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*दिनांक -- 11/03/2024*
*दिन -- सोमवार*
*आधार छंद-- पीयूष वर्ष/ आनंदवर्धक सममात्रिक*
*परिचय-- महा पौराणिक वर्ग भेद (6765)*
*मापनी -S|SS-SISS-S|S*
*पदांत-- |S, |||*
*सृजन शब्द-- मुस्कुराते आ रहे वो सामने (3 युग्म)*
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मुस्कुराते आ रहे वो सामने।
साथ चलने हाथ मेरा थामने।।
बावरा बन ख्याल में खोया रहा।
प्रीत पीड़ा रात दिन मैं तो सहा।।
है पराया कौन किसका मीत है।
दर्द अपनों से मिला जग रीत है।।
पूछते हैं लोग दुख में अब कहाँ।
बन गए सब मतलबी रिश्तें यहॉं।।
शूल बनकर चुभ रहा अब फूल है।
दिल लगाना आशिकी में भूल है।।
तोड़ना मत दिल खिलौना जानकर।
पूज लो प्रिय प्यार को प्रभु मानकर।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/03/2024
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*आधार छंद-- पीयूष वर्ष/ आनंदवर्धक सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- भूल क्या हमसे हुई है ये बता (3 युग्म)*
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भूल हमसे क्या हुई है ये बता।
प्यार तुमसे जो नहीं पाया जता।।
दे रही हो क्यों सजा तुम इस कदर।
मत चुराओ आज प्रिय हमसे नजर।।
प्रेम प्यासा राह परवाना बना।
है विरोधी कोहरा पथ में घना।।
उड़ रहा पंछी बने आकाश में।
आ चले आओ सनम तुम पास में।।
प्यार का कर दूँ झड़ी पल-पल घड़ी।
क्यों सनम जिद पर अभी तक हो अड़ी।।
हूँ दिवाना आपका पहचान लो।
प्रेम में क्या प्रेम है तुम जान लो।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/03/2024
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*आधार छंद-- पीयूष वर्ष/ आनंदवर्धक सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- मुस्कुराने का बहाना चाहिए।(3 युग्म)*
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मुस्कुराने का बहाना चाहिए।
प्रीत का हर पल तराना चाहिए।।
बांट लो तुम ज़िन्दगी में सुख सभी।
भूल से करना शिकायत मत कभी।।
फूल खुशियों के खिले कर कामना।
दीन-दुखियों को उठाना थामना।।
पग बढ़ाना जानने पर पीर को।
नैन से बहने न दें सुख नीर को।।
रख भरोसा आत्म पर कर श्रम सदा।
कर्ज गुरु माता-पिता का कर अदा।।
प्रार्थना प्रभु का करें उपकार लें।
कर कृपा भव से हमें वे तार लें।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 12/03/2024
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*आधार छंद-- पीयूष वर्ष/ आनंदवर्धक सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- जीत होगी ठान कर आगे बढ़ो ।(2 युग्म)*
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जीत होगी ठान कर आगे बढ़ो।
नित्य नव आयाम जीवन में गढ़ो।।
देखना मत लौटकर कल को कभी।
ज़िन्दगी में जो करें कर लें अभी।।
है समय बलवान इतना जान लो।
क्या बुरा है क्या भला पहचान लो।।
सीख लें दुख में स्वयं को थामना।
हर घड़ी सुख ही मिले कर कामना।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 12/03/2024
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आधार छंद-- पीयूष वर्ष/ आनंदवर्धक सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- अनछुए मन को कभी पहचानिए ।(3 युग्म)*
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अनछुए मन को कभी पहचानिए।
क्या छुपा है राज इतना जानिए।।
दर्द में गमगीन या सुख में मगन।
दिल जलाता है गरीबी की अगन।।
मत करो धन रूप का अभिमान तुम।
अन्न भूखे को मिले दो ध्यान तुम।।
नीर प्यासे को पिला उपकार कर।
राह भटके को बता उद्धार कर।।
दो जरूरतमंद को ही दान तुम।
नित बसा खुद के हृदय भगवान तुम।।
है गरीबी दुख बला सच मानिए।
अनछुए मन को कभी पहचानिए।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 13/03/2024
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*आधार छंद-- पीयूष वर्ष/ आनंदवर्धक सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- प्यार की बरसात होने दीजिए (2 युग्म)*
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प्यार की बरसात होने दीजिए।
आज हमको होश खोने दीजिये।।
याद तुमको हर घड़ी हर पल किये।
जी रहे थे स्वप्न हमनें जी लिये।।
है अनोखा प्यार अपना जान लो।
प्रीत जीवन भर निभाना ठान लो।।
साथ मत छूटे कभी वादा करो।
हो भले दुश्मन जमाना मत डरो।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 13/03/2024
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*आधार छंद-- पीयूष वर्ष/ आनंदवर्धक सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- बंधनों से मुक्त, सारे चल पड़े (3 युग्म)*
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बंधनों से मुक्त, सारे चल पड़े।
भावनों से युक्त, मोती मन जड़े।।
छोड़ना मत साथ, अपनों का कभी।
मान घर परिवार, रख लेना सभी।।
छाँव गुरु माँ बाप, सबको नित मिले।
कृत दया का फूल, निज मन में खिले।।
बात रखना ध्यान, सेवा भव भरे।
