सोमवार, 21 अगस्त 2017

रुख राई ह करे गुहार

रुख राई ह करे गुहार।
झन मोला काटव संगी,
तुमन समझ कुसियार।।
घाम पानी के संगवारी अँव।
जिनगी के मैं चिनहारी अँव।
मोरे से हे दुनिया बहार।
झन मोला काटव संगी,
तुमन समझ कुसियार।।
चिरई चिरगुन बर घरौंदा अँव।
रोग मिटाये औषधि पौधा अँव।
जीवन नाव के मैं पतवार।
झन मोला काटव संगी,
तुमन समझ कुसियार।।
आरी तुमन भाई झइन चलावव।
नैन ल आंसू मोर झइन बहावव।
रहिके तुमन ग होशियार।
झन मोला काटव संगी,
तुमन समझ कुसियार।।
मैं तो अबोध सम बालक अँव।
तभो ल तो मैं तुहर पालक अँव।
सुनव सुनव मोर पुकार।
झन मोला काटव संगी,
तुमन समझ कुसियार।।
दिन दिन बढ़त हवय प्रदूषण।
कारखाना बने दैत्य खरभूषण।
ललकारत हे धरे हथियार।
झन मोला काटव संगी,
तुमन समझ कुसियार।।
देवता हे भाई सब पेड़ देवता हे।
पेड़ लगाये बर सब ल नेवता हे।
सप्ताह के ग सबो वार।
झन मोला काटव संगी,
तुमन समझ कुसियार।।
पात्रे भाई के जय जोहार🙏🙏🍀🍀

✍ईंजी.गजानंद पात्रे"सत्यबोध"

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