गुरुवार, 29 फ़रवरी 2024

चौपाई छंद- आधार सममात्रिक छंद

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*दिनांक -- 26/02/2024*

*दिन -- सोमवार*

*आधार छंद-- चौपाई सममात्रिक*

*लक्षण- मापनी मुक्त

*परिचय-- संस्कारी वर्ग भेद (1597)*

*पदांत-- चौकल*

*सृजन शब्द-- मस्तानों की आई टोली (5 युग्म)*

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मस्तानों की आई टोली। खेलें मिलकर आओ होली।

करते हँसी मजाक ठिठोली। संग भांग की गटको गोली।।


रंग गुलाल अबीर उड़ाओ। गीत फगुनवा मितवा गाओ।

छोड़ो द्वेष गले मिल जाओ। हँसी खुशी यह पर्व मनाओ।।


हाथों में थामे पिचकारी। होली रंग लगे मनुहारी।

ढोल नगाड़ा लगे सुहावन। ऋतु बसंत पावन मनभावन।।


आम पलास सुगंध सुहाई। कोयल मीठी गीत सुनाई।

बन दुल्हन सरसों शरमाई। मादकता महुए में छाई।।


भ्रमर करे गूँजन फूलों पर। रौनक आई है झूलों पर।

स्वर्ग समान लगी है धरती। खुशियाँ ले अठखेली करती।।

🖊️इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 26/02/2024

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*आधार छंद-- चौपाई सममात्रिक*

*सृजन शब्द-- मैं चातक हूँ चंद्र चकोरी, (5 युग्म)*

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मैं चातक हूँ चंद्र चकोरी। रात अमावस है घनघोरी।

प्रीत मिलन की बाँधो डोरी। आया मिलने चोरी-चोरी।।


कृष्ण बिना राधा है आधा। वही प्रीत मैंने भी साधा।

नीर बिना है मीन अधूरा। पर तुम करना चाहत पूरा।।


पात बिना है सूखी डाली। फूल बिना है निर्झर माली।

मंद बयार कली मुरझाई। विरह वेदना आग लगाई।।


सूरदास रसखान कहे हैं। मीरा भी प्रभु पीर सहे हैं।

प्रीत सदा मन की गहराई, जाति-पाति जिसमें न समाई।।


प्रेम सदा सुख जीवन दरिया। भींगे जिसमें हॄदय चुनरिया।

प्रेम नाव चढ़ पार करो भव। अनुगामी पथ सृजन करो नव।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 26/02/2024

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*आधार छंद-- चौपाई सममात्रिक*

*सृजन शब्द-- आया फागुन लेकर होली (5 युग्म)*

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आया फागुन लेकर होली। मस्ती में झूमें हैं टोली।

खुशियों से भर दें हम झोली। खेलें होली मिल हमजोली।।


प्रीत रंग भरना पिचकारी। रंग गुलाल लगे मनुहारी।

माथ सजा लो कुमकुम रोली। बुरा न मानों खेलो होली।।


भांग नशा में ढोल नगाड़ा। राग रौब फागुन में झाड़ा।

शंख मृदंग करे ता-थैया। गीत फगुनवा लिए बलैया।।


ऋतु बसंत खुशियाँ में झूमे। हरियाली की राहें चूमे।

अमराई में रौनक छाई। आम्र बौर भी है बौराई।।


सभी तरफ है मस्त नजारें। आओ गायें गीत बहारें।

लेना जगा उमंग जवानी। रखे रगों में नित्य रवानी।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 27/02/2024

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*आधार छंद-- चौपाई सममात्रिक*

*सृजन शब्द--शोभित घर आँगन सुखदाई। (5 युग्म)*

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शोभित घर आँगन सुखदाई। कृपा सदा हो प्रभु रघुराई।

भरे रहे घर शांति खजाना। सुख-दुख सब मिल साथ निभाना।।


पावन पूजित तुलसी चौंरा। करे सदा गूँजन सुख भौंरा।

पड़े कभी मत दुख परछाई। सुख जीवन की करूँ दुहाई।।


रीति-नीति संस्कार बचाना। धर्म कर्म का फर्ज निभाना।

संस्कारित हो बच्चा-बच्चा। रहें सभी हम दिल से सच्चा।।


पूज्य सदा माँ-बाप चरण हो। जिनके पावन कथन वरण हो।

माँ की ममता का हो साया। कभी लुभाये मत मद माया।।


घर की लक्ष्मी बेटी जानों। कभी पराया धन मत मानों।

बेटी दो कुल फर्ज निभाती। कष्टों से परिवार बचाती।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 27/02/2024

