रविवार, 24 नवंबर 2024

हिंदी घनाक्षरी-

 *घनाक्षरी*

   *जिनके प्रत्येक पद में वर्ण संख्या 26 से अधिक हो उसे दंडक कहते हैं। दंडक अर्थात् दंडकर्ता , कहने का प्रयोजन यह कि इसके प्रत्येक चरण इतने लंबे होते हैं कि उसके उच्चारण में मनुष्य की साँस भर जाती है इसलिए इस दंडक कहते हैं। दंडक के मुख्यतः दो भेद होते हैं।*

1/- साधारण दंडक -- जो गण बद्ध होते हैं।

2/- मुक्तक दंडक -- जो गण बद्ध नहीं होते हैं।

     *मुक्तक दंडक की श्रेणी में घनाक्षरी होते हैं जो कि 31 वर्ण से लेकर 33 वर्ण तक होते हैं।

घनाक्षरी समवार्णिक मुक्तक छंद है इसे कवित्त भी कहते हैं। इसमें 31 से लेकर 33 वर्ण तक होतें हैं। ज्ञात हो वर्णिक छंदों में आधे अक्षर की गणना नहीं होती*

       *इस छंद का नामकरण 'घन' शब्द पर है जिसके हिंदी में 4 अर्थ 1/. मेघ/बादल, 2/. सघन/गहन, 3/. बड़ा हथौड़ा, तथा 4/. किसी संख्या का उसी में 3 बार गुणा (क्यूब) हैं. इस छंद में चारों अर्थ प्रासंगिक हैं. घनाक्षरी में शब्द प्रवाह इस तरह होता है। मेघ गर्जन की तरह निरंतरता की प्रतीति हो. घनाक्षरी में शब्दों की बुनावट सघन होती है जैसे एक को ठेलकर दूसरा शब्द आने की जल्दी में हो. घनाक्षरी पाठक / श्रोता के मन पर प्रहर सा कर पूर्व के मनोभावों को हटाकर अपना प्रभाव स्थापित कर अपने अनुकूल बना लेने वाला छंद है।*

      *घनाक्षरी से आशय मनहरण घनाक्षरी होता है । इस छन्द में चार चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 16,15 के विराम से 31 वर्ण होते हैं। प्रत्येक चरण के अन्त में गुरु वर्ण होना चाहिये। छन्द की गति को ठीक रखने के लिये 8,8,8 और 7 वर्णों पर यति रहना चाहिये।*

वर्ण संयोजन  ----

1/--- सम सम सम सम ------  उत्तम

2/-- विषम विषम सम -----उत्तम

3/-- सम विषम विषम ----- पचनीय

4/--- विषम सम विषम सम --- वर्जित


घनाक्षरी में परिचय ---

वर्ण वृत इसे जानो, भक्ति काल से ही मानो, ओजपूर्ण भाव को ही, निखारे घनाक्षरी।

आठ-आठ तीन बार, और सात एक धार, इकतीस वर्ण रख, सँवारे घनाक्षरी ।।

सोलह पंद्रह यति, मिले हैं सुंदर गति, कवि कुल हर्षमान, पुकारे घनाक्षरी ।

बादल सघन अस, हथौड़ा बरस जस, तीन बार गुणा कर, सुधारे घनाक्षरी।।  

 वर्ण संयोजन --

मनहरण घनाक्षरी --- 

यति-- 8,8,8,7 पदांत-- 212

मिले नहीं फिर जानो, कहना अभी ये मानो, गया वक्त आता नहीं, देख ले पुकार के।

आए गए सगे नाते, छूटे सभी आते-जाते, सारे खेल तेरे आगे, सोच ले विचार ले।।

भूला कहाँ अभी प्यारे, सोच जरा गति न्यारे, वक्त बीता थोड़ा-थोड़ा, प्यारे तू निहार ले।

जो भी आया गया यहांँ, कौन जाने कोई कहांँ, मान सच कहना तू, वक्त को सुधार ले।।

विषम वर्ण संयोजन -----

              मनहरण घनाक्षरी 

छोड़ते कुपंथ चलो, सुपंथ महान पलो, निकुंज कामना सदा, छा गये सुवास में।

सांँवरे से प्रीत घने, बावरा सा मीत बने, सनेह सुजान जीत, तुम रहो पास में।।

सामने साँवरा खड़े, तिरछी नैनों से लड़े, बाँसुरी अधर धरे, आज महारास में।

गोपिका गर्विता महा, राधिका चर्चित सदा, धरती गगन देखो, भरे हैं उल्लास में।।

                  ---डॉ रामनाथ साहू "ननकी"

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*दिनांक -- 04/11/2024*

*दिन -- सोमवार*

*परिचय-- मनहरण घनाक्षरी (31 वर्ण)

*यति-- 8,8,8,7

*पदांत- रगण (212)

*सृजन शीर्षक- अब तो आनंद है  । (3 युग्म)*

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विनती करूँ हे नाथ, पग में झुका के माथ, देना हरदम साथ, तब तो आनंद है।

