बुधवार, 25 सितंबर 2024

वार्णिक छंद-

 *वार्णिक छंद*

*गण की परिभाषा*-- तीन वर्णों के समूह को गण कहतै हैं।

गणों की संख्या 8 है -- *यमाताराजभानसलगा*

यगण (।ऽऽ) --- सुहाना

मगण (ऽऽऽ)  - बंजारा

तगण (ऽऽ।)-  आनंद

रगण (ऽ। ऽ)-- साधना

जगण (। ऽ।)-- विशेष

भगण (ऽ।।)-  सावन

नगण (।।।)---- वतन

*वृहती (नवाक्षरावृत्ति-- 512)*

                     *अग्रिय*

*गणावली-- रभस, अंकावली-- SIS-SII-IIS*

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*परिचय-- वृहती (नवाक्षरावृत्ति-- 512)*

*आधार छंद- अग्रिय (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- रभस*

*अंकावली-- SIS-SII-IIS*

*सृजन शीर्षक- तू हमेशा खुश रहना (3 युग्म)*

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तू हमेशा खुश रहना। सत्य साजें खुद गहना।

ज्यादती को मत सहना। मीठ वाणी नित कहना।।

साधना शाधित करना। दे दुआयें दुख हरना।

मुश्किलों से मत डरना। हौसलों से मन भरना।।


सीख लो आदर करना। नैन नीचे मत धरना।

झील जैसे तुम झरना। प्रेम का गागर भरना।।

सादगी का पथ चलना। नित्य साँचा सच ढलना।

द्वेष ईर्ष्या मत पलना। दीप नेकी बन जलना।।


छोड़ देना भ्रम भय को। थाम लेना अनुनय को।

हार स्वीकार विजय को। रोकना दौर प्रलय को।।

ध्येय साँसे अविचल हो। कोशिशें भी अविरल हो।

झूठ गंभीर विकल हो। सत्य सानिध्य पहल हो।।

----✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 02/09/2024

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*परिचय-- वृहती (नवाक्षरावृत्ति-- 512)*

*आधार छंद- अग्रिय (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- रभस*

*अंकावली-- SIS-SII-IIS*

*सृजन शीर्षक- देख तेरे शरण पड़े (3 युग्म)*

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देख तेरे शरण पड़े, भावना प्रेम पथ खड़े।

रत्न सिंहासन सर जड़े, आदमी सत्य पर अड़े।।

हार से हिम्मत बढ़ता। कामयाबी नव गढ़ता।

जिंदगी को सफल करो। आपदा को विफल करो।।

---🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 02/09/2024

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*परिचय-- वृहती (नवाक्षरावृत्ति-- 512)*

*आधार छंद- अग्रिय (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- रभस*

*अंकावली-- SIS-SII-IIS*

*सृजन शीर्षक- प्रेम का मैं सरगम हूँ।(3 युग्म)*

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प्रेम का मैं सरगम हूँ। गीत संगीत शुभम हूँ।

सत्य का मैं परचम हूँ। शांति साया शबनम हूँ।।

साथ ही धीर सरल हूँ। क्रोध में तीव्र गरल हूँ।

साधना छंद गजल हूँ। भावना काव्य सजल हूँ।।


सुप्त इंसानियत वहाँ। छोड़ते सत्य पथ जहाँ।

लोग हैं स्वार्थमय यहाँ। जिंदगी है सुखद कहाँ।।

मोह माया मन बसते। लूट छाया सुख सजते।

लोग लोभी बन रमते। क्यों नहीं कर्म समझते।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 04/09/2024

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*परिचय-- वृहती (नवाक्षरावृत्ति-- 512)*

*आधार छंद- अग्रिय (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- रभस*

*अंकावली-- SIS-SII-IIS*

*सृजन शीर्षक- ज्ञान का दीपक जलता(3 युग्म)*

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थाम बाँहें गुरु चलता। शिष्य सोना बन ढलता। 

ज्ञान का दीपक जलता। विघ्न बाधा दुख टलता।।

कामयाबी पथ बढ़ना। जिंदगी में सुख गढ़ना।

पाठ नेकी सच पढ़ना। उच्चता को नित चढ़ना।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 05/09/2024

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*परिचय-- वृहती (नवाक्षरावृत्ति-- 512)*

*आधार छंद- अग्रिय (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- रभस*

*अंकावली-- SIS-SII-IIS*

*सृजन शीर्षक- मायका में व्रत करते।(3 युग्म)*

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मायका में व्रत करते। भावना से मन भरते।

कामना से दुख हरते। पर्व तीजा सुख झरते।।

साथ होते सब बहनें। हैं सजे तन गहनें।

है खुशी का पल सुखदा। काज होते सब शुभदा।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 05/09/2024

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*परिचय-- पंक्ति (दशाक्षरावृत्ति-- 1024)*

*आधार छंद- महाशिखा (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- भभजग*

*अंकावली-- SII-SII-ISI-S*

*सृजन शीर्षक-  नित्य गजानन कृपा करें। (3 युग्म)*

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नित्य गजानन कृपा करें। देव शुभानन कृपा करें।

सृष्टि विधायक कृपा करें। सिद्धि विनायक कृपा करें।।

बुद्धि विचारक कृपा करें। ज्ञान प्रदायक कृपा करें।

हे सुख नंदन कृपा करें। हे दुख भंजन कृपा करें।।


पाप विनाशक कृपा करें। प्रेम उपासक कृपा करें।

हे जगतारक कृपा करें। विघ्न निवारक कृपा करें।।

शांति प्रवाहक कृपा करें। हे दुख दाहक कृपा करें।

हे भवसागर कृपा करें। हे गुण गागर कृपा करें।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 09/09/2024

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*परिचय-- पंक्ति (दशाक्षरावृत्ति-- 1024)*

*आधार छंद- महाशिखा (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- भभजग*

*अंकावली-- SII-SII-ISI-S*

*सृजन शीर्षक-  एक व्रती सरल साधना । (3 युग्म)*

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एक व्रती सरल साधना। पूर्ण करें सुखद कामना।

दीप जले वरद भावना। हो न कभी दुखद सामना।।

लक्ष्य सदा सफलता रहे। भाव भरे चपलता रहे।

लोक परायण काम बने। अंतस में सुख धाम बने।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 09/09/2024

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*परिचय-- पंक्ति (दशाक्षरावृत्ति-- 1024)*

*आधार छंद- महाशिखा (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- भभजग*

*अंकावली-- SII-SII-ISI-S*

*सृजन शीर्षक-  बंद करो अब प्रताड़ना। (3 युग्म)*

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बंद करो अब प्रताड़ना। रौब किसी पर न झाड़ना।

प्रेम प्रदायक रहो सदा। सत्य सहायक रहो सदा।।

थाम खुशी सुख भावना। चाह भरो शुभकामना।

नैतिकता रख बढ़े चलो। जीवन मंजिल गढ़े चलो।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/09/2024

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*परिचय-- पंक्ति (दशाक्षरावृत्ति-- 1024)*

*आधार छंद- महाशिखा (नव प्रस्तारित)*

*गणावली-- भभजग*

*अंकावली-- SII-SII-ISI-S*

*सृजन शीर्षक-   चिंतन को नव विधान दें।(3 युग्म)*

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चिंतन को नव विधान दें। चाहत को नित उड़ान दें।

हाथ बढ़ा दुख निदान दें। सोच सदा शुभ महान दें।।

कोशिश में मत कमी रहे। नैन भरे सुख नमी रहे।

कायम साहस रखे बढ़ो। शोधित मंजिल सदा गढ़ो।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/09/2024

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