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*आधार छंद-- चौपाई सममात्रिक*

*सृजन शब्द-फूलों जैसा रूप सुहाना (5 युग्म)*

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फूलों जैसा रूप सुहाना। दिल में भर दो प्रीत तराना।

साथी मेरे साथ निभाना। समझ पराया भूल न जाना।।


तुमसे ही रौनक जीवन में। तुम ही तुम हो अंतर्मन में।

बन राँझा मैं हीर बना लूँ। तुमको अपना पीर बना लूँ।।


बन बैठा हूँ प्रेम पुजारी। दिल में है तस्वीर तुम्हारी।

लगन लगी है तुमसे ज्यादा। साथ निभाने का है वादा।।


जुल्फों का दो छाँव घनेरी। करो प्रिये मत तुम तो देरी।

चाहत का बरसात करो तुम। प्रीत भरी नित बात करो तुम।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 28/02/2024

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*आधार छंद-- चौपाई सममात्रिक*

*सृजन शब्द--  जीवन धारा बहती जाये।(3 युग्म)

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जीवन धारा बहती जाये। सीख उतार चढ़ाव सिखाये।

थाम हौसला आगे बढ़ना। शिखर सफलता का है चढ़ना।।


अहं कभी मन में न समाये। सत्य राह पग बढ़ते जाये।

धीर रखें हम कठिनाई में। ध्यान लगायें चतुराई में।।


कभी किसी का दिल न दुखाना। दीन-दुखी को गले लगाना।

सहज सरल व्यवहार रखें हम। पर सेवा उपकार रखें हम।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 29/02/2024

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*आधार छंद-- चौपाई सममात्रिक*

*सृजन शब्द-- सबमें प्रेम दया करुणा हो ।(3 युग्म)*

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सबमें प्रेम दया करुणा हो। जीवन पथ में सुख अरुणा हो।

भाव भरें जग भाईचारा। बनकर रहना मीत सहारा।।


कर्म बिना है धर्म अधूरा। संस्कारी बन करना पूरा।

ढोंग रूढ़ि को दें न बढ़ावा। मन मंदिर हो भक्ति चढ़ावा।।


दायित्वों का बोध करें हम। विश्व बन्धुता शोध करें हम।

लक्ष्य साधना सच्चाई का। राह थामना अच्छाई का।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 01/03/2024

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*आधार छंद-- चौपाई सममात्रिक*

*सृजन शब्द-- नमन योग्य है विकसित भारत (5 युग्म)*

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नमन योग्य है विकसित भारत। करते हैं हम निस दिन स्वागत।

धन्य धरा जिसमें खुशहाली। आच्छादित है वन हरियाली।।


सीमा पर हैं वीर सिपाही, शक्ति चक्र का स्वयं गवाही।

देश भक्ति का फर्ज निभाने। दुश्मन को निज धूल चटाने।।


देश विकास शिखर चढ़ने को। विश्व पटल पर नित बढ़ने को।

सक्षम साहस हमनें साधा। जीत लिए हैं विपदा बाधा।।


थाम एकता की हम राहें। विश्व बन्धुता समता चाहें।

जाति-धर्म का भेद मिटायें। लोकतन्त्र में साथ निभायें।।


सबको सम सम्मान दिलाना। अधरों पर मुस्कान खिलाना।

सबमें शुभ संस्कार भरा है। रीति-नीति पथ परंपरा है।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 02/03/2024

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*आधार छंद-- चौपाई सममात्रिक*

*सृजन शब्द-- चाँद चुराके ले आऊँगा ।(3युग्म)

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चाँद चुराके ले आऊँगा। चैन तभी तो मैं पाउँगा।

दुल्हन तुमको माना अपना। पूरा कर दो मेरा सपना।।


सांसो में तुम धड़कन बनकर। तड़पाती हो तड़पन बनकर।

जीने का अरमान बना लूँ। तुमको अपना जान बना लूँ।।


बजती जब पाँवों की पायल। कर जाती है मुझको घायल।

चूड़ी की तो खनखन बोली। इस दिल में है दागे गोली।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 02/03/2024