भावों को आयाम देना, शब्द अभिराम देना, संकट लगाम देना, घेरा अर्थ द्वंद है।।

प्रभु जी उद्धार करो, कष्ट मेरे आप हरो, नाव भवपार करो, राह सभी बंद है।

नाथ मैं हूँ दीन दुखी, जीवन को करो सुखी, खुशियाँ हो चहुँमुखी, अर्ज गजानंद है।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 04/11/2024     


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*दिनांक -- 07/11/2024*

*दिन -- गुरुवार*

*परिचय-- मनहरण घनाक्षरी (31 वर्ण)

*यति-- 8,8,8,7

*पदांत- रगण (212)

*सृजन शीर्षक- अधिकार दीजिए।

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बेटी बेटा एक जानों, फर्क नहीं कुछ मानों, दोनों को ही बढ़ने का, अधिकार दीजिए।

बेटा से हैं कुल बढ़े, बेटी परिवार गढ़े, दोनों ही तो खूब पढ़े, सुध सदा लीजिए।।

दोनों ही नयन तारा, माता पिता का सहारा, दोनों से है घर न्यारा, तुलना न कीजिये।

भेदभाव करें नहीं, बेटी रहे परे नहीं, घृणा मन भरे नहीं, प्रेम रस पीजिए।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 07/11/2024


*************जलहरण घनाक्षरी***********

*--जलहरण घनाक्षरी--*

विधान--- 

इस घनाक्षरी के प्रत्येक पद में 8,8,8 और 8 के क्रम में 32 वर्ण होते हैं। 31वां एवं 32वां वर्ण अनिवार्य रूप से लघु होना चाहिये। अर्थात अंत में दो लघु होना अनिवार्य तथा चारों पद के अंत में समतुकांत आवश्यक होता है।

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*परिचय-- जलहरण घनाक्षरी (32वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- दो लघु (211)*

*सृजन शीर्षक- हो अतिशय चंचल 

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पायल की झनकार, करे मुझे बेकरार, मन में बहे बयार, हो अतिशय चंचल।

तेरे बिना चैन नहीं, बीते अब रैन नहीं, भाये कुछ बैन नहीं, विकल हूँ हर पल।।

धकधक दिल करे, रात दिन आहें भरे, नयनों से अश्रु झरे, किया है तूने पागल।

करो प्रेम बरसात, मीठी-मीठी कर बात, रात से हो जाये प्रात, गजानंद अविरल।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 12/11/2024


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*परिचय-- जलहरण घनाक्षरी (32वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- दो लघु (211)*

*सृजन शीर्षक- माटी इसकी चंदन 

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भारत भूमि की जय, संगीत प्रवाहमय, प्रहरी है हिमालय, माटी इसकी चंदन।

गोद मे हैं हीरे मोती, बीज सुमता की बोती, अखण्ड जले हैं ज्योति, मुकुट सजे कुंदन।।

करूँ मान गुणगान, यही मेरी पहचान, मेरा यह अभिमान, है शत-शत वंदन।

गंगा की पावन धारा, मानवता भाईचारा, वंदेमातरम नारा, गजानंद अभिनंदन।।

✍🏻 इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 12/12/2024


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*परिचय-- जलहरण घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- दो लघु (211)*

*सृजन शीर्षक- हम हैं छंद साधक 

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गुरु सत्ता को प्रणाम, करता हूँ अविराम, मिला यश मान नाम, रहा न अब बाधक।

ज्ञान का भंडार पाया, मिटा तम दुख छाया, जीवन को महकाया, बन गुरु आराधक।।

लेखन का सिलसिला, शब्द भाव सोच मिला, विचारों का फूल खिला, कलम हुआ सार्थक।

जाना छंद विधान को, यति लय मिलान को, हो पदांत समान को, हम हैं छंद साधक।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 13/11/2024


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*परिचय-- जलहरण घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- दो लघु (211)*

*सृजन शीर्षक- अखियाँ अति चंचल।

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रूप है सलोना तेरा, दिल में है डाला डेरा, छीन लिया चैन मेरा, अँखिया अति चंचल।

बिंदी चमके माथ में, चूड़ी खनके हाथ में, बजे पायल साथ में, करने मुझे कायल।।

गेसुओं के छाँव तले, मुझे भी सुकून मिले, चाहतों के फूल खिले, है इंतजार वो पल।

नजर चुराओ नहीं, अब तड़पाओ नहीं, दूरियाँ बनाओ नहीं, हुआ दिल है विकल।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 14/11/2024

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*परिचय-- जलहरण घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- दो लघु (211)*

*सृजन शीर्षक- *जीवन का उपवन*

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चिड़िया बन चहके, हृदय मत बहके, सुमन सम महके, जीवन का उपवन। खुशियों का रंग भरो, दुखियों का दुख हरो, मत अभिमान करो, शुद्ध रखो तन-मन।। सत्य शांति राह चलो, ईर्ष्या द्वंद मत पलो, नित्य दीप बन जलो, दूर करो उलझन। गुरु गुणगान करो, महिमा बखान करो, सबका सम्मान करो, प्रेम भरो जग-जन।। ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 02/12/2024

