बुधवार, 25 सितंबर 2024

दण्डक

*विधा-- गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- उमंग । (3अंतरे)*

*पदांत-- जगण (121)*

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अधरों पर मुस्कान हो, सच्चाई प्रतिमान हो, जागे मन में उमंग।

द्वेष करें प्रतिकार हम, बाँटे जग में प्यार हम, उठे खुशी की तरंग।।

तथाकथित पर शोध हो, नहीं कभी अवरोध हो, पढ़ लें सच का प्रसंग।

अपनायें धर्मांधता, नहीं कभी भी बाध्यता, जीवन जीना मतंग।।


चाटुकारिता छोड़कर, सच से नाता जोड़कर, करना सीखो सवाल।

पछताना मत बाद में, पड़ करके अवसाद में, बोल मुझे है मलाल।

सोच सदा परिणाम को, करना हरेक काम को, रखकर मन को विशाल।

शोषण अत्याचार प्रति, देना हिम्मत कर्म गति, रहे खून में उबाल।।


अपनों के प्रति हो दया, मिट जाये मन से हया, स्वच्छ रखे चल निगाह।

अच्छाई सद्भावना, लोक भलाई कामना, भाव बढ़ाओ अथाह।।

हाथ उठे नित दान को, पाँव बढ़े सम्मान को, दीन-दुखी को पनाह।

गजानंद पथ फूल हो, पाँव कभी मत शूल हो, भरना मन में उछाह।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 26/08/2024

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*विधा- गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- विकार । (3अंतरे)*

*पदांत-- जगण (ISI)*

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मीठी वाणी बोलिये, मन में मधुरस घोलिये, तुम तज देना विकार।

लोग निरोग सदा रहे, कष्ट कभी भी मत सहे, नित कर लेना विचार।।

करना प्रभु से कामना, जग जन में समभावना, रखो हृदय को उदार।

त्यागो ईर्ष्या द्वेष को, शांति रखो परिवेश को, सत्कर्मों को निहार।।


पाने नित्य मुकाम को, छोड़ चलो आराम को, कभी न होना उदास।

हार बाद ही जीत है, दुनिया की यह रीत है, करते रहना प्रयास।।

भाग्य भरोसे मत रहो, कर्मवीर बनके कहो, छोड़ो होना हताश।

गजानंद परहित लिये, मदद सदा सबका किये, करके भ्रम का विनाश।।

----✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 27/08/2024

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*विधा-गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- कमाल । (3अंतरे)*

*पदांत-- जगण (ISI)*

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स्वाभिमान रख जिंदगी, करना प्रभु की बंदगी, रखो खून में उबाल।

जीवन जीना शान से, नहीं कभी अभिमान से, करो सदा ही कमाल।।

सच्चाई का साथ दो, दीन- दुखी प्रति हाथ दो, रहे कभी मत मलाल।

साँसों का कुछ लक्ष्य हो, कर्मों का उद्देश्य हो, छोड़ो करना सवाल।।

---🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ) 27/08/2024

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*विधा- गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- प्रशांत । (3अंतरे)*

*पदांत-- जगण (ISI)*

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इच्छाओं को छोड़कर, प्रभु से नाता जोड़कर, जीवन जीना प्रशांत।

दया धर्म उपकार का, पढ़ना पाठ उदार का, मानो इसको नितांत।।

वाणी में उद्गार हो, दीन-दुखी प्रति प्यार हो, है गीता का वृतांत।

सुखमय जीवन को करो, कठिनाई से मत डरो, हो जाएगा दुखांत।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 28/08/2024

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*विधा- गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- कमान । (3अंतरे)*

*पदांत-- जगण (ISI)*

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करो किसी का मत अहित, करो झूठ प्रतिरोध नित, थामो सच का कमान।

पाने जग सम्मान को, नेक रखो ईमान को, संयम रखना जुबान।।

दीन दुखी का हो भला, ऐसी रख लो तुम कला, कर्म यही है महान।

शब्द सदा अनमोल है, जस मिश्री का घोल है, कहते गीता कुरान।।

-----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ) 28/08/2024

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 *विधा- गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- मदांत । (3अंतरे)*

*पदांत-- जगण (ISI)*

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जीना मत अभिमान में, पड़ करके अज्ञान में, कभी न करना सुखांत।

द्वेष अहं को मारना, सत्य सदा स्वीकारना, हो जायेगा मदांत।।

कल की बातें आज कर, आगे बढ़ आगाज कर, जीवन कर लो प्रशांत।

होता कर्म हिसाब है, देता वक्त जवाब है, ध्यान रखो यह नितांत।।

---🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 29/08/2024

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*विधा- गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- निदान । (3अंतरे)*

*पदांत-- जगण (ISI)*

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शीश झुकाया हूँ चरण, सुन लो प्रभु करुणा करण, करना दुख का निदान।

शांति सुखद संसार हो, नेक कर्म व्यवहार हो, सदा सुझाना विधान।।

नाश अधर्मों का करो, मन में नित नेकी भरो, करना सच का वितान।

गजानंद मनप्रीत हो, प्रेम आपसी मीत हो, सत्य बना लो मयान।।

---🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ) 29/08/2024

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 *विधा- गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- मिठास । (3अंतरे)*

*पदांत-- जगण (ISI)*

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हर लो मन की वेदना, कर लो जागृत चेतना, रख लो वाणी मिठास।

सदा सत्य गुणगान हो, स्वाभिमान का भान हो, हरदम करना प्रयास।।

तमस मिटे अज्ञान का, नाश करो अभिमान का, करो हृदय को उजास।

मानव- मानव मीत हो, दीन-दुखी प्रति प्रीत हो, मिट जायेगा खटास।।

---🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 30/08/2024

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*विधा- गीत*

*कुल मात्रा-- 38*

*आधार छंद-- मनन (नव प्रस्तारित)*

*यति-- (13,13,12)* 

*सृजन शीर्षक- प्रयाग। (3 युग्म)*

*पदांत-- जगण (ISI)*

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बात सदा करना वरण, मातु पिता का शुभ चरण, मथुरा काशी प्रयाग।

त्याग सभी अभिमान को, पाना गुरु के ज्ञान को, इस जीवन का सुभाग।।

भक्ति भाव में हो मगन, प्रभु से रखना नित लगन, कभी न होना विराग।

द्वेष द्वंद परित्यागना, रखो प्रेम की भावना, भ्रम मत भरना दिमाग।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 31/08/2024

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