भाव हित उपकार, करुणा मत मरे।।
बांटना जग प्रेम, प्रभु का नाम दे।
जोड़ना सम्बन्ध, सुख-दुख काम दे।।
मत बिछाना शूल, जीवन राह में।
ज़िन्दगी अनमोल, रख सुख चाह में।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 14/03/2024
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बंधनों से मुक्त, सारे चल पड़े।
भावनों से युक्त, मोती मन जड़े।।
छोड़ना मत साथ, अपनों का कभी।
मान घर परिवार, रख लेना सभी।।
छाँव गुरु माँ बाप, सबको नित मिले।
कृत दया का फूल, निज मन में खिले।।
बात रखना ध्यान, सेवा भव भरे।
भाव हित उपकार, करुणा मत मरे।।
बांटना जग प्रेम, गुरु का नाम दे।
जोड़ना सम्बन्ध, सुख-दुख काम दे।।
मत बिछाना शूल, जीवन राह में।
ज़िन्दगी अनमोल, रख सुख चाह में।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 14/03/2024
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*आधार छंद-- पीयूष वर्ष/ आनंदवर्धक सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- चापलूसों की बढ़े नित शान है ।(2 युग्म)* !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
चापलूसों की बढ़े नित शान है।
अंधभक्तो का चढा परवान है।।
शोर चमचा आजकल करते फिरे।
हैं विवादों में सदा नेता घिरे।।
दास जनता बन गए लाचार हो।
बन गए कानून जब गद्दार हो।
आबरू की कौन रखवाली करे।
आमजन भयभीत दिखते हैं डरे।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 14/03/2024
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*आधार छंद-- पीयूष वर्ष/ आनंदवर्धक सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- लोकरंजन छोड़, निज पहचान कर।(2 युग्म)*
⚛️🕉️✡️☸️⚛️🕉️✡️☸️⚛️🕉️
लोकरंजन छोड़, निज पहचान कर।
प्रीत सबसे जोड़, मत अभिमान कर।।
लालसा को त्याग, पद धन देह का।
कर सदा बरसात, जग जन नेह का।।
हो सरल व्यवहार, मीठा रख वचन।
है गरल कटु बोल, खुद में कर पचन।।
कर्म नेकी चाह, जीवन ध्येय हो।
मत बुरा कर काम, होता हेय हो।।
🖊️इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 15/03/2024
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*आधार छंद-- पीयूष वर्ष/ आनंदवर्धक सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- नित्य उत्सव मान, जीवन कर सफल।(3)
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नित्य उत्सव मान, जीवन कर सफल।
कर समय उपयोग, लौटे फिर न कल।।
चल भलाई राह, गति दो कर्म को।
नीति जीवन सार, समझो मर्म को।।
लो समझ पर पीर, दो सुख छाँव को।
प्राप्त हो सुख धाम, भज प्रभु पाँव को।।
सत्य ही भगवान, कण-कण सत्य है।
सार है प्रभु राम, जन-जन कथ्य है।।
ऊँच रखकर लक्ष्य, मंजिल पार कर।
जो मिले परिणाम, विचलित हो न डर।।
हो उदय नव भोर, पथ सुख का मिले।
मीत मन का फूल, जीवन में खिले।।
🖊️गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 16/03/2024
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नित्य उत्सव मान, जीवन कर सफल।
कर समय उपयोग, लौटे फिर न कल।।
चल भलाई राह, गति दो कर्म को।
नीति जीवन सार, समझो मर्म को।।
लें समझ पर पीर, दें सुख छाँव को।
प्राप्त हो सुख धाम, भज गुरु पाँव को।।
तन खजाना सत्य, घट-घट सत्य है।
सार है सतनाम, जन-जन कथ्य है।।
ऊँच रखकर लक्ष्य, मंजिल पार कर।
जो मिले परिणाम, विचलित हो न डर।।
हो उदय नव भोर, पथ सुख का मिले।
मीत मन का फूल, जीवन में खिले।।
🖊️गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 16/03/2024
⚛️🕉️✡️☸️⚛️🕉️✡️☸️⚛️🕉️
*आधार छंद-- पीयूष वर्ष/ आनंदवर्धक सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- अब शिकायत आपसे हम क्या करें ।(2 युग्म)*
!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
क्यों समझ पाई नहीं हो प्यार को।
साथ मेरे चाह की इजहार को।।
अब शिकायत आपसे हम क्या करें ।
दूर हो हम रात-दिन आहें भरें।।
बन पुजारी प्रेम का फिरता रहा।
साथ पाने आपका हर गम सहा।।
आँसुओं की रात देकर चल दिये।
जी नहीं पाऊँ कभी वो पल दिये।।
रोग दिल में प्यार का बैठा लगा।
था नहीं मालूम वो देगी दगा।।
चाहता है दिल उसे देना दुआ।
भूल कर ये साथ मेरे क्या हुआ।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 16/03/2024
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*आधार छंद-- पीयूष वर्ष/ आनंदवर्धक सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- अब शिकायत आपसे हम क्या करें ।(3 युग्म)*
!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
क्यों समझ पाई नहीं हो प्यार को।
साथ मेरे चाह की इजहार को।।
अब शिकायत आपसे हम क्या करें ।
दूर हो हम रात-दिन आहें भरें।।
बन पुजारी प्रेम का फिरता रहा।
साथ पाने आपका हर गम सहा।।
आँसुओं की रात देकर चल दिये।
जी नहीं पाऊँ कभी वो पल दिये।।
रोग मन में प्यार का बैठा लगा।
था नहीं मालूम वो देगी दगा।।
चाहता है दिल उसे देना दुआ।
भूल कर ये साथ मेरे क्या हुआ।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 16/03/2024

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