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*परिचय-- जलहरण घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- दो लघु (211)*

*सृजन शीर्षक- चमके हैं शबनम*

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माह यह दिसंबर, खिला-खिला अम्बर, उमंग मन अंदर, बजते हैं सरगम। अगहन ठंड माह, कुनकुने धूप चाह, स्वस्थ तन परवाह, लगते हैं मधुरम।। दिलों से हैं दिल मिले, खुशियों के दीप जले, बागों में हैं फूल खिले, चमके हैं शबनम। ठंड ने किए कमाल, लोग सभी हैं बेहाल, ओढ़ते स्वेटर साल, तन पर हरदम।। ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 04/12/2024

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*परिचय-- जलहरण घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- दो लघु (211)*

*सृजन शीर्षक- बन के मन चातक*

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सीने से तुम्हें लगाने, हाल दिल का बताने, तरसा है प्रेम पाने, बन के मन चातक। दर-दर फिर रहा, अंधेरों में घिर रहा, चाहत में गिर रहा, आशिक बन जातक।। सनम जी दीदार को, छोड़ा हूँ घर द्वार को, समझो एतबार को, हुआ है चाह घातक। प्रियवर जिद छोड़ो, दिल मेरा मत तोड़ो, प्रेम पथ पग मोड़ो, बनो न तुम पातक।। ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 06/12/2024

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*꧁|| जनहरण घनाक्षरी ||꧂*

विधान:- कुल वर्ण संख्या = 31 । इसमें चरण के प्रथम 30 वर्ण लघु रहते हैं तथा केवल चरणान्त दीर्घ रहता है। 16, 15 पर यति या 8,8,8,7 पर भी लिखा जा सकता है।

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*परिचय-- जनहरण घनाक्षरी (31 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,7*

*पदांत- एक गुरु (112)*

*सृजन शीर्षक- पथ पर चलना

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धक-धक धड़कन, हर पल तड़पन, दुखित मुदित मन, सह गम जलना।

नयन विरह जल, छलकत अवरिल, तन मन हलचल, दुख दिन ढलना।।

चुप छुप गुमसुम, सितम जुलुम तुम, भरकर प्रिय गुम, दिल मत छलना।

प्रियतम कहकर, हमदम रहकर, सुख-दुख सहकर, पथ पर चलना।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 18/11/2024

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*परिचय-- जनहरण घनाक्षरी (31 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,7*

*पदांत- एक गुरु (112)*

*सृजन शीर्षक- मिलकर रहना

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मन गुरु पग भज, चरण कमल रज, पथ कटु दुख तज, सच रख गहना।

मधुर मिलन रख, खुद श्रम फल चख, पर धन मत भख, दुख पल सहना।।

कठिन डगर पर, मनुज सबर धर, रस प्रिय बनकर, अविरल बहना।

परहित जय कर, मन मत भय भर, नभ जल थलचर, मिलकर रहना।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 20/11/2024


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*परिचय-- जनहरण घनाक्षरी (31 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,7*

*पदांत- एक गुरु (112)*

*सृजन शीर्षक- सत पथ चलिए

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भ्रम भय तज चल, मत रख कटु छल, चख श्रम सुख फल, सत पथ चलिए।

खुश रख मन पट, प्रभु सब घट-घट, भ्रमित डगर हट, जग मत छलिए।।

यह तन सच धन, रख मत अनबन, सहज सरल बन, खुद मत जलिए।

परहित नित कर, यह गुण जग भर, बन सच अनुचर, कर मत मलिए।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/11/2024


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*परिचय-- जनहरण घनाक्षरी (31 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,7*

*पदांत- एक गुरु (112)*

*सृजन शीर्षक- दृग जल भरिए।

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हृदय विनय भर, सफल करम कर, पथ चल सच धर, दृग जल भरिए।

उदित मुदित मन, रह प्रिय जन-जन, मनुज सहज बन, दुख जग हरिए।।

वचन वजन रख, नित सच मुँह भख, मत भ्रम पग लख, श्रम सुख करिए।

गहन मनन कर, गरल शमन कर, जगत सुखद कर, मन मत डरिए।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/11/2024


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*परिचय-- जनहरण घनाक्षरी (31 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,7*

*पदांत- एक गुरु (112)*

*सृजन शीर्षक- अब न बहकना।

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चपल सफल रह, मन मत दुख सह, मुख नित सच कह, अब न बहकना।

मत कल पर मुड़, रह जग जन जुड़, खग बन नभ उड़, सतत चहकना।।

अनल पवन सम, हरदम रख दम, तज दुख भय भ्रम, चमन महकना।

मनुज मनन कर, चल शुभ पथ धर, बन सच अनुचर, द्रवित दहकना।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 22/11/2024


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*परिचय-- जनहरण घनाक्षरी (31 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,7*

*पदांत- एक गुरु (112)*

*सृजन शीर्षक- पुलकित मन है

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नमन वतन कर, अमिय हृदय भर, दुख जन-जन हर, पुलकित मन है।

