*दिनांक -- 04/03/2024*
*दिन -- सोमवार*
*आधार छंद-- शक्ति /संज्वर सममात्रिक*
*लक्षण- मापनी मुक्त*
*परिचय-- पौराणिक वर्ग भेद (4091)*
*मापनी -|SS-|SS-|SS-|S*
*पदांत-- |S, या |||*
*सृजन शब्द--नहीं दूर जाना हमारी कसम (3 युग्म)*
*आओ सृजन करें - नव पथ गमन करें*
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नहीं दूर जाना हमारी कसम।
जुदाई नहीं सह सकेंगे सनम।।
तुम्हीं से बहारें खिला है चमन।
तुम्हीं से नजारें सजे हैं नयन।।
कभी पास आकर हमें थाम लो।
निगाहें उठाकर प्रिये नाम लो।।
समाँ बन जला हूँ विरह रात में।
हटाओ हया इस मुलाकात में।।
चकोरी प्रिये प्रीत मन को छुआ।
नहीं होश मदहोश चातक हुआ।।
बुझी प्यास जन्मों-जनम की अभी।
शिकायत करेंगे न फिर हम कभी।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 04/03/2024
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*आधार छंद-- शक्ति /संज्वर सममात्रिक*
*लक्षण- मापनी मुक्त*
*परिचय-- पौराणिक वर्ग भेद (4091)*
*मापनी -|SS-|SS-|SS-|S*
*पदांत-- |S, |||*
*सृजन शब्द--नहीं दूर जाना हमारी कसम (3 युग्म)*
⚛️🕉️✡️☸️⚛️🕉️✡️☸️⚛️🕉️
नहीं दूर जाना हमारी कसम।
निभाना पड़ेगा तुम्हें हर रसम।।
हृदय में सदा प्रेम चाहत भरूँ।
सलामत रहो तुम दुआ मैं करूँ।।
मुसाफिर बना चाह की राह में।
अकेला हुआ प्रीत परवाह में।।
तलाशा तुझे गाँव घर हर शहर।
सुबह शाम दिन रात मैं दोपहर।।
सताती मुझे है मिलन की घड़ी।
लगी है गमों की नयन में झड़ी।।
जरा पास आओ बुझा प्यास दो।
निशानी मुझे आशिकी खास दो।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़ ) 04/03/2024
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*आधार छंद-- शक्ति /संज्वर सममात्रिक*
*सृजन शब्द--महालय सिखाता हमें छंद है.(3 युग्म)*
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महालय सिखाता हमें छंद है।
बनाता सभी को हुनरमंद है।।
करें वंदना नित्य माँ भारती।
उतारें सजा थाल को आरती।।
जहाँ आपसी प्रेम बगियाँ खिले।
सदा मान व्यवहार आदर मिले।।
दिखाई कभी भी न दे द्वंद है।
सभी में भरा ज्ञान मकरंद है।।
मुझे मीत सानिध्य गुरुवर मिला।
हृदय में कृपा फूल तरुवर खिला।।
करे याचना नित गजानंद है।
करें भूल को माफ मतिमंद है।।
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महालय सिखाता हमें छंद है।
धरे ज्ञान गुरु का गजानंद है।।
लिखें मापनी में रखे भाव को।
करें पार गुरु जी कलम नाव को।।
सभी साधकों में यहाँ प्रेम है।
मिला मान व्यवहार में नेम है।।
भरा भाव बंधुत्व सबमें यहाँ।
मिलेगा पटल इस तरह भी कहाँ।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 05/03/2024
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*आधार छंद-- शक्ति /संज्वर सममात्रिक*
* शब्द--भला सर्व का हो करें प्रार्थना (3 युग्म)*
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भला सर्व हो हम करें प्रार्थना।
मनोकामना पूर्ण यह अर्चना।।
चलें राह सच हम भलाई करें।
बुरी है बला आप हम सब डरें।।
अहं क्रोध अभिमान को त्याग दें।
सभी से मिलें मीत अनुराग दें।।
मिली जिंदगी है यहाँ चार पल।
किसे क्या पता शाम दिन रात कल।।
हुआ मतलबी आज इंसान है।
दिखावा हुआ मान पहचान है।।
गलत और सच का नहीं ज्ञान है।
गजानंद मदमस्त संतान है।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 05/03/2024
