण*

*अंकावली-- 112-112-112-112-112-112-112-112*

*सृजन शीर्षक-- गुमनाम रहो मत जीवन में (1 युग्म)*

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बढ़ना पथ में सच थाम यहाँ जग का यह मेल लगे सपना।

गुमनाम रहो मत जीवन में कुछ तो पहचान बना अपना।।

प्रतिकार करो नित ढोंग विकार सदा सच का मनका जपना।

कर संगत संत गुणी जन का बन स्वर्ण गजानन जी तपना।।

-----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 10/10/2024

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*परिचय-- सगणाश्रित सवैया , 24वर्ण*

*आधार छंद- दुर्मिल सवैया*

*गणावली-- 8 सगण*

*अंकावली-- 112-112-112-112-112-112-112-112*

*सृजन शीर्षक-- मिला चलते- चलते। (2 युग्म)*

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मुझको सच के पथ में यश मान मुकाम मिला चलते- चलते।

कर दीन दुखी उपकार मुझे सुख धाम मिला चलते- चलते।।

सबसे मनभावन पावन प्रेम ललाम मिला चलते-चलते।

करते जन को सत बोध गजानन नाम मिला चलते- चलते।।


मनमीत बनें जग प्रीत बढ़े सब में शुभ सोच विचार भरो।

भरना मन में सुचिता शुभिता सुख जीवन में मनुहार करो।।

सब लोग रहें मिल आपस में मन से कटु द्वेष विकार हरो।

कर कर्म महान गजानन जी दुनिया भवसागर पार तरो।।

-----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/10/2024

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*परिचय-- सगणाश्रित सवैया , 24वर्ण*

*आधार छंद- दुर्मिल सवैया*

*गणावली-- 8 सगण*

*अंकावली-- 112-112-112-112-112-112-112-112*

*सृजन शीर्षक-- झूठ सदा प्रतिवाद रहे (1 युग्म)


तुमको दिल से अपना समझा मनप्रीत मुसाफ़िर याद रहे।

खुशहाल रहे पल दो पल ही मत जीवन में अवसाद रहे।।

मन झूम उठे खुशियाँ भरके दुख तर्पित हर्षित नाद रहे।

करना नित ही सच बात गजानन झूठ सदा प्रतिवाद रहे।।

-----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/10/2024


-----------------*आधार छंद- सुखी सवैया*-----------------

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*परिचय-- सगणाश्रित सवैया, 26वर्ण*

*आधार छंद- सुखी सवैया*

*गणावली-- 8 सगण+ लघु लघु*

*अंकावली-- 112-112-112-112-112-112-112-112-11*

*सृजन शीर्षक-- जीवन हो मनभावन (3 युग्म)*

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हम आप प्रयास करें मिलके नित ही यह जीवन हो मनभावन।

तकरार मिटे प्रिय प्रीत बढ़े रखना मन निर्मल सोच सुहावन।।

मत शूल बनो मधु फूल बनो बरसो जग में बनके सुख सावन।

रखना नम नेक व्यवहार गजानन आदर भी मिलता तब पावन।।


प्रतिमान बने खुद का जग में यह आस प्रयास किये चलना।

बन सूरज भोर उजास करो सुख शीतल शाम बने ढलना।।

करने जग से तम दूर सुनो तुम दीप समान सदा जलना।

कर वक्त यहाँ तुम व्यर्थ गजानन हाथ नहीं रहते मलना।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 15/10/2024

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*परिचय-- सगणाश्रित सवैया , 26वर्ण*

*आधार छंद- सुखी सवैया*

*गणावली-- 8 सगण+ लघु लघु*

*अंकावली-- 112-112-112-112-112-112-112-112-11*

*सृजन शीर्षक-- हर्षित है घर आँगन (3 युग्म)*

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शुभ हर्षित है घर आँगन भी प्रभु के पग का रज पावन पाकर।

इस जीवन को कर लूँ सुफला गुणगान सदा गरिमामय गाकर।।

प्रभु साथ रहो सिर हाथ रखो खुशियाँ भर दो हर कष्ट मिटाकर।

नित अर्ज गजानन है करता सुन लो विनती प्रभु दिव्य दिवाकर।।


रखना मुझको छल द्वेष बचा प्रभु जी सच को यह जीवन अर्पण।

उपकार करूँ अनुहार करूँ तब पूर्वज के प्रति हो शुभ तर्पण।।

कर संगत दुष्ट बुरे जन का मत ज्ञान कभी करना अवसर्पण।

करने भ्रम ढोंग सचेत गजानन जी रखना मन निर्मल दर्पण।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 16/10/2024

