🌀 उलटबांसी- 1
बूझव बूझव गजानंद कहे रे भाई,
शेर ला गइया मार भगाई जी।
अम्बर ऊपर पेड़े उगे हे,
जड़ मा डारा पाना लगे हे जी।
सुक्खा तरिया मा बहे हे धारा,
बिना गोड़ के चले संसारा जी।
माली ला फूल हा मूड़ मा खोंचे,
परबत ला हे चाँटी दबोचे जी।
बइहा ला हे सब कुछ सूझे,
ज्ञानी हा देखव जनउला बूझे जी।
हाथी हा डर के मारे भागे,
मुसवा हा रतिहा बइठे जागे जी।
पथरा हा रोये, लोहा मुस्काये,
चेला हा गुरु ला ज्ञान सिखाये जी।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)30/06/2026
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🌀 उलटबांसी- 2
बूझव-बूझव गजानंद कहे रे भाई,
सुक्खा तरिया मा बगुला नहाई जी।
मुसवा बिलाई ला हा पकड़े,
मछरी पेड़ के जड़ ला जकड़े जी।
बइला बियाये हे, गाय हे बांझा,
बछवा दूध दुहै दिन-सांझा जी।
पंख बिन चिरई उड़े हे अकाशा,
दीया बिना चारो मुड़ा प्रकाशा जी।
आगू मा पानी, पाछू मा आगी,
सोवत जागय, जागत हा भागी जी।
धरती हा अगास ऊपर छाये,
भुइँया, बादर मा पानी गिराये जी।
बिना गोड़ के दौड़य राही,
इहू अचंभा सूझत नाहीं जी।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)30/07/2026
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🌀 उलटबांसी- 3
बूझव-बूझव गजानंद कहे रे भाई,
सुई मा हाथी हवे समाई जी।
कउँहा हा मोती चुग-चुग खाये,
हंस हा कचरा मा मँडराये जी।
बिना हाथ के बुनत हे साड़ी,
बिना चक्का के दउड़त हे गाड़ी जी।
बिना गला के गावत हे गाना,
गूंगा करत हे ग्रंथे बखाना जी।
मुर्दा हा उठके हे गोठियाये,
जीयत मनखे हा सुतियाये जी।
धरती गगन ला लीलत जाये,
अँधियारी मा दीया समाये जी।
कहे गजानंद सुनौ सुजाना,
उलट के देखव तो मिलही ज्ञाना जी।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)30/07/2026
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🌀 उलटबांसी- 4
बूझव-बूझव गजानंद कहे रे भाई,
हिरना, बघवा ला हे कुदाई जी।
चंदा हा देखव घाम बरसाये,
सुरुज के गोदी मा ठंडा समाये जी।
नदिया हा सागर ला सोख जाए,
सुक्खा कुआँ मा पूरा हा आए जी।
पवन हा डोरी बन बंध जाए
लोहा के जंजीर पिघल जाए जी।
आगी के कोरा मा पानी हा सोए,
जीयत मनखे बर दुनिया रोये जी,
बंजर भुइँया मा अमरित बरखा,
समुंद हा बूँद मा डूबके परखा जी।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
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🌀 उलटबांसी: 5
बूझव-बूझव गजानंद कहे रे भाई,
मरे गइया देखव हे पगुराई जी।
मुसवा बिलई ला खदेड़ मारे,
मेचका ला देख साँपें टर्राये जी।
पेड़ हा भुइँया ऊपर नइ जावय,
जड़ी अकासे मा फर जावय जी।
माटी के पुतरा परान फूँके,
पंडित के मंतर भभूत चूके जी।
अँधरा हा दीया ला घटकत जाये,
कोंदा हा रात-दिन गारी सुनाये जी।
मछरी रूख मा महल बनाये,
चिरई पानी मा गोता लगाये जी।
सुक्खा तरिया मा डोंगा हा तउड़े,
ज्ञाने के रद्दा मा भरम हा दउड़े जी।
✍️ इंजी. गजानंद पात्रे 'सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
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🌀 उलटबांसी: 6
गुनौ-गुनौ गजानंद कलजुग के बानी
उलटा बहय करम के पानी जी।
सोना हा लोहा के गदहा ला बोहय,
काँचे के टुकड़ा हा हीरा ला धोवय जी।
चेला हा बइठे जी आसन लगाये,
गुरु हा पाछू चउँर डोलाये जी।
भीखे मँगइया हा दाने ला बाँटे,
करम के रेघा ला धरम हा चाँटे जी।
साँपे हा गिद्दा ला पंजा दबाये,
कोलिहा हा कुकर ला जंगल भगाये जी।
कागे भुसंडी हा मड़वा मा गावय,
कोयली हा बइठे रोना मचावय जी।
मुरुख हा ज्ञानी ला देखव ठगे हे,
सच मा झूठ के ताला लगे हे जी।
✍️ इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
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🌀 उलटबांसी: 7
गुनौ-गुनौ गजानंद कलजुग के बानी,
ऊपर हे कमरा तरी हे छानी जी।
माटी के घइला मा सागर समाये,
अगास, लइका बन कोरा मा आये जी।
साँसे के खूँटा मा हिरदे हा बंँधगे,
मिरगा के तीर मा शिकारी हा बिंधगे जी।
तरिया के पानी मा मछरी हा प्यासी,
मरे हा जिये, जीयत पाये फाँसी जी।
सुक्खा रे तरिया मा लहरा उठत हे,
बिना थाप दिये मँदरिया धुकत हे जी।
सुरुज,चंदा ले उजियारी माँगे,
ज्ञानी हा मुरुख के पाछू मा भागे जी।
छोटे से फर, बड़ रुखवा झुकाये,
तप के छइहाँ हा घामे थिराये जी।
नदिया हा सागर ला गोदी सुताये,
झूठ के मारग हा जग ला जगाये जी।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)03/07/2026
