*ये पितर के मनइ लगथे, मोला जी बइहासी*
जीयत लोटा पानी तरसे, मरे म मथुरा काशी।
जीयत लोटा पानी तरसे, मरे म मथुरा काशी।
देख चरित्तर ये दुनिया के, आवत हे बड़ हाँसी।
ये पितर के मनइ लगथे, मोला जी बइहासी।1।
जीयत भूखन लाँघन तरसे, मरे म चीला बबरा।
करिया कउँवा बाप बने हे, हत रे मानुष लबरा।
ताते तात कुकुर बिलई बर, पुरखा खावय बासी।
ये पितर के मनइ लगथे, मोला जी बइहासी।2।
जीयत मीठा बोली तरसे, दउड़े लेकेे डंडा।
तर जही हमर पुरखा कहिके, पिंड पराये पंडा।
राह धरे हे मनखे कइसे, मन हे मोर उदासी।
ये पितर के मनइ लगथे, मोला जी बइहासी।3।
जीयत तन लंगोटी तरसे, मरे म धोती कुरता।
जीयत सेवा करे नही अउ, मरे म करथस सुरता।
इही बात ला बोले हावय, मोर संत गुरु घासी।
ये पितर के मनइ लगथे, मोला जी बइहासी।4।
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
रचना:-इंजी.गजानंद पात्रे *सत्यबोध*
10-09-2017
ये पितर के मनइ लगथे, मोला जी बइहासी।1।
जीयत भूखन लाँघन तरसे, मरे म चीला बबरा।
करिया कउँवा बाप बने हे, हत रे मानुष लबरा।
ताते तात कुकुर बिलई बर, पुरखा खावय बासी।
ये पितर के मनइ लगथे, मोला जी बइहासी।2।
जीयत मीठा बोली तरसे, दउड़े लेकेे डंडा।
तर जही हमर पुरखा कहिके, पिंड पराये पंडा।
राह धरे हे मनखे कइसे, मन हे मोर उदासी।
ये पितर के मनइ लगथे, मोला जी बइहासी।3।
जीयत तन लंगोटी तरसे, मरे म धोती कुरता।
जीयत सेवा करे नही अउ, मरे म करथस सुरता।
इही बात ला बोले हावय, मोर संत गुरु घासी।
ये पितर के मनइ लगथे, मोला जी बइहासी।4।
(सर्वाधिकार सुरक्षित)
रचना:-इंजी.गजानंद पात्रे *सत्यबोध*
10-09-2017
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सार छंद गीत- *खेत-किसानी*
बादर गरजे बिजली चमके, बरसे रदरद पानी।
खेत डहर चल जाबो संगी, आगे बतर किसानी।।
खाँध सजा ले नाँगर बइला, जाँगर टोर कमाबो।
भुइँया दाई के कोरा मा, दाना अन्न उगाबो।।
पेट किसान सबो के भरथे, बनके जग बरदानी।
बादर गरजे बिजली चमके, बरसे रदरद पानी।।1
सावन भादो महिना आये, भुइँया हा हरियाये।
बासी झड़कत झूम नँगरिहा, गीत ददरिया गाये।।
हरियर-हरियर चूनर ओढ़े, धरती लगथे रानी।
बादर गरजे बिजली चमके, बरसे रदरद पानी।।2
सोन बरोबर बाली चमके, माथा अपन नवाँये।
खेत भरे खलिहान भरे जी, अंतस हा हरसाये।।
नवा चउँर के खा लौ चीला, सँवर जही जिनगानी।
बादर गरजे बिजली चमके, बरसे रदरद पानी।।3
छत्तीसगढ़ के महिनत देखव, जग मा शोभा पाही।
धान कटोरा ये भुइँया हा, सुन लौ सदा कहाही।।
सत्यबोध जी सार छंद मा, महिमा करे बखानी।
बादर गरजे बिजली चमके, बरसे रदरद पानी।।4
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)04/07/2026

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