बुधवार, 10 जून 2026

सायली छंद

 सायली छंद -


सायली छंद काव्य विधा है ।

 यह एक लघु और सुगठित काव्य रूप है, जिसमें केवल 5 पंक्तियाँ और कुल 9 शब्द होते हैं。सायली छंद का मुख्य विधान (संरचना)इस छंद की बुनावट 1-2-3-2-1 के गणितीय क्रम पर आधारित होती है — जो नीचे दी गई तालिका से स्पष्ट है:पंक्तिशब्दों की संख्याउदाहरण (भाव: दर्णण /आईना)

पहली पंक्ति----1शब्द  आईना

दूसरी पंक्ति---2शब्द 

मानो जीवन

तीसरी पंक्ति----3शब्द

झलके अक्स असली

चौथी पंक्ति----2 शब्द

मन जैसे

पाँचवी पंक्ति---1शब्द

सच्चा

*लेखन के प्रमुख नियम* .....

1. शब्द-सीमा: पूरी कविता में ठीक 9 शब्दों का प्रयोग अनिवार्य है।

2. शब्दों का विभाजन 1, 2, 3, 2 और 1 के क्रम में ही होना चाहिए।

3. अर्थपूर्ण भाव: संरचना छोटी होने के बावजूद, कविता पूरी तरह से अर्थपूर्ण और भावपूर्ण होनी चाहिए ( यह महत्वपूर्ण  है)

4. सायली छंद इस विशेषता के साथ लिखे जाते हैं कि उन्हें ऊपर से नीचे या नीचे से ऊपर दोनों तरफ पढ़ने पर एक ही अर्थ निकलता है।

5. पंक्तियों में क्रमबद्धता नहीं होनी चाहिए।

6.  एक ही पंक्तियों में शब्दों का पर्यायवाची शब्द नहीं लेना है।    -----------------------------------------------------------------

  ‌‌सायली छंद- *सागर*

​सागर 

अथाह गहरा 

छिपे राज अनगिनत

अमूल्य धरोहर 

मोती 

​लहरें 

उठतीं गिरतीं

मचातीं शोर निरंतर 

पातीं सिंधु 

किनारा


​खारा 

असीम पानी 

सहेजता धैर्य गंभीर

लाँघता जलधि 

मर्यादा 


​धूप 

तपे तीखी 

वारिधि भाप बने 

नभ छूते

बादल

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)09/06/2026

सायली छंद

 सायली छंद - सायली छंद काव्य विधा है ।  यह एक लघु और सुगठित काव्य रूप है, जिसमें केवल 5 पंक्तियाँ और कुल 9 शब्द होते हैं。सायली छंद का मुख्य ...