*त्रिभंगी छंद*
विधान---
यह एक सम मात्रिक छंद है।
कुल 32 मात्रा |
10,8,8,6 पर यति चिन्ह |
शुरआत त्रिकल शब्द से न करें।
चरणान्त सदैव गुरु वर्ण। कुल चार चरण,
क्रमागत दो-दो चरणों में तुकांत सुमेलन |
पहली2 या3 यति पर तुकांत |
उदाहरण----
*श्री गणेश*
हे विघ्न विनाशक, खड़े उपासक, भाव मग्न है, बलवाना |
दर्शन अभिलाषी, बहु सुख भाषी, रिद्धि सिद्धि सह, आ जाना |
हम रहें समर्पित, तुमको अर्पित, दूर्वा कदली, फल मेवा |
बल बुद्धि प्रदाता, तुम हो ज्ञाता, प्रथम पूज्य हो, गण देवा |
||कामना पांडे||
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विधा- त्रिभंगी छंद
सृजन शब्द- *अभिलाषा*
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जीवन अर्पण को, प्रभु दर्शन को, है इस मन को, अभिलाषा।
महिमा प्रभु गाऊँ, शीश झुकाऊँ, यश सुख पाऊँ, है आशा।।
प्रभु पग सब वारूँ, प्रेम निहारूँ, नाम पुकारूँ, बन प्यासा।
तम दूर भगाओ, ज्योति जलाओ, राह दिखाओ, हिय वासा।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 01/01/2025
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विधा- त्रिभंगी छंद
सृजन शब्द- *निर्माता*
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मन करो उजाला, दीनदयाला, नाथ कृपाला, सुख दाता।
प्रभु शरण पड़ा हूँ, दीन खड़ा हूँ, बुद्धि जड़ा हूँ, रख नाता।।
हो सर्व प्रदाता, भाग्य विधाता, पिता व माता, हो भ्राता।
जग जीव चराचर, करते आदर, दिव्य दिवाकर, निर्माता।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 02/01/2025
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विधा- त्रिभंगी छंद
सृजन शब्द- *पुरवाई*
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अति पावन सुंदर, माह दिसंबर, नीले अंबर, सुखदाई।
पंछी चहके हैं, मन बहके हैं, वन लहके हैं, पुरवाई।।
कोयल मतवाली, काली-काली, झूमे डाली, शरमाई।
मन मीत मिले हैं, प्रीत खिले हैं, मिटे गिले हैं, रुसवाई।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 04/01/2025
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विधा- त्रिभंगी छंद
सृजन शब्द- *आभारी*
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सुख शांति प्रदाता, जीवन दाता, भाग्य विधाता, अवतारी।
भव पार करो प्रभु, कष्ट हरो प्रभु, ध्यान धरो प्रभु, हितकारी।।
नित शीश झुकाऊँ, हृदय बसाऊँ, तुम्हें मनाऊँ, सब वारी।
प्रभु बनो सहारा, नाव किनारा, करो हमारा, आभारी।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 07/01/2025
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विधा- त्रिभंगी छंद
सृजन शब्द- वरदानी
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दर्शन दे जाओ, प्रभुवर आओ, सुख बरसाओ, वरदानी।
अर्पित कर तन मन, प्रभु यह जीवन, जड़मति हूँ बन, अज्ञानी।।
प्रभु झूठ कहूँ मत, कष्ट सहूँ मत, कभी रहूँ मत, अभिमानी।
मन प्रेम दया भर, सदा कृपा कर, दो सुखमय वर, पहचानी।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 08/01/2025
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विधा- त्रिभंगी छंद
सृजन शब्द- *वनमाली*
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मेरे जीवन का, मन उपवन का, प्रभु जी तुम ही, वनमाली।
नित प्रेम सुधा भर, दृष्टि दया कर, देना मुझको, खुशहाली।।
मेरे दामन को, सुख आँगन को, कभी न करना, तुम खाली।
प्रभु भक्ति प्रार्थना, करूँ कामना, मुझे थामना, बन डाली।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 08/012025
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विधा- त्रिभंगी छंद
सृजन शब्द- *पानी*
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जग प्यास बुझाती, प्राण बचाती, सुधा कहाती, है पानी।
मत व्यर्थ बहायें, इसे बचायें, कदम बढायें, प्रण ठानी।।
जल स्रोत बढ़ाओ, सब मिल आओ, पेड़ लगाओ, बन ज्ञानी।
है जल ही जीवन, महके उपवन, स्वारथ तज मन, मनमानी।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 09/01/2025
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विधा- त्रिभंगी छंद
सृजन शब्द- *अपनाना*
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प्रभु अपने पग में, हर रग- रग में, भक्ति बसाकर, अपनाना।
तुम दीन- दयाला, सिंधु- कृपाला, तुमको अपना, सब माना।।
सब जीव चराचर, करते आदर, सबको देते, तुम दाना।
जग दुख हर लेना, सुख भर देना, गायें मंगल, मिल गाना।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 10/01/2025

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