सुरभित शुभ जग, परहित रख पग, मत कर डगमग, तन सच धन है।।

मधुर वचन कह, सहज सरल रह, दुख पल हँस सह, विरह अगन है।

धरम करम कर, मत बन विषधर,  प्रभु भय नित डर, तमस सघन है।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 22/11/2024


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*परिचय-- जनहरण घनाक्षरी (31 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,7*

*पदांत- एक गुरु (112)*

*सृजन शीर्षक- नव रस बरसे

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प्रियवर कविवर, सुख प्रतिपल भर, हृदय पटल पर, नव रस बरसे।

प्रबल प्रवण बन, बरस घनन घन, नम रख चितवन, जग जन हरसे।।

मन मधुरसमय, कर प्रभु अनुनय, भ्रम भय सब क्षय, शुभ गुण दरसे।

सघन तमस जग, रख सच पथ पग, भर दम रग-रग, मन मत तरसे।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 23/11/2024


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*परिचय-- जनहरण घनाक्षरी (31 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,7*

*पदांत- एक गुरु (112)*

*सृजन शीर्षक- बगियन महके।

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झिलमिल महफ़िल, अधर सुमन खिल, खग नभ सब मिल,  बगियन महके।

सजकर बनठन, पुलकित तन-मन, कुसुमित उपवन, चितवन चहके।।

सनन सनन सन, घनन घनन घन,  विरह अगन बन, निस-दिन दहके।

हृदय रुदन भर, चुप छुप प्रियवर,  दुखित द्रवित पर, दुख दिन सह के।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 23/11/2024


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*परिचय-- जनहरण घनाक्षरी (31 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,7*

*पदांत- एक गुरु (112)*

*सृजन शीर्षक- सच पथ चलना

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तजकर हर तम, मन रख नित नम, भय कर अब कम, सच पथ चलना।

गहन मनन कर, वचन सहज भर, पग भ्रम पथ धर, कर मत मलना।।

सफल सुफल मन, तन यह रख धन, मनुज चपल बन, प्रतिपल ढलना।

चख सुख श्रम फल, कर सुखमय कल, खुश रह हर पल, दुख मत पलना।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 10/12/2024

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*परिचय-- जनहरण घनाक्षरी (31 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,7*

*पदांत- एक गुरु (112)*

*सृजन शीर्षक- प्रमुदित रहिये।

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नवल सृजन कर, सुचित मनन भर, चल शुभ पथ धर, प्रमुदित रहिये।

महक सुमन बन, पुलकित रख मन, खुश रख जग जन, दुख मत सहिये।।

चमक कनक सम, नम बन हरदम, कम कर जग तम, सच मुख कहिये।

परहित रख पग, सुखमय कर जग, भर सुख रग-रग, जल बन बहिये।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 12/12/2024


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*परिचय-- जनहरण घनाक्षरी (31 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,7*

*पदांत- एक गुरु (112)*

*सृजन शीर्षक- प्रभु गुण जपना

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हृदय सुमन भर, मधुर वचन धर, सतत भजन कर, प्रभु गुण जपना।

उदित मुदित मन, सुखमय कर तन, परिहत सुख बन, रवि सम तपना।।

भय भ्रम तज चल, मत फँस कटु छल, चख श्रम फल कल, शुभ दिन अपना।

मनुज मनन कर, दुखद तमस हर, परिमल जग भर, रख सुख सपना।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 14/12/2024

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**************रूप घनाक्षरी*****************

*रूप घनाक्षरी* --

*विधान*   ---32 वर्ण, 16, 16 पर यति, अंत में गाल अर्थात गुरु-लघु, 'सभी सम पद' उत्तम, 'विषम-विषम-सम पद' उत्तम, 'सम-विषम-विषम पद' भी उत्तम, 'विषम-सम-विषम पद' वर्जित, चार तुकान्त चरण।

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*परिचय-- रूप घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- कहाँ छुपे मनमीत।

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गुमसुम रहते हैं, सब गम सहते हैं, कुछ नहीं कहते हैं, कहाँ छुपे मनमीत।

मन मेरा घबराये, चैन नहीं कहीं आये, कौंन मुझे समझाये, पल हुआ विपरीत।।

मीठी-मीठी बातें कर, प्रेम मेरे मन भर, प्रियवर दिलवर, दिल लिया तूने जीत।

साथ तेरा छूटे नहीं, आस कभी टूटे नहीं, प्रीत घड़ा फूटे नहीं, सजन निभाओ रीत।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 25/11/2024

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*परिचय-- रूप घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक-  मन भाया चितचोर

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सपने सजाये नैन, छीन लिया मेरा चैन, बीते नहीं अब रैन, मन भाया चितचोर।

कोयली की कूक-कूक, दिल में उठाये हूक, रुत कहे अभी रूक, प्रीत करो घनघोर।।  

राह तकूँ दिन रात, करने को मुलाकात, समझो मेरे जज्बात, कब से हूँ मैं विभोर।

अब नहीं रहा जाता, दिल मेरा घबराता, तरस क्यों नहीं आता, मन में मचा है शोर।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 26/11/2024

