अदोष
गणावली-- मयलल अंकावली-- SSS-ISS-II
छाया जिंदगी में डर। सोचें आज हैं बेघर।
जीते बेबसी का दिन। हो लाचार रातें गिन।।
त्यागो माँ-पिता को मत। जाओ भूल बातें गत।
सेवा भाव साधें हम। जीते जी नहीं दें गम।।-1
अदोह
गणावली-- ययलल, अंकावली-- ISS-ISS-II
उठाना गिरे को तुम। न सेवा कभी हो गुम।
रखो नीर नैनों पर। चलो राह नेकी कर।।
झुका दो नदी अंबर। भरो भावना अंदर।
अहं को तजो मानव। तभी पार होगा भव।।-2
अद्ग
गणावली-- रयलल, अंकावली-- SIS-ISS-II
छोड़ मोह काया धन। नेह भाव जोड़ों मन।
राम नाम लेना भज। द्वेष द्वंद देना तज।।
नित्य सत्य वाणी कह। मेघ नीर जैसे बह।
दीन दान दाता बन। प्रीत पीर ज्ञाता बन।।-3
अद्धा
गणावली-- सयलल, अंकावली-- IIS-ISS-II
अपमान से तू डर। दरिया दया का भर।
सपना चकोरी बन। रखना सुहाना मन।।
रख सोच को निर्मल। तम ताम छोड़ो छल।
पग हो पिता वंदन। कृत मातृ है चंदन।।-4
अद्भुत
गणावली-- तयलल, अंकावली-- SSI-ISS-II
छाया दुख का है पल। आओ हम खोजें हल।
जोड़ो मन छोड़ो तम। मैं से बन जाना हम।।
बोलो सच पाओ सुख। शोभा यह देता मुख।
हो वंदन ज्ञानी पग। संताप मिटा दो जग।।-5
----- इंजी. गजानंद पात्रे 'सत्यबोध'
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(अनाश्वस)- सयतग अंकावली- IIS-ISS-SSI-S
प्रभु नाम को ही गाया करो। मन में उमंगे आशा भरो।
दुख में वही तो साथी बना। सुख छाँव भी वो देता घना।।
कल आज की चिंता छोड़ दो। खुद को दुआओं से जोड़ दो।
रखना बनाये विश्वास को। हरता सदा वो संत्रास को।।-6
(अनास्या)- तयतग अंकावली- SSI-ISS-SSI-S
है मातु पिता से संसार भी। ये जन्म उन्हीं से उद्धार भी।
लो जान दुखों को पीड़ा हरो। ये मंदिर देवा सेवा करो।।
है कृष्ण यही गीता सार है। ये ग्रंथ हमारा आधार है।
है चर्च कुरानें मानो इन्हें। वाणी गुरु वाहे जानो इन्हें।।-7
(अनाहत)- जयतग अंकावली- ISI-ISS-SSI-S
न लोभ रखो बाँटो प्यार को। न द्वेष करो पाटो रार को।
कड़ी मत टूटे संबंध का। करो न भरोसा सौगंध का।।
फिरो मत क्रोधी कामी बने। बढ़ा पग औरों को थामने।
न व्यर्थ करो साँसों की घड़ी। रखे चलना उम्मीदें बड़ी।।-8
(अनाश्रमिन)- ययतग अंकावली- ISS-ISS-SSI-S
बना प्रेम दासी चाहा तुझे। मिले प्यार तेरा साथी मुझे।
जुड़े प्रीत धागा टूटे नहीं। कभी साथ तेरा छूटे नहीं।।
जुदा एक दूजे होंगे नहीं। भले दे जमाना जुल्में यहीं।
लगा लो गले से आ पास में। खड़ा हूँ इसी मैं विश्वास में।।-9
(अनाश्रव)- रयतग अंकावली- SIS-ISS-SSI-S
छोड़ साथ मेरा जाओ जहाँ। याद भी तुझे आऊँगा वहाँ।
बावरा जमाना बोले मुझे। फर्क क्यों नहीं होता है तुझे।।
साँस में बसाया पूजा किया। दर्द के सिवा तूने क्या दिया।
वक्त आखिरी ले जाओ दुआ। भूल मैं गया यारों क्या हुआ।।-10
----- इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
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पक्ती --(दशाक्षरावृति- 1024)
(अन्तभौम)- तरसल अंकावली- SSI-SIS-IIS-I
माता पिता बड़ा भगवान। देते हमें सदा वरदान।