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*परिचय-- सगणाश्रित सवैया, 26वर्ण*

*आधार छंद- सुखी सवैया*

*गणावली-- 8 सगण+ लघु लघु*

*अंकावली-- 112-112-112-112-112-112-112-112-11*

*सृजन शीर्षक-- बनना अब नायक (3 युग्म)*

✡️🕉️🔯☸️✡️🔯🔯☸️🕉️

यह देश महान हमें करने सुन लो जग में बनना अब नायक।

गरिमा महिमा गुणगान करें सबको श्रम वाँछित हो सुखदायक।।

मत द्वंद रहे अनुराग रहे प्रिय प्रीत करें बनके सब लायक।

सबको सुख राह प्रशश्त करो बन आप गजानन जी परिणायक।।

---🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 16/10/2024

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*दिन -- गुरुवार*

*परिचय-- सगणाश्रित सवैया , 26वर्ण*

*आधार छंद- सुखी सवैया*

*गणावली-- 8 सगण+ लघु लघु*

*अंकावली-- 112-112-112-112-112-112-112-112-11*

*सृजन शीर्षक-- प्रेम विशारद (1 युग्म)*

✡️🔯☸️🕉️✡️☸️🔯✡️🕉️

बन प्रेम विशारद आज मुझे पहचान नया जग में गढ़ना प्रभु।

सबके हित खातिर है लड़ना सच थाम सदा पथ में बढ़ना प्रभु।।

यश नाम मुकाम मिले श्रम से मुझको सुख मंजिल है चढ़ना प्रभु।

प्रभु दो वरदान गजानन को नित सीख सके दुख को पढ़ना प्रभु।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 17/10/2024

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*परिचय-- सगणाश्रित सवैया , 26वर्ण*

*आधार छंद- सुखी सवैया*

*गणावली-- 8 सगण+ लघु लघु*

*अंकावली-- 112-112-112-112-112-112-112-112-11*

*सृजन शीर्षक-- हैं अब संकट के पल।  (2 युग्म)*

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विनती कर जोर करूँ प्रभु आप सहायक हैं अब संकट के पल।

अभिमान मिटे पद मान बढ़े इस जीवन में नित ही सँवरे कल।।

मत कष्ट मुसीबत घेर रखे विपदा दुख में निकले सुचिता हल।

बढ़ना मन में रख धीर गजानन जी मिलता श्रम का सुफला फल।।


प्रभु दीन दुखी हित काम करूँ सबके दुख का सुख ध्यान रहे अब।

भरना गुण ज्ञान विवेक दया मन में मत लोभ गुमान रहे अब।।

प्रतिकार रहे भय झूठ सदा मुख में सच का गुणगान रहे अब।

रहना बच ढोंग प्रपंच गजानन कर्म विधान निदान रहे अब।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 18/10/2024

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*परिचय-- सगणाश्रित सवैया , 26वर्ण*

*आधार छंद- सुखी सवैया*

*गणावली-- 8 सगण+ लघु लघु*

*अंकावली-- 112-112-112-112-112-112-112-112-11*

*सृजन शीर्षक--मत देर करो (1 युग्म)*

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मत देर करो प्रभु भक्ति करो इस जीवन में सुचिता रखना भर।

सत राह चलो मत स्वार्थ पलो भटके जन के दुख को तुम लो हर।।

यह साँस उधार मिली प्रभु से इसको अब तो तुम व्यर्थ नहीं कर।

सब देख रहा प्रभु कर्म गजानन राह बुरा तज दो उनसे डर।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 18/10/2024

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*परिचय-- सगणाश्रित सवैया , 26 वर्ण*

*आधार छंद- सुखी सवैया*

*गणावली-- 8 सगण+ लघु लघु*

*अंकावली-- 112-112-112-112-112-112-112-112-11*

*सृजन शीर्षक-- बन छंद उपासक।  (1 युग्म)*

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बन छंद उपासक छंद लिखूँ मन में उभरे हर भाव सँजोकर।

सबके दिल को प्रिय जीत सकूँ सच बात कहूँ शुभ शब्द पिरोकर।।

सबको सुख जीवन दर्शन हो खुशियाँ भर लें दुख के पल खोकर।

कहते सबसे यह बात गजानन प्रीत रखो जग मानव होकर।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 19/10/2024


