*सुदर्शना विषम मात्रिक छंद--- नवीन प्रस्तारित*
यह षष्ठपदी कुल 148 मात्रा का विषम मात्रिक छन्द है, जो सोरठा और पारधी छन्द के मिलने से बनता है। सोरठा छंद की शुरुआत भगण युक्त (211) शब्द से करना अनिवार्य है। इसमें सर्वप्रथम एक सोरठा तथा इसी सोरठा के चौथे चरण से पारधी सममात्रिक का प्रथम चरण लिखते हैं। पाँचवीं पंक्ति पर सृजनकर्ता अपना नाम या उपनाम रख सकता है।
(1) सोरठा- अर्ध सममात्रिक , द्विपदी, कुल मात्रा 48, यति -11,13 चार चरण, पदांत- 12 या 111, प्रथम एवं तृतीय चरण में समतुकांत आवशयक ।
(2) पारधी-- सममात्रिक, 25 मात्रा यति- 13,12 पदांत - भगण (211), चार चरण, प्रति दो पंक्ति समतुकांत,
तेवर है विकराल, लगती नागिन कैकयी।
बिखरे बिखरे बाल, देवों का षड्यंत्र यह।।
देवों का षड्यंत्र यह, लगता नहीं अकारण।
राम जन्म का हेतु ही, है लंकापति रावण।।
राजा दसरथ दंग हैं, उतरा है क्यों जेवर।
घटित हुआ क्या बोलिए, क्यों बदले हैं तेवर।।
दर्पण कहता सत्य, झूठ इसे भाता नहीं।
बीते बार्हस्पत्य, निष्ठापूर्वक है अटल।।
निष्ठापूर्वक है अटल, करता सत्य उजागर।
भेद कभी करता नहीं, सागर हो या गागर।।
ननकी बन अंतर्मुखी, हरि पद कर भावार्पण।
दर्शन हो निज दोष का, झाँक अरे मन दर्पण।।
*-- डॉ रामनाथ साहू 'ननकी'*
*छंदाचार्य, बिलास छंद महालय*
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*आधार छंद-- सुदर्शना विषम मात्रिक*
*कुल मात्रा-- 148*
*परिचय-- षष्ठपदी*
*सूत्र-- सुदर्शना= सोरठा + पारधी*
*सृजन शीर्षक-- स्वागत(1 युग्म)*
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स्वागत है प्रभु राम, कुटिया दीन गरीब की।
मन मंदिर में धाम, रखा बसाकर आपको।।
रखा बसाकर आपको, हुई हृदय में आहट।
बिना भक्ति इंसान सुन, खुले नहीं मन का पट।।
बन जाऊँ प्रभु दास मैं, पावन पग को पाकर।
कर लूँ जीवन धन्य यह, राम नाम को गाकर।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/05/2024
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*आधार छंद-- सुदर्शना विषम मात्रिक*
*सृजन शीर्षक-- मौसम (1 युग्म)*
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मौसम सदाबहार, साजन तुम खोना नहीं।
आओ कर लो प्यार, शरमाना तुम छोड़ दो।।
शरमाना तुम छोड़ दो, समझो मेरी चाहत।
हुआ बहुत बैचैन दिल, अब तो दे दो राहत।।
बिना आपके जान लो, यह जीवन है दुर्गम।
सुन लो प्रेम पुकार को, बोले दिल का मौसम।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 22/05/2024
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*आधार छंद-- सुदर्शना विषम मात्रिक*
*सृजन शीर्षक-- नायक (1 युग्म)*
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जन-जन को दे प्यार, रहकर हृदय करीब जो।
सहज सरल व्यवहार, जन नायक में चाहिये।।
जन नायक में चाहिये, दुख का करे निवारण।
सत्ता सुख से हो परे, करता जो सच धारण।
अपने शासन काल में, कर दे अर्पित तन-मन।
गजानंद सच बोलता, नायक है वह जन-जन।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 22/05/2024
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*आधार छंद-- सुदर्शना विषम मात्रिक*
*सृजन शीर्षक-- पायल (1युग्म)*
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पायल की आवाज, घायल मुझको कर गई।
मेरे दिल पर राज, तेरे नैनों ने किया।।
तेरे नैनों ने किया, मुझसे छुप-छुप चाहत।
तब से मैं बेचैन हूँ, कौन दिलाये राहत।।
बिंदी चमके माथ पर, देख हुआ मैं कायल।
गजानंद की नींद भी, गई चुरा ले पायल।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 23/05/2024
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*आधार छंद-- सुदर्शना विषम मात्रिक*
*सृजन शीर्षक-- मोहित (1 युग्म)*
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मोहित करते नैन, दिल में मेरे बस गये।
लूट लिया है चैन, अधरों की मुस्कान ने।।
अधरों की मुस्कान ने, रंग भरा मनभावन।
माना खुद को धन्य मैं, पाकर प्रीत सुहावन।।
गजानंद जी ध्यान दो, कहते बात पुरोहित।
ले लो फेरे सात तुम, सजनी को कर मोहित।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 24/05/2024
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*आधार छंद-- सुदर्शना विषम मात्रिक*
*सृजन शीर्षक-- बोधक (2 युग्म)*
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बोधक करता ज्ञान, जीवन सुख परमार्थ का।
मिलती है पहचान, शिक्षा से इंसान को।।
शिक्षा से इंसान को, सभी जगह है आदर।
शिक्षा से संस्कार को, नमन करूँ मैं सादर।।
गजानंद रख ध्यान नित, बनो सत्य का शोधक।
ताकि सभी को हो सके, मानवता का बोधक।।
---🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 25/05/2024

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