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*परिचय-- रूप घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- सुखी रहे परिवार

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कहें बात हैं सुजान, रखो शिक्षा पर ध्यान, यही दुख का निदान, सुखी रहे परिवार।

बेटी बेटा खूब पढ़े, देश का विकास गढ़े, कामयाबी नित चढ़े,  पाने हक अधिकार।।

संविधान से है मिला, बढ़ने का सिलसिला, मिट गये सब गिला, बहा सुख का है धार।

गजानंद आप हम, करें यत्न हरदम, बेटी बेटा दोनों सम, देना शिक्षा उपहार।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 26/11/2024

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*परिचय-- रूप घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- रसना जपले राम

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हैं तारनहार प्रभु, साँसा का आधार प्रभु, करेंगे उद्धार प्रभु, रसना जप ले राम।

सुख शांति सब मिले, मीत प्रीत फूल खिले, मिट जाये सब गिले, चरणों में चारो धाम।।

जिनके कृपा से प्यारे, होते नाव हैं किनारे, सभी दुख में पुकारे, उद्धारक प्रभु नाम।

प्रभु का शरण पाने, कष्ट अपने मिटाने, नाम जग में कमाने, करो सदा नेक काम।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 27/11/2024

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*परिचय-- रूप घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- बदला है परिवेश

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जात-पात भेदभाव, था समाज बिखराव, संविधान भरा घाव, बदला है परिवेश।

मानव- मानव एक, बन गए सभी नेक, मान पाये अतिरेक, मिटा अब द्वंद द्वेष।।

भीमराव की है देन, आज जेब में है पेन, चला रहें बस ट्रेन, लोग बने हैं विशेष।।

भीम गुणगान गाते, सब सुख रोटी खाते, हक अधिकार पाते,  मिट गए सब क्लेश।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 28/11/2024

*रात्रिकालीन अभ्यास -*


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*परिचय-- रूप घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- लोग सभी आज दंग

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जीत मेरे पग फेरे, डाले आगे पीछे डेरे, कामयाबी देख मेरे, लोग सभी आज दंग।

अपनों का साथ मिला, बढ़ा प्रीत सिलसिला, खुशियों का फूल खिला, भरा जीवन उमंग।।

अधरों पर मुस्कान, बन आन बान शान, सदा ही बढ़ाते मान, भर रहें सुख रंग।

गजानंद स्वाभिमान, पहचान है ईमान, चाहे भले जाए जान, जीतना है यह जंग।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 28/11/2024

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*परिचय-- रूप घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- आओ रचें नवगीत

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सबका जो दिल भाये, प्रेम नीर बरसाये, सुमति का भोर लाये, आओ रचें नवगीत।

उन्नति दिशा दिखाये, छाये तम को मिटाये, सबको गले लगाये, बन जायें सब मीत।।

द्वेष द्वंद्व त्याग चलें, दीप बन सब जलें, दुख में न हाथ मलें, जोड़ रखें सभी प्रीत।

नित अनुराग बढ़े, देश इतिहास गढ़े, प्रगति शिखर चढ़े, सबका लें मन जीत।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 29/11/2024

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*परिचय-- रूप घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- लेते रहिए संज्ञान

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देश में क्या चल रहा, कौन दुख जुल्म सहा, सुख कितने है ढहा, लेते रहिये संज्ञान।

किये कौन चाटुकारी, बन कवि दरबारी, माल खाये सरकारी, करें चलो पहचान।।

धर्म का अफीम खाये, लोग आज हैं बौराये, राम राज कैसे लायें, पूछ रहा हिंदुस्तान।

गजानन्द पूछे अब, भेदभाव मिटे कब, ऊँच नीच में तो जब, है बटा हुआ इंसान।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 29/11/2024

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*परिचय-- रूप घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- जीवन के दिन चार।

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सदा सच बात कहो, अत्याचार नहीं सहो, गाते मुस्कुराते रहो, जीवन के दिन चार।

मानवता पाठ पढ़ो, नव इतिहास गढ़ो, कामयाबी पथ बढ़ो, पाओ खुशियाँ बहार।

दुखियों का दुख हरो, द्वेष द्वंद्व घाव भरो, नित नेक कर्म करो, चुका साँसों का उधार।

रखो खुद में विश्वास, वाणी में भरो मिठास, लोग बन जाये खास, त्यागें सभी तकरार।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 30/11/2024

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*परिचय-- रूप घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- मन भरो अनुराग

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शिव सदा हो सहाय, घट-घट में समाय, भक्ति धुनि हूँ रमाय, मिट जाये दुख दाग।

जीवन सुखद करो, हर तम त्रास हरो, नैन नेह नीर भरो, करूँ लोभ मोह त्याग।।

मिट जाये काली रात, शुभकर करो प्रात, करूँ कर्म शुरुआत, शिव नाम जपूँ जाग।

सत पथ चलकर, प्रेम तप ढलकर, दीप सम जलकर, मन भरो अनुराग।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 16/12/2024