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*दिनांक -- 06/03/2024*
*दिन -- बुधवार*
*आधार छंद-- शक्ति /संज्वर सममात्रिक*
*लक्षण- मापनी मुक्त*
*परिचय-- पौराणिक वर्ग भेद (4091)*
*मापनी -|SS-|SS-|SS-|S*
*पदांत-- |S, |||*
*सृजन शब्द--किनारा मिलेगा रहो साथ तुम।.(3 युग्म)*
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किनारा मिलेगा रहो साथ तुम।
सफर जिंदगी थामना हाथ तुम।।
मिलेंगे कभी फूल काँटे कभी।
रखे हैं कदम प्यार में हम अभी।।
निहारूँ तुझे मैं बसा नैन में।
पुकारूँ तुझे प्रिय सुबह रैन में।।
लगा लो गले से बुझा प्यास दो।
तुम्हारा रहूँ प्रेम विश्वास दो।।
बसंती बहारें लगन है लगी।
मुझे चाह साजन मिलन की जगी।।
उठे हूक दिल में विरह की घड़ी।
चली लौट आ प्रीत की कर झड़ी।।
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*दिनांक -- 06/03/2024*
*दिन -- बुधवार*
*आधार छंद-- शक्ति /संज्वर सममात्रिक*
*लक्षण- मापनी मुक्त*
*परिचय-- पौराणिक वर्ग भेद (4091)*
*मापनी -|SS-|SS-|SS-|S*
*पदांत-- |S, |||*
*सृजन शब्द- पधारे अवध में सिया राम है।(3 युग्म)*
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पधारे अवध में सिया राम है।
अधर में उसी का सदा नाम है।।
सहारा करो प्रभु शरण हूँ पड़ा।
प्रतीक्षा लिए नाथ हूँ मैं खड़ा।।
किया हूँ समर्पण हृदय भाव से।
करो पार मझधार कृत नाव से।।
रहो आप उर में कृपा धाम बन।
मनोहर मुरारी सुधा श्याम बन।।
परायण बनूँ मैं करूँ साधना।
कहीं भूल हो तो वहाँ थामना।।
जला ज्योति मन में उजाला करो।
करूँ प्रार्थना क्लेश तम को हरो।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 06/03/2024
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*आधार छंद-- शक्ति /संज्वर सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- कभी तो मुझे भी ठिकाना मिले (3 युग्म)*
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कभी तो मुझे भी ठिकाना मिले।
सफर जिंदगी का सुहाना मिले।।
बना मैं पथिक बस अकेले चला।
कभी धूप गर्मी अगन में जला।।
शिकायत नहीं है किसी से कभी।
किया पार मंजिल स्वयं से अभी।।
सभी की दुआ से मिली जीत है।
करूँ मान आभार प्रिय मीत है।।
नजर से किसी को गिराना नहीं।
किसी मोड़ पे मिल न जाये कहीं।।
सहारा बनो दीन उपकार कर।
चलो सत्य पथ नाम कर लो अमर।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 07/03/2024
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*आधार छंद-- शक्ति /संज्वर सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- परम लक्ष्य पाना सुनिश्चित करो (2 युग्म)*
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परम लक्ष्य पाना सुनिश्चित करो।
मिलेगी सफलता नहीं तुम डरो।।
कभी हार मिलना कभी जीत तय।
रखे हौसला जो उसी का विजय।।
करो रौशनी दीप नेकी जला।
रहो दूर पर की बुराई बला।।
खुशी बाँटने जग उठा पाँव को।
बढ़ाओ सदा प्रेम की छाँव को।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 08/03/2024
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*आधार छंद-- शक्ति /संज्वर सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- कभी भी न पालो किसी पर वहम (3 युग्म)*
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कभी भी न पालो किसी पर वहम।