ज्ञानी बना दिया गुरु ज्ञान। इंसान को दिया पहचान।।
चाहा सुखी रहो दिन रात। तेरे लिए सहा दुख घात।
भूलो नहीं कृपा उपकार। सेवा करो मिले सुख सार।।-11
(अंतमनस्)- जरसल अंकावली- ISI-SIS-IIS-I
मिले कृपा मुझे अविराम। जपा करूँ सदा प्रभु नाम।
करूँ घृणा बुरा प्रतिकार। सुखी रहे सभी परिवार।।
रखूँ नहीं कभी प्रतिशोध। मिटे हिया अहं भ्रम क्रोध।
चला करूँ रखे मन शुद्ध। रहूँ बने उपासक बुद्ध।।-12
(अंतमृत)- भरसल अंकावली- SII-SIS-IIS-I
छोड़ चलो बुरा सब काम। करे हमें यही बदनाम।
कर्म दिए सदा पहचान। सत्य रखो स्वयं प्रतिमान।।
सोच रखो करें शुभ काज। साज रखो खुशी सिर ताज।
कष्ट मिटे मिले सुख सार। शीश झुका चलो प्रभु द्वार।।-13
(अंतयाम)- नरसल अंकावली- III-SIS-IIS-I
पग बढ़ा चलो सच थाम। तब मिला यहाँ पद नाम।
नम बनो रखो मन धीर। हर चलो दुखी जन पीर।।
श्रम बड़ा कहे सब लोग। भ्रम कभी बने मत रोग।
मत करो कभी अभिमान। वरण हो दया परिधान।।-14
(अंतलीन)- मससल अंकावली- SSS-IIS-IIS-I
आया मौसम है मधुमास। आओ पास करूँ पल खास।
दे दूँ प्रीत तुम्हें पहचान। मेरी हो तुम तो दिल जान।।
जाना छोड़ नहीं तुम साथ। आओ थाम रखूँ अब हाथ।
तेरा प्यार बना पतवार। साथी साथ मिले हर बार।।-15
(अंतवंश)- यससल अंकावली- ISS-IIS-IIS-I
करो चाहत की बरसात। मुलाकात हुई इस रात।
झुकाओ नैन नहीं दिलदार। मिला लो दिल से दिल तार॥
किया प्यार तुम्हें रख चाह। चलो साथ बने हमराह।
रखूँ चाह रहो तुम साथ। सदा थाम रखो तुम हाथ।।-16
(अंतवंशिक)- रससल अंकावली- SIS-IIS-IIS-I
तोड़ दो भ्रम का तुम फाँस। है मिला पल दो पल साँस।
बाँट लो मन का हर बात। पा सको तकलीफ निजात।।
साथ साथ करो उपकार। कर्म धर्म बना सुख सार।
छोड़ क्रोध बनो तुम धीर। दीन हीन समझो पर पीर।।-17
(अंतवासिक)- सससल अंकावली- IIS-IIS-IIS-I
करना सच का पहचान। रखना मन में गुरु ज्ञान।
रहना मद में मत चूर। बनता कटुता भरपूर।।
बनना सबका मनमीत। तुम बाँट चलो जग प्रीत।
तन का गहना रख साँच। भ्रम झूठ लगे मत आँच।।-18
(अन्तर्य)- रयतल अंकावली- SIS-ISS-SSI-I
आपसे लगाया मैंने दिल। जान लो हुआ जीना मुश्किल।
दर्द-ए-जुदाई पाऊँ कम। हो कभी न आँखे मेरी नम।।
दे दिया तुम्हें मैं जानो तन। पा लिया तुम्हारा मैंने मन।
स्वप्न्न को सजाना मेरा तुम। हो कभी न जाना साथी गुम।।-19
(अन्तर्हित)- सयतल अंकावली- IIS-ISS-SSI-I
तुमसे बना मेरा जीवन। रखना सँजोये ये बंधन।
प्रिय प्रीत को माना मैं धन। मन का उजाला हो आँगन।।
तुमने बजाया जो पायल। तबसे हुआ हूँ मैं घायल।
समझा करो मेरी चाहत। तुम्हीं मुझे देना राहत।।-20
(अन्तर्भावना)- ययतल अंकावली- ISS-ISS-SSI-I
रुलाने मुझे आया सावन। अधूरा-अधूरा मेरा मन।
पिया लौट आओ छू लो तन। पुकारे तुम्हें है ये यौवन।।
सताओ नहीं मेरा साजन। लुटा प्यार हो जाऊँ पावन।
गजानंद पूजा है चाहत। न ही प्यार टूटे हो आहत।।-21
-----इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
(20/06/2024)
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