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*परिचय-- रूप घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

सृजन शब्द- *दया धर्म उपकार*

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मानवता पाठ पढ़ो, सत्य कर्म राह बढ़ो, सतत विकास गढ़ो, स्वच्छ रखो किरदार।

संत गुणी बात धरो, शांति सदा हिय भरो, दीन-दुखी सेवा करो, दया धर्म उपकार।।

ज्ञान से सम्मान मिले, खुशियों के फूल खिले, मिट जाये सब गिले, बाँटो प्रेम उपहार।

लोक हित कामना हो, नहीं दुख सामना हो, भावना में साधना हो, सुखमय हो संसार।।

✍🏻 इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 19/12/2024

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*परिचय-- रूप घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

सृजन शब्द- *एक कोख अवतार*

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ऊँच नीच भेदभाव, मानवता पर घाव, करे मन अलगाव, बढ़ता है तकरार।

जाति-पाति चलो छोड़, श्रेष्ठता रहे न होड़, नेक राह कर्म मोड़, बनो एक परिवार।।

मानव-मानव एक, द्वेष द्वंद्व देना फेक, सत्य का सुपंथ नेक, नित्य बाँटे जग प्यार।

करो ज्ञान गुणगान, देना सबको सम्मान, तन खून है समान, एक कोख अवतार।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/12/2024


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*꧁|| कृपाण घनाक्षरी (32 वर्ण) ||꧂*

विधान : प्रत्येक चरण में यति (8,8,8,8) आवश्यक। चरणांत में  21 (गुरु लघु) । प्रत्येक यति पर अन्त्यानुप्रास अनिवार्य होता है।

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*परिचय-- कृपाण घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- युद्ध हुआ घमासान।

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हाथ थामे तलवार, होके घोड़े में सवार, लक्ष्मीबाई ललकार, किये खड़े हो मैदान।

रानी भृकुटि को तानी, बन के वह मर्दानी, जंग लड़ने को ठानी, युद्ध हुआ घमासान।।

काँपे गोरे थरथर, देख भागे डरकर, युद्ध लड़े भयंकर, रानी हो लहूलुहान।

आजादी के परवाने, स्वाभिमान को बचाने, शान देश का बढ़ाने, हो गई हँस कुर्बान।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 02/12/2024

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*परिचय-- कृपाण घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक-  नव प्रस्तारित छंद

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ज्ञान का साहिल रहा, मन मेरा खिल रहा, सीखने को मिल रहा, नव प्रस्तारित छंद।

मन का भ्रमर गाते, खुशी भर मँडराते, राह गुरु बतलाते, बनकर मकरंद।।

गुरु मिला है विद्वान, माने सबको समान, पाया मान पहचान, द्वार खुला मतिमंद।

छंदमय सरगम, भरने को शबनम, चल पड़ी है कलम, अब नहीं होगी बंद।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 04/12/2024


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*परिचय-- कृपाण घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- रणांगण में है वीर

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बाजुओं में जोश भरे, दुश्मनों से नहीं डरे, फिक्र नहीं मौत करे, रणांगन में है वीर।

स्वाभिमान व शान को, अपने पहचान को, बेचे नहीं ईमान को, रखते जिंदा जमीर।।

रक्षा करने देश को, बदले परिवेश को, करे काम विशेष को, होते सदैव अधीर।

करे देश का जतन, वीर पूत जो वतन, शत-शत है नमन, भर नैन प्रेम नीर।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 04/12/2024


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*परिचय-- कृपाण घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- शिक्षा दीक्षा समभाव 

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बेटी बेटा कहलाते, स्वर्ग घर को बनाते, खुशियों की भोर लाते, शिक्षा दीक्षा समभाव।

कभी नहीं भेद करो, मन नहीं छेद करो, भ्रम का कुरेद करो, रखो बेटी से लगाव।।

बेटी से है मान शान, बेटी भी है स्वाभिमान, ग्रन्थ करे गुणगान, भरती है दुख घाव।

सुख की है फुलवारी, प्रेममयी मनुहारी, निभाती है जिम्मेदारी, रखे नहीं जो दुराव।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 04/12/2024


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*परिचय-- कृपाण घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- अपने परमवीर

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रखते सीना फौलादी, मार भगाते उन्मादी, देते खुशियाँ आजादी, अपने परमवीर।

हौसला कभी न घटे, दिखे सीमा पर डटे, राष्ट्रगान मुख रटे, सह धूप जाड़ पीर।।

खून में भरा उबाल, बन मातृभूमि लाल, रखे देश को संभाल, थाम हाथ शमशीर।

ओढ़े जो बसंती चोला, थामते बारूद गोला, धधके मन में शोला, देते दुश्मन को चीर।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 05/12/2024


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*परिचय-- कृपाण घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- बेटी प्रभु उपहार

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आँगन की किलकारी, खुशियों की फुलवारी, प्रेम बाँटे मनुहारी, बेटी प्रभु उपहार।