समझ जिंदगी में सभी हैं अहम।।
सभी को सभी की जरूरत पड़े।
मनुज मन कभी मत अहं पर अड़े।।
कदम से कदम तुम मिलाते चलो।
किसी की प्रगति से न तुम तो जलो।।
लगाओ गले जन भुला द्वेष को।
रखो स्वच्छ परिवेश अनिमेष को।।
चराचर जगत में सभी एक हैं।
अहिंसा परम धर्म पथ नेक हैं।।
लड़ो मत कभी धर्म के नाम पर।
सदा ध्यान देना सहीं काम पर।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 08/03/2024
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*आधार छंद-- शक्ति /संज्वर सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- लहर जो उठी है दिखाऊँ किसे (3 युग्म)*
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लहर जो उठी है दिखाऊँ किसे।
दिया दर्द हमदर्द माना जिसे।।
कभी भी सितम में नहीं की कमी।
मिला जख्म हर पल नयन में नमी।।
बना प्रेम का मैं पुजारी खड़ा।
तुम्हारी झलक को अचेतन पड़ा।।
जपूँ नाम माला घड़ी पल घड़ी।
लगा लो गले दूर हो क्यों खड़ी।।
हुआ बावरा मैं लगाकर लगन।
जलाती मुझे नित जुदाई अगन।।
सजा प्यार का मत किसी को मिले।
अधर में मिलन का सुमन ही खिले।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 09/03/2024
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*आधार छंद-- शक्ति /संज्वर सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- सुबह शाम मैंया करूँ आरती (2 युग्म)*
""''''''''''"'"'*"'''''''''''''''"*""'''''''''"''""'*""'''''''''''''*
सुबह शाम मैंया करूँ आरती।
चरण मैं नमन नित करूँ भारती।।
बढ़ाना सदा मान संस्कार को।
करो तेज मेरी कलम धार को।।
बढ़े पाँव नेकी सफल राह में।
थमे सांस उपकार की चाह में।।
बसर जिंदगी हो सहीं कर्म में।
लगे मन लगन माँ दया धर्म में।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 09/03/2024
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*आधार छंद-- शक्ति /संज्वर सममात्रिक*
शक्ति छंद- *सुबह शाम सतनाम का जाप कर*
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सुबह शाम सतनाम का जाप कर।
चलो सत अहिंसा सुफल राह पर।।
करो प्रार्थना सब निरोगी रहे।
न कोई यहाँ कष्ट भोगी रहे।।
अमृत सात संदेश व्यालिस वचन।
अमल संत कर लो गुरू का कथन।।
इसी में सफल जिंदगी सार है।
मिला कर्म उपकार आधार है।।
कभी द्वेष करना सिखाता नहीं।
दिखाता सदा पथ गलत क्या सहीं।।
लड़ाता नहीं धर्म के नाम पर।
हमेशा दिया जोर सत काम पर।।
सभी जन्म से एक इंसान है।
लहू एक है एक मुँह कान है।।
हवा एक चलती सभी के लिए।
बताओ भला भेद किसने किये!!
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 10/03/2024
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*आधार छंद-- शक्ति /संज्वर सममात्रिक*
*सृजन शब्द - *मिला देव मुझको गुरू रूप में*
मिला देव मुझको गुरू रूप में।
दिए छाँव सुख का मुझे धूप में।।
मिला नाम आधार उपकार में।
भरे ज्ञान भंडार व्यवहार में।।
मिटा दीन तृष्णा सहारा दिए।
मुझे शांति जीवन गुजारा दिए।।
गुरू पाठ इंसानियत का पढ़ा।
दिए हो बुलंदी शिखर में चढ़ा।।
जले भक्ति दीया हृदय थाल में।
खिले भाव श्रद्धा सुमन भाल में।।
खुशी सुख प्रदाता कृपानाथ हो।
गजानंद की भक्ति के साथ हो।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/03/2024

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