********आधार छंद- वाम /अनुराग सवैया*********

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*परिचय-- जगणाश्रित सवैया , 24वर्ण*

*आधार छंद- वाम /अनुराग सवैया*

*गणावली-- 7 जगण+ यगण*

*अंकावली-- 121-121-121-121-121-121-121-122*

*सृजन शीर्षक-- मुझे अपनाओ 

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विचार महान रखो जग में उपकार करो अनुराग बढ़ाओ।

रहो न उदास कभी इस जीवन में खुशियाँ भर फूल खिलाओ।।

उदार रहो दिलदार रहो सबसे मन की हर बात बताओ।

गजानन प्रेम मिलाप बढ़े नित गीत सुहावन आप सुनाओ।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/10/2024

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*परिचय-- जगणाश्रित सवैया, 24वर्ण*

*आधार छंद- वाम/अनुराग सवैया*

*गणावली-- 7 जगण+ यगण*

*अंकावली-- * 121-121-121-121-121-121-121-122

*सृजन शीर्षक-- घर द्वार सजाओ।

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सुभाषित हो मनुहार करो सब द्वंद मिटे अनुराग बढ़ाओ।

प्रयास करो मन आस भरे तम दूर भगे सत जोत जलाओ।।

सहाय बनो प्रभु दृष्टि दया कर आप सभी दुख कष्ट मिटाओ।

गजानन प्रेम हिया भरके शुभ पुनीत हो घर द्वार सजाओ।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/10/2024


***********आधार छंद- गौरा सवैया***********

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*परिचय-- रगणाश्रित सवैया, 23वर्ण*

*आधार छंद- गौरा सवैया*

*गणावली-- 6 रगण+ मगण+ लघु लघु*

*अंकावली-- 212-212-212-212-212-212-222-11*

*सृजन शीर्षक- तू नहीं नादानी कर 

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मोह माया कभी काम आया नहीं सोच ले तू नहीं नादानी कर।

कर्म पूजा बना पाँव आगे बढ़ा जिंदगी राह को आसानी कर।।

बाँध लो प्रीत धागा सभी से अभी छोड़ दो द्वेष मीठा बानी कर।

बात बोले गजानंद लोगों सुनो खून को तो नहीं तू पानी कर।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 28/10/2024


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*परिचय-- रगणाश्रित सवैया, 23वर्ण*

*आधार छंद- गौरा सवैया*

*गणावली-- 6 रगण+ मगण+ लघु लघु*

*अंकावली-- 212-212-212-212-212-212-222-11*

*सृजन शीर्षक- द्वार रंगोली मोहक 

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पर्व दीपावली में दिखे हैं सजे अंगना द्वार रंगोली मोहक।

ईश को हैं मनाते सभी तो चढ़ाते मिठाई बना मेवा मोदक।।

आज फोड़े पटाखा जला दीप को लोग मानें खुशी की है बोधक।

प्रेम बाँटे गजानंद हैं आपसी में बनें प्रीत साथी उद्घोषक।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 30/10/2024


वार्णिक छंद-

 *वार्णिक छंद*

*गण की परिभाषा*-- तीन वर्णों के समूह को गण कहतै हैं।

गणों की संख्या 8 है -- *यमाताराजभानसलगा*

यगण (।ऽऽ) --- सुहाना

मगण (ऽऽऽ)  - बंजारा

तगण (ऽऽ।)-  आनंद

रगण (ऽ। ऽ)-- साधना

जगण (। ऽ।)-- विशेष

भगण (ऽ।।)-  सावन

नगण (।।।)---- वतन

*वृहती (नवाक्षरावृत्ति-- 512)*

                     *अग्रिय*

*गणावली-- रभस, अंकावली-- SIS-SII-IIS*

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*परिचय-- वृहती (नवाक्षरावृत्ति-- 512)*

*आधार छंद- अग्रिय (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- रभस*

*अंकावली-- SIS-SII-IIS*

*सृजन शीर्षक- तू हमेशा खुश रहना (3 युग्म)*

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तू हमेशा खुश रहना। सत्य साजें खुद गहना।