लाड़ली माँ बाप की, पुष्प प्रभु जाप की, स्तुति है संताप की, रखो याद उपकार।

सहती है दुख धूप, जिसके हैं कई रूप, कर्म करते अनूप, करने जग उद्धार।

बेटी पढ़े आगे बढ़े, उन्नति शिखर चढ़े, नव इतिहास गढ़े, नमन करे संसार।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 05/12/2024


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*परिचय-- कृपाण घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- करना ही है संघर्ष 

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प्रेम भावना से जुड़, जाये मीत न बिछुड़, देखो मत पीछे मुड़, करना ही है संघर्ष।

तार्किक विचार भरें, उलाहना से न डरें, सत्य की परख करें, तब पहुँचे निष्कर्ष।।

छोड़ें व्यसन बुराई, राह चुन लें भलाई, कर लें कर्म कमाई, भर मन में लें हर्ष।

नम्र रखें व्यवहार, करें सदा उपकार, रहे सुखद संसार, तम मिटा लें अमर्ष।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 06/12/2024


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*परिचय-- कृपाण घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- प्रभु पग में विश्राम 

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ज्ञान का खजाना पाया, नेह का मिला है छाया, कष्ट अपना मिटाया, प्रभु पग में विश्राम।

भाव मिली है सच्चाई, दीन-दुखी की भलाई, सत्य राह सुखदाई, सुख का मिला है धाम।।

प्रभु कृपा है अगोचर, लगा मुझे है सरोवर, जिसे माना हूँ धरोहर, पाया पहचान नाम।

बुद्धि का विकास हुआ, नित्य नव आस हुआ, हृदय सुहास हुआ, पाँव बढ़ा हित काम।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 06/12/2024


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*परिचय-- कृपाण घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- छोड़ मत जाना श्याम*

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कान्हा मदन मुरारी, कृष्ण बन बनवारी, किये रास मनुहारी, सुनो वृंदावन धाम।

माखन मटका फोड़े, राधा रानी को न छोड़े, साथ प्रीत डोर जोड़े, हाथों में तो हाथ थाम।।

बैठ कदम के डाल, रहे धेनु को संभाल, हुए गोप हैं निहाल, जप नाम घनश्याम।

पाप का संहार किये, धर्म का उद्धार किये, जग बेड़ापार किये, कर नेक सदा काम।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 07/12/2024


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*परिचय-- कृपाण घनाक्षरी (32 वर्ण)*

*यति-- 8,8,8,8*

*पदांत- गुरु लघु (21)*

*सृजन शीर्षक- घूँघट के पट खोल

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करने दीदार तेरा, किया इंतजार तेरा, पाऊँ मनुहार तेरा, घूँघट के पट खोल।

सपनो की रानी तुम, करो न नदानी तुम, चाह दो निशानी तुम,  प्रेम रस देना घोल।।

दूर नहीं तुम जाना, पास मेरे जरा आना, छोड़ो सनम शर्माना, प्रीत भरी बात बोल।

छोड़ो अब तड़पाना, अपना हूँ तुझे माना, बैन बैठा हूँ दीवाना, पाने प्यार अनमोल।।

✍🏻 इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 07/12/2024

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*꧁|| किशोरी कलाधर घनाक्षरी ||꧂*

             【 नव प्रस्तारित 】

*वर्ण संख्या-- 31 वर्ण*

*गणावली---  8,8,8 रजग*

  *(रजगल,रजगल,रजगल,रजगल,रजग)*

*अंकावली-- 21-21-21-21,-21-21-21-21, 21-21-21-21, 21-21-21-2*

*विशेष-- प्रथम 8,8 पर अन्त्यानुप्रास आवश्यक*

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*सृजन शीर्षक--- प्रज्ञ शील  ही रहें 

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नित्य सत्य राह थाम, झूठ में लगे लगाम, हो विचार नेक काम, प्रज्ञ शील ही रहें।

बोल में रहे मिठास, नेह का मिले उजास, लोभ का रहे न वास, प्रेम शांति ही गहें।।

भाव हो सुखी सुराज, सभ्य सम्य हो समाज, फिक्र आज लोक लाज, बात लोग ये कहें।

वीरता रखे जवान, देश भक्ति आन बान, धैर्यता किये महान, द्वंद्व द्वेष को सहें।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 09/12/2024


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*परिचय-- किशोरी कलाधर घनाक्षरी (31वर्ण)*

*गणावली-- 8,8,8, रजग*

  *(रजगल, रजगल, रजगल, रजग)*

*अंकावली- 21-21-21-21, 21-21-21-21, 21-21-21-21, 21-21-21-2*

*सृजन शीर्षक- कर्म को विधान दे 

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कामना करो सुपंथ, ज्ञानवान प्रेम मंथ, है उवाच सर्व ग्रंथ, कर्म को विधान दे।

