गुरुवार, 8 फ़रवरी 2024

विशाल छंद- (आधार छंद)

 विशाल छंद- जगा जमीर

 मापनी- 121 21

 पदांत- 121

जगा जमीर, कहे कबीर।

मिटे प्रचंड, नशा घमंड।।

शहद समान, रखें जुबान

बढ़े समाज, गढ़ें सुराज।।


कुरीति कोढ़, कुसंग छोड़।

मिटा दुराव, रखें लगाव।।

उठा मशाल, करो कमाल।

बनो प्रबुद्ध, विचार शुद्ध।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"


[31/01, 11:15 am] Er. G.N. Patre: 

विशाल छंद- प्रभाव छोड़

मापनी- 121 21

पदांत- 121

बनें महान, विवेकवान।

न हो उदास, करें प्रयास।।

बनें प्रदीप, समुंद्र सीप।

हरेक मोड़, प्रभाव छोड़।।


कुसंग चाल, सजे न भाल।

सुनीति संग, बढ़े उमंग।।

सुधा स्वभाव, रखें लगाव।

सुपंथ जोड़, प्रभाव छोड़।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 


[31/01, 11:16 am] Er. G.N. Patre:

विशाल छंद- नवल विधान

मापनी- 121 21

पदांत- 121

नवल विधान, गढ़ें सुजान।

गुरू कुरान, गुरू महान।।

रहीम राम, तुझे सलाम।

करूँ प्रणाम, न हो विराम।।


कलम कलाम, रखें लगाम।

कभी न क्षीण, रहें प्रवीण।।

बने पतंग, रहें मतंग।

बढ़ा प्रसंग, बढ़े उमंग।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)


[31/01, 11:17 am] Er. G.N. Patre: 

विशाल छंद- 

शीर्षक- गढ़ो विधान

मापनी- 121 21

पदांत - 121

विशाल छंद, हमें पसंद।

रखो तुकांत, सभी पदांत।।

गढ़ो विधान, बनो सुजान।

बनें सहाय, सुखी हिताय।।


तजें गुमान, बनें महान।

करें प्रयास, सदा विकास।।

बनें उदार, करूँ पुकार।

रखें न द्वेष, बनें विशेष।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)


[31/01, 5:38 pm] Er. G.N. Patre: 

विशाल छंद- प्रभाव छोड़

मापनी- 121 21

तुकांत- 121

उठे हिलोर, न हो विभोर।

उठा कमान, लगा निशान।।

न चूक चाह, प्रयास राह।

डरो न होड़, प्रभाव छोड़।।


बनें प्रयाग, न हो विराग।

बजा मृदंग, सजा उमंग।।

न हो उदास, बढ़े न त्रास।

मिटे मरोड़, प्रभाव छोड़।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)


[01/02, 7:19 pm] Er. G.N. Patre: 

विशाल छंद- विचारवान

मापनी- 121 21

पदांत- 121

विचारवान, मनुज महान।

सुमीत रीत, प्रभाव प्रीत।।

चलें सुचाल, करें कमाल।

दया उदार, खिले बहार।।


करें न भूल, गड़े न शूल।

करो निदान, दयानिधान।।

बनो सुधीर, समुद्र नीर।

प्रभास ज्ञान, विचारवान।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)


[02/02, 10:17 pm] Er. G.N. Patre:

 विशाल छंद- *उमंग आज*

मापनी- 121 21

पदांत- 121

उमंग आज, करो सुराज।

उठे हिलोर, नवीन भोर।।

गढ़ो मुकाम, सुकाम थाम।

उठा निगाह, रखो प्रवाह।।


न हो निढाल, रहो निहाल।

करो ग्रहीत, विचार प्रीत।।

रहो न भ्रांत, बनो प्रशांत।

तरंग साज, उमंग आज।।


🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)


[02/02, 10:18 pm] Er. G.N. Patre:

 विशाल छंद- *करो कमाल*

बदल विचार, बहे बयार।

सजा बसंत, दिशा अनंत।।

बजा मृदंग, खुशी उमंग।

बनो मिसाल, करो कमाल।।


सुनो सुगीत, भुला अतीत।

सुप्रेम क्षेम, सहेज नेम।।

बनो प्रमोद, सुधा पयोद।

झुके न भाल, करो कमाल।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)


[02/02, 10:18 pm] Er. G.N. Patre: 

विशाल छंद- *करूँ प्रणाम*

मापनी- 12121

पदांत- 121

रहूँ न दीन, इसी जमीन।

बनो सहाय, करो उपाय।।

बने नसीब, रहूँ करीब।

मिले मुकाम, करूँ प्रणाम।।


करूँ पुनीत, बढ़े सुमीत।

सजे सुभाग, बनूँ पराग।।

मिले विकल्प, रहूँ न अल्प।

मिले सुधाम, करूँ प्रणाम।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)


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