ज्यादती को मत सहना। मीठ वाणी नित कहना।।

साधना शाधित करना। दे दुआयें दुख हरना।

मुश्किलों से मत डरना। हौसलों से मन भरना।।


सीख लो आदर करना। नैन नीचे मत धरना।

झील जैसे तुम झरना। प्रेम का गागर भरना।।

सादगी का पथ चलना। नित्य साँचा सच ढलना।

द्वेष ईर्ष्या मत पलना। दीप नेकी बन जलना।।


छोड़ देना भ्रम भय को। थाम लेना अनुनय को।

हार स्वीकार विजय को। रोकना दौर प्रलय को।।

ध्येय साँसे अविचल हो। कोशिशें भी अविरल हो।

झूठ गंभीर विकल हो। सत्य सानिध्य पहल हो।।

----✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 02/09/2024

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*परिचय-- वृहती (नवाक्षरावृत्ति-- 512)*

*आधार छंद- अग्रिय (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- रभस*

*अंकावली-- SIS-SII-IIS*

*सृजन शीर्षक- देख तेरे शरण पड़े (3 युग्म)*

🔯🕉️✡️✡️🔯☸️✡️🕉️🔯☸️

देख तेरे शरण पड़े, भावना प्रेम पथ खड़े।

रत्न सिंहासन सर जड़े, आदमी सत्य पर अड़े।।

हार से हिम्मत बढ़ता। कामयाबी नव गढ़ता।

जिंदगी को सफल करो। आपदा को विफल करो।।

---🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 02/09/2024

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*परिचय-- वृहती (नवाक्षरावृत्ति-- 512)*

*आधार छंद- अग्रिय (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- रभस*

*अंकावली-- SIS-SII-IIS*

*सृजन शीर्षक- प्रेम का मैं सरगम हूँ।(3 युग्म)*

⚛️🕉️✡️☸️⚛️🕉️✡️☸️⚛️🕉️

प्रेम का मैं सरगम हूँ। गीत संगीत शुभम हूँ।

सत्य का मैं परचम हूँ। शांति साया शबनम हूँ।।

साथ ही धीर सरल हूँ। क्रोध में तीव्र गरल हूँ।

साधना छंद गजल हूँ। भावना काव्य सजल हूँ।।


सुप्त इंसानियत वहाँ। छोड़ते सत्य पथ जहाँ।

लोग हैं स्वार्थमय यहाँ। जिंदगी है सुखद कहाँ।।

मोह माया मन बसते। लूट छाया सुख सजते।

लोग लोभी बन रमते। क्यों नहीं कर्म समझते।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 04/09/2024

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*परिचय-- वृहती (नवाक्षरावृत्ति-- 512)*

*आधार छंद- अग्रिय (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- रभस*

*अंकावली-- SIS-SII-IIS*

*सृजन शीर्षक- ज्ञान का दीपक जलता(3 युग्म)*

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थाम बाँहें गुरु चलता। शिष्य सोना बन ढलता। 

ज्ञान का दीपक जलता। विघ्न बाधा दुख टलता।।

कामयाबी पथ बढ़ना। जिंदगी में सुख गढ़ना।

पाठ नेकी सच पढ़ना। उच्चता को नित चढ़ना।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 05/09/2024

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*परिचय-- वृहती (नवाक्षरावृत्ति-- 512)*

*आधार छंद- अग्रिय (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- रभस*

*अंकावली-- SIS-SII-IIS*

*सृजन शीर्षक- मायका में व्रत करते।(3 युग्म)*

🔯✡️🕉️🕉️✡️🔯🕉️☸️✡️

मायका में व्रत करते। भावना से मन भरते।

कामना से दुख हरते। पर्व तीजा सुख झरते।।

साथ होते सब बहनें। हैं सजे तन गहनें।

है खुशी का पल सुखदा। काज होते सब शुभदा।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 05/09/2024

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*परिचय-- पंक्ति (दशाक्षरावृत्ति-- 1024)*

*आधार छंद- महाशिखा (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- भभजग*

*अंकावली-- SII-SII-ISI-S*

*सृजन शीर्षक-  नित्य गजानन कृपा करें। (3 युग्म)*

⚛️🕉️✡️☸️⚛️🕉️✡️☸️⚛️🕉️

नित्य गजानन कृपा करें। देव शुभानन कृपा करें।

सृष्टि विधायक कृपा करें। सिद्धि विनायक कृपा करें।।

बुद्धि विचारक कृपा करें। ज्ञान प्रदायक कृपा करें।

हे सुख नंदन कृपा करें। हे दुख भंजन कृपा करें।।


पाप विनाशक कृपा करें। प्रेम उपासक कृपा करें।

हे जगतारक कृपा करें। विघ्न निवारक कृपा करें।।

शांति प्रवाहक कृपा करें। हे दुख दाहक कृपा करें।

हे भवसागर कृपा करें। हे गुण गागर कृपा करें।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 09/09/2024