साधना सधे सुराज, भावना मिटे दुराज, पूर्ण हो समाज काज, बात लोग ध्यान दे।।

कर्म में करो सुधार, धर्म का सुनो पुकार, द्वेष वेश को उतार, दीन बंधु मान दे।

हो न झूठ का लिबास, मीत प्रीत हो विकास, आस आत्म में निवास, वर्द्धमान ज्ञान दे।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 10/12/2024


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*परिचय-- किशोरी कलाधर घनाक्षरी (31वर्ण)*

*गणावली-- 8,8,8, रजग*

  *(रजगल, रजगल, रजगल, रजग)*

*अंकावली- 21-21-21-21, 21-21-21-21, 21-21-21-21, 21-21-21-2*

*सृजन शीर्षक- आन बान शान हो 

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ईश को करूँ प्रणाम, कोटि-कोटि प्रात शाम, सिद्ध हो सभी सुकाम, भक्ति गीत गान हो।

द्वेष का मिटे दुराव, नेह का बढ़े लगाव, हो नहीं कभी तनाव, बात सत्य भान हो।।

छोड़ लोभ मोह क्रोध, हो पवित्र आत्मबोध, आत्मसात सत्यशोध, प्रेम रूप ज्ञान हो।

ज्ञान का करें विकास, शांति हो सदा निवास, भक्ति साधना उजास, आन बान शान हो।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/12/2024


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*परिचय-- किशोरी कलाधर घनाक्षरी (31वर्ण)*

*गणावली-- 8,8,8, रजग*

  *(रजगल, रजगल, रजगल, रजग)*

*अंकावली- 21-21-21-21, 21-21-21-21, 21-21-21-21, 21-21-21-2*

*सृजन शीर्षक- प्रेम ही विधान हो

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मीत बंध हो सुमीत, धैर्य से मिले सुजीत, साध आत्मबोध रीत, प्रेम ही विधान हो।

व्यर्थ छोड़ दो विलाप, झूठ का करो न जाप, सत्य का बढ़े प्रताप, ज्ञान का वितान हो।।

सर्वग्राह्य बात बोल, शब्द-शब्द है अमोल, भाव सार नाप तोल, शांति का विहान हो।

कर्म धर्म हो विचार, द्वेष द्वंद्व को नकार, लोभ भेष को उतार, कष्ट का निदान हो।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 12/12/2024


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*परिचय-- किशोरी कलाधर घनाक्षरी (31वर्ण)*

*गणावली-- 8,8,8, रजग*

  *(रजगल, रजगल, रजगल, रजग)*

*अंकावली- 21-21-21-21, 21-21-21-21, 21-21-21-21, 21-21-21-2*

*सृजन शीर्षक- सत्यता प्रकाश हो

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सींच नैन नेह नीर, अंत हो अनंत पीर, बाँध आत्म नित्य धीर, सत्यता प्रकाश हो।

थाम साँस आस डोर, है तभी सुपंथ भोर, सत्य राह हो निहोर, झूठ का विनाश हो।।

त्याग दो अहं विकार, प्रेम का बहे बयार, प्रीत का करो प्रसार, कर्म का तराश हो।

लोग हो सभी निरोग, सामना न हो वियोग, साधना करें प्रयोग, शांति की तलाश हो।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 12/12/2024

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*परिचय-- किशोरी कलाधर घनाक्षरी (31वर्ण)*

*गणावली-- 8,8,8, रजग*

  *(रजगल, रजगल, रजगल, रजग)*

*अंकावली- 21-21-21-21, 21-21-21-21, 21-21-21-21, 21-21-21-2*

सृजन शब्द- *सत्य साधना करो*

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लोभ में न हो अधीर, दीन- हीन साध पीर, नाशवान है शरीर,  सत्य साधना करो।

प्रेम का करो प्रकाश, शांति सादगी तलाश, हो घृणा यहाँ विनाश, झूठ से सदा डरो।।

कर्म को करो प्रधान, धीर साधना जुबान, शब्द ग्रन्थ है महान, पुण्य प्रार्थना भरो।

भावना रखें विशुद्ध, बुद्धि में सहाय बुद्ध, हो कभी न आत्म क्रुद्ध, ज्ञान संत का वरो।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 23/12/2024

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*परिचय-- किशोरी कलाधर घनाक्षरी (31वर्ण)*

*गणावली-- 8,8,8, रजग*

  *(रजगल, रजगल, रजगल, रजग)*

*अंकावली- 21-21-21-21, 21-21-21-21, 21-21-21-21, 21-21-21-2*

सृजन शब्द- *दिव्य ज्योति ज्ञान है*

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मेट रार अंधकार, जिंदगी सदा सुधार, प्रेम का करे प्रसार, दिव्य ज्योति ज्ञान है।

त्याग लोभ मोह क्रोध, साधना करो सुबोध, शांति का उपाय शोध, कष्ट का निदान है।।

शब्द मीत प्रीत रीत, शब्द मान हार जीत, शब्द आज है अतीत, शब्द ही प्रधान है।

ईश नाम नित्य जाप, नेक पंथ पाँव नाप, छोड़ भाग्य का अलाप, कर्म ही महान है।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 25/12/2024

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