रविवार, 23 जून 2024

स्वीकृति सममात्रिक दण्डक छंद

 स्वीकृति-- सममात्रिक दण्डक


यह प्रति पंक्ति 34 मात्रा का नव प्रस्तारित सममात्रिक  दण्डक है। इसके पदांत पर नगण अनिवार्य है। प्रथम खण्ड की शुरुआत त्रिकल (111,12) से अवश्य हो 21 से नहीं।


यति -- 34= 13,10,11- नगण

पदांत-- नगण (111)


13= 1222-222

10= 222-22

11= 2222-111


घिरे संकट में सारे, लगते दुखियारे, कोई तो दे शरण।

द्रवित अतिशय पीड़ा से, थककर क्रीड़ा से, रोता अंतःकरण।।

विशदता कलि की फैली, गंगा भी मैली, है असत्य आवरण।

अनघता जो है पाना, निर्मलता लाना, आओ श्री हरि चरण।।


तिरोहित भगवत धारा, बस चढ़ता पारा, भूले सुमिरन भजन।

बिसारे नाते सारे, बाहर के प्यारे, बने हितैषी अजन।।

तजे सात्विकता बंदे, खानपान गंदे, रत है कामुक प्रजन।

पतित मन क्यों करता है, साँसे भरता है, अब कर वैदिक यजन।।


विषय रस में है भूला, इंद्रिय सुख झूला, पीता डटकर गरल।

विवादों में तू उलझा, दिखता है सुलझा, अंतस कब हो सरल।।

करो अब कुछ तैयारी, कब आये पारी,  मन है चंचल तरल। 

परम सद्गुरु की संगत, मिले नयी रंगत, रखो शीश को खरल।।

*-- डॉ रामनाथ साहू 'ननकी'*

   *छंदाचार्य, बिलास छंद महालय*

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संध्याकालीन कक्षा हेतु-//


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*आधार छंद-- स्वीकृति सममात्रिक दण्डक*

*प्रति पंक्ति-- 34*

*यति-- 13,10,11*

*सृजन शीर्षक-- मुझ पर भी हो नजर (2 युग्म)*

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जरा तो करीब आओ, खुशियाँ बरसाओ, मुझ पर भी हो नजर।

तुम्हीं से प्रीत बहारें, सुखद नजारें,  ये पल जाये ठहर।।

चली आओ बाहों में, जीवन राहों में, सुख में बीते पहर।

करो मुझसे ये वादा, लो जान इरादा, करना मेरी कदर।।

----🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 05/06/2024



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