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*परिचय-- पंक्ति (दशाक्षरावृत्ति-- 1024)*

*आधार छंद- महाशिखा (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- भभजग*

*अंकावली-- SII-SII-ISI-S*

*सृजन शीर्षक-  एक व्रती सरल साधना । (3 युग्म)*

✡️🕉️✡️🕉️✡️🕉️✡️🕉️✡️🕉️✡️

एक व्रती सरल साधना। पूर्ण करें सुखद कामना।

दीप जले वरद भावना। हो न कभी दुखद सामना।।

लक्ष्य सदा सफलता रहे। भाव भरे चपलता रहे।

लोक परायण काम बने। अंतस में सुख धाम बने।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 09/09/2024

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*परिचय-- पंक्ति (दशाक्षरावृत्ति-- 1024)*

*आधार छंद- महाशिखा (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- भभजग*

*अंकावली-- SII-SII-ISI-S*

*सृजन शीर्षक-  बंद करो अब प्रताड़ना। (3 युग्म)*

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बंद करो अब प्रताड़ना। रौब किसी पर न झाड़ना।

प्रेम प्रदायक रहो सदा। सत्य सहायक रहो सदा।।

थाम खुशी सुख भावना। चाह भरो शुभकामना।

नैतिकता रख बढ़े चलो। जीवन मंजिल गढ़े चलो।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/09/2024

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*परिचय-- पंक्ति (दशाक्षरावृत्ति-- 1024)*

*आधार छंद- महाशिखा (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- भभजग*

*अंकावली-- SII-SII-ISI-S*

*सृजन शीर्षक-   चिंतन को नव विधान दें।(3 युग्म)*

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चिंतन को नव विधान दें। चाहत को नित उड़ान दें।

हाथ बढ़ा दुख निदान दें। सोच सदा शुभ महान दें।।

कोशिश में मत कमी रहे। नैन भरे सुख नमी रहे।

कायम साहस रखे बढ़ो। शोधित मंजिल सदा गढ़ो।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/09/2024

दण्डक

*विधा-- गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- उमंग । (3अंतरे)*

*पदांत-- जगण (121)*

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अधरों पर मुस्कान हो, सच्चाई प्रतिमान हो, जागे मन में उमंग।

द्वेष करें प्रतिकार हम, बाँटे जग में प्यार हम, उठे खुशी की तरंग।।

तथाकथित पर शोध हो, नहीं कभी अवरोध हो, पढ़ लें सच का प्रसंग।

अपनायें धर्मांधता, नहीं कभी भी बाध्यता, जीवन जीना मतंग।।


चाटुकारिता छोड़कर, सच से नाता जोड़कर, करना सीखो सवाल।

पछताना मत बाद में, पड़ करके अवसाद में, बोल मुझे है मलाल।

सोच सदा परिणाम को, करना हरेक काम को, रखकर मन को विशाल।

शोषण अत्याचार प्रति, देना हिम्मत कर्म गति, रहे खून में उबाल।।


अपनों के प्रति हो दया, मिट जाये मन से हया, स्वच्छ रखे चल निगाह।

अच्छाई सद्भावना, लोक भलाई कामना, भाव बढ़ाओ अथाह।।

हाथ उठे नित दान को, पाँव बढ़े सम्मान को, दीन-दुखी को पनाह।

गजानंद पथ फूल हो, पाँव कभी मत शूल हो, भरना मन में उछाह।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 26/08/2024

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*विधा- गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- विकार । (3अंतरे)*

*पदांत-- जगण (ISI)*

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मीठी वाणी बोलिये, मन में मधुरस घोलिये, तुम तज देना विकार।

लोग निरोग सदा रहे, कष्ट कभी भी मत सहे, नित कर लेना विचार।।

करना प्रभु से कामना, जग जन में समभावना, रखो हृदय को उदार।

त्यागो ईर्ष्या द्वेष को, शांति रखो परिवेश को, सत्कर्मों को निहार।।


पाने नित्य मुकाम को, छोड़ चलो आराम को, कभी न होना उदास।

हार बाद ही जीत है, दुनिया की यह रीत है, करते रहना प्रयास।।

भाग्य भरोसे मत रहो, कर्मवीर बनके कहो, छोड़ो होना हताश।

गजानंद परहित लिये, मदद सदा सबका किये, करके भ्रम का विनाश।।

----✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 27/08/2024

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*विधा-गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- कमाल । (3अंतरे)*