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चौपाई छंद- *गुरु चालीसा*

दोहा- 

करता हूँ गुरु वंदना, होकर मैं मतिमंद।

गजानंद गुरु भावना, लिख चौपाई छंद।।

चौपाई- 

गुरु ही दीपक ज्ञान उजाला। गुरु ही मंदिर देव शिवाला।।

गुरु ही भक्ति भाव है पूजा। गुरु से कोई बड़ा न दूजा।।


तीन लोक गाये गुरु महिमा। गुरु से ही है शिक्षा गरिमा।।

गुरु ही इज्जत मान बढ़ाये। नित्य सफलता शिखर चढ़ाये।।


चाक कुम्हार समान गढ़े मन। गुरु कहलाते पहिया जीवन।।

मूढ़ गूढ़ उद्धार किये हैं। भवसागर से पार किये हैं।।


छाँव कृपा गुरु जिसने पाया। जीवन उसने सफल बनाया।।

धर्म कर्म गुरु मर्म बताते। सदा सत्य का पाठ पढ़ाते।।


गुरु ही असली देव सही है। *जग का सृष्टि विशेष यही है।।*

देव रूप को किसने देखा, गुरु ही कर्म बनाते लेखा।।


गुरु गुण सूर्य समान प्रखर है। बसा रखो गुरु नाम अजर है।।

गुरु जग में पहचान दिलाते। इसी धरा पर स्वर्ग दिखाते।।


गुरु की वचन न जाये खाली। जीवन बगिया की गुरु माली।।

फूल समान हमें महकाते। ज्ञान सुधा रस मन भर जाते।।


गुरु कबीर रैदास हुये हैं। सच्चाई विश्वास कहाये।

गुरु नानक सत पंथ चलाया। सतगुरु घासीदास कहाया।।


गुरु ही मथुरा गुरु ही काशी। गुरु का ज्ञान सदा अविनाशी।।

रखो आत्म को गुरु की दासी। बंधन छूटे लख चौरासी।।


गुरु ही प्रेम दया का सागर। गुरु ही ज्ञान गुणों का गागर।।

गुरु ही बहती गंगा धारा। गुरु ने भव से सबको तारा।।


गुरु वाणी रसपान करो सब। जीवन में सुख शांति भरो सब।।

चरण कमल रज कर लो सेवा। कहते ऋषि मुनि गुरु है देवा।।


गुरु ही सत्य सनातन शोधक। अहंकार अज्ञान निरोधक।।

सत्य पुंज गुरु सूरज जैसे। गुरु उपकार चुकायें कैसे।।


गुरु की कृपा स्वर्ग की सीढ़ी। तर जाये पीढ़ी दर पीढ़ी।।

गुरु गुण गाते कीट पतंगा। गुरुवर करते तन मन चंगा।।


माता-पिता प्रथम गुरु मानों। आदर गुरु का करना जानों।।

गुरु ही सभ्य समाज बनाये। नेक भलाई राह सुझाये।।


कीचड़ में गुरु फूल खिलाते। खुशियों की गुरु सेज सजाते।।

मर्यादा की सीख सिखाते। गुरु अटूट हो वचन निभाते।।


गुरु ही जग का भाग्य विधाता। गुरु से कोई बड़ा न दाता।।

गुरु शिक्षा संस्कार दिये हैं। मानवता कल्याण किये हैं।।


गुरु समाज का असली दर्पण। गुरु सेवा में जीवन अर्पण।।

शिष्य सदा हो गुरु बलिहारी। महकाने जीवन फुलवारी।।


वेद पुराण कहे गुरु ज्ञानी। रखो सुरक्षित कर्म निशानी।।

कर्म गढ़ो गुरु से ले शिक्षा। बदले में देना गुरु दीक्षा।।


सफल मनोरथ पूर्ण करे गुरु। मन में खुशियाँ नेह भरे गुरु।।

जीव चराचर सुन लो प्राणी। भूल नहीं जाना गुरु वाणी।।


लौह बनाते गुरु ही कुंदन, भरे विचार सदा ही कंचन।।

पेड़ बबूल बनाये चंदन। करे गजानन गुरु पग वंदन।।

दोहा- 

गुरुवर ज्ञान अथाह है, कैसे करूँ बखान।

शब्द स्याह भी कम पड़े, करने गुरु गुणगान।।

🔻स्वरचित मौलिक अप्रकाशित🔻

---✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/07/2024








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