गुरुवार, 15 फ़रवरी 2024

चंडिका छंद- सम मात्रिक (आधार छंद)

 *आधार छंद-- चंडिका सममात्रिक*

*मापनी-- 2222-212 आदि द्विकल*

*पदांत-- 212*

*सृजन शब्द-- दानव कुल संहारिणी (2 युग्म)*

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दानव कुल संहारिणी, भव सागर जन तारणी।

अष्टभुजा माँ धारिणी, कल्याणी शुभ कारिणी।।

दूर करो दुख वेदना, भर दो माँ नवचेतना।

माला मूंड विराजते, शोभा नैन निहारते।।


रूप अनेकों शारदे, दुष्टों को संहार दे।

हे माँ मंगल कामिनी, शुभ्र ज्योत्सना यामिनी।।

सुख वैभव वरदायिनी, माथ मुकुट शोभायिनी

हर दो माँ संताप को, इस कलयुग के पाप को।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 12/02/2024

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*आधार छंद-- चंडिका सममात्रिक*

*सृजन शब्द-- आया सावन झूम के (2 युग्म)*

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आया सावन झूम के, नभ धरिणी को चूम के।

बादल बरसे घूम के, मारे कोयल ठूमके।।

बरसे मन बरसात में, प्रीत मिलन की रात में।

बूझ गई अब दामिनी, हार गई शुभ यामिनी।।


मन में उठते प्रीत है, संस्कारित शुभ प्रीत है।

जोड़ो मन से भावना, जन कल्याणी कामना।।

मय वश रावण है मरा, सत्य सनातन जग भरा।

समझो जग जन वेदना, जाग उठेगा चेतना।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 12/02/2024

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  *आधार छंद-- चंडिका सममात्रिक*

*सृजन शब्द-- मत स्वीकारो दीनता (2 युग्म)*

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*संस्थापक, छंदाचार्य - डॉ रामनाथ साहू "ननकी"*

*अध्यक्ष - डॉ माधुरी डड़सेना "मुदिता"*

*सचिव-- डॉ ओमकार साहू "मृदुल"*

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मत स्वीकारो दीनता, मन में भरकर हीनता।

रखना प्रभु में लीनता, जीना रख स्वाधीनता।।

प्रीत सभी से जोड़ना, लोभ बुराई छोड़ना।

नेक सुगम पथ मोड़ना, दीवार अहं तोड़ना।।


रखना कर्म महान तू, धर्म सुभाषित ज्ञान तू।

भरना ऊँच उड़ान तू, बनकर प्रज्ञावान तू।।

सत्य सनातन रीत हो, सबके प्रति सम प्रीत हो।

हार नहीं नित जीत हो, भाई-भाई मीत हो।।


गीता ग्रंथ कुरान में, बोले वेद  पुरान में।

भेद न हो इंसान में, बात रखो नित ध्यान में।।

मानव मंद विवेक है, कुंठित मन अतिरेक है।

खून सभी का एक है, सोच यही शुभ नेक है।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

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    *आधार छंद-- चंडिका सममात्रिक*

*सृजन शब्द-- सुर की देवी शारदे (2 युग्म)*

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सुर की देवी शारदे, नित्य कलम को धार दे।

कष्टों को संहार दे, भक्तों को सुख प्यार दे।।

आया हूँ माँ द्वार में, सुनकर प्रेम पुकार में।

भर दो प्रीत विचार में, सुखमय हो संसार में।।


अनपढ़ को माँ ज्ञान दो, अक्षर- अक्षर ध्यान दो।

दोष विकार निदान दो, मीठा बोल जुबान दो।।

सबको सम सम्मान दो, बुद्धि विवेक उचान दो।

गीत मधुर सुर तान दो, जनगण मन का गान दो।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 14/12/2024

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 *आधार छंद-- चंडिका सममात्रिक*

*सृजन शब्द-- सद्गुरु देते मंत्र हैं (2 युग्म)*

सद्गुरु देते मंत्र है, नेक विचार सुतंत्र है।

ज्ञान सुधा शुभ अंत्र है, नष्ट करे षडयंत्र है।।

सद्गुरु सीप समान है, पूजा पाठ अजान है।

यीशु ख़ुदा भगवान है, रूप अनेक महान है।।


सद्गुरु सच आधार है, जीवन का पतवार है।

महिमा अपरंपार है, भजते जग संसार है।।

मातु पिता का रूप है, देते ज्ञान अनूप है।

दूर करे दुख धूप है, तरसे गुरु को भूप है।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 15/02/2024

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आधार छंद - चंडिका छंद

सृजन शब्द- *कैसा ये व्यापार है*

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दिखता हाहाकार है, महँगाई की मार है।

जन बेबस लाचार है, चुप बैठी सरकार है।।

जग कालाबाजार है, फैला भ्रष्टाचार है।

लूट यहाँ भरमार है, कैसा ये व्यापार है।।


पीट रहें हैं भाल को, तरसे जन सुख थाल को।

पूछे कौन सवाल को, मिलता मान दलाल को।।

बात जहर नित घोलता, जब-जब मुँह को खोलता।

सत्ता कुर्सी डोलता, सच जब कोई बोलता।।


चोरों का सरदार है, बन बैठा सरकार है।

छाया हाहाकार है, कैसा ये व्यापार है।।

देश हुआ कंगाल है, बर्बादी का हाल है।

चलता रोज कुचाल है, खुद ही मालामाल है।।


सब पैसों का खेल, अब वोटों का मेल है।

बिकता दफ्तर रेल है, सच बोलो तो जेल है।।

झूठ बना आधार है, होता जय जयकार है।

न्याय हुआ लाचार है, कैसा ये व्यापार है।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 16/02/2024

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*आधार छंद-- चंडिका सममात्रिक*

*सृजन शब्द-- राधा शीतल छाँव है (2 युग्म)*

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मन में चुभते घाव है, लोग लगाये दाँव है।

पुण्य कन्हैया पाँव है, राधा शीतल छाँव है।।

पाप विनाशक नाम है, वंदन प्रभु जी राम है।

घट में चारो धाम है, जपना निश दिन काम है।।


मानव-मानव एक है, सत्य अहिंसा नेक है।

बढ़ता सोच विवेक है, माथ सजे अभिषेक है।।

जग में छाया पाप है, लोगों में संताप है।

दीन-दुखी माँ-बाप है, बढ़ता रोज विलाप है।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 16/02/2024

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*आधार छंद-- चंडिका सममात्रिक*

*सृजन शब्द-- राधा शीतल छाँव है