*पदांत-- जगण (ISI)*

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स्वाभिमान रख जिंदगी, करना प्रभु की बंदगी, रखो खून में उबाल।

जीवन जीना शान से, नहीं कभी अभिमान से, करो सदा ही कमाल।।

सच्चाई का साथ दो, दीन- दुखी प्रति हाथ दो, रहे कभी मत मलाल।

साँसों का कुछ लक्ष्य हो, कर्मों का उद्देश्य हो, छोड़ो करना सवाल।।

---🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ) 27/08/2024

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*विधा- गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- प्रशांत । (3अंतरे)*

*पदांत-- जगण (ISI)*

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इच्छाओं को छोड़कर, प्रभु से नाता जोड़कर, जीवन जीना प्रशांत।

दया धर्म उपकार का, पढ़ना पाठ उदार का, मानो इसको नितांत।।

वाणी में उद्गार हो, दीन-दुखी प्रति प्यार हो, है गीता का वृतांत।

सुखमय जीवन को करो, कठिनाई से मत डरो, हो जाएगा दुखांत।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 28/08/2024

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*विधा- गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- कमान । (3अंतरे)*

*पदांत-- जगण (ISI)*

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करो किसी का मत अहित, करो झूठ प्रतिरोध नित, थामो सच का कमान।

पाने जग सम्मान को, नेक रखो ईमान को, संयम रखना जुबान।।

दीन दुखी का हो भला, ऐसी रख लो तुम कला, कर्म यही है महान।

शब्द सदा अनमोल है, जस मिश्री का घोल है, कहते गीता कुरान।।

-----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ) 28/08/2024

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 *विधा- गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- मदांत । (3अंतरे)*

*पदांत-- जगण (ISI)*

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जीना मत अभिमान में, पड़ करके अज्ञान में, कभी न करना सुखांत।

द्वेष अहं को मारना, सत्य सदा स्वीकारना, हो जायेगा मदांत।।

कल की बातें आज कर, आगे बढ़ आगाज कर, जीवन कर लो प्रशांत।

होता कर्म हिसाब है, देता वक्त जवाब है, ध्यान रखो यह नितांत।।

---🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 29/08/2024

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*विधा- गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- निदान । (3अंतरे)*

*पदांत-- जगण (ISI)*

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शीश झुकाया हूँ चरण, सुन लो प्रभु करुणा करण, करना दुख का निदान।

शांति सुखद संसार हो, नेक कर्म व्यवहार हो, सदा सुझाना विधान।।

नाश अधर्मों का करो, मन में नित नेकी भरो, करना सच का वितान।

गजानंद मनप्रीत हो, प्रेम आपसी मीत हो, सत्य बना लो मयान।।

---🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ) 29/08/2024

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 *विधा- गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- मिठास । (3अंतरे)*

*पदांत-- जगण (ISI)*

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हर लो मन की वेदना, कर लो जागृत चेतना, रख लो वाणी मिठास।

सदा सत्य गुणगान हो, स्वाभिमान का भान हो, हरदम करना प्रयास।।

तमस मिटे अज्ञान का, नाश करो अभिमान का, करो हृदय को उजास।

मानव- मानव मीत हो, दीन-दुखी प्रति प्रीत हो, मिट जायेगा खटास।।

---🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 30/08/2024

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*विधा- गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- प्रयाग। (3 युग्म)*

*पदांत-- जगण (ISI)*

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बात सदा करना वरण, मातु पिता का शुभ चरण, मथुरा काशी प्रयाग।

त्याग सभी अभिमान को, पाना गुरु के ज्ञान को, इस जीवन का सुभाग।।

भक्ति भाव में हो मगन, प्रभु से रखना नित लगन, कभी न होना विराग।

द्वेष द्वंद परित्यागना, रखो प्रेम की भावना, भ्रम मत भरना दिमाग।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 31/08/2024

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प्रदीप छंद

  प्रदीप छंद- अशिक्षा जोत जलालव शिक्षा के जी, मन मंदिर के द्वार मा। धरे अशिक्षा के दुख ला तुम, झन रोवव अँधियार मा।। शिक्षा शिक्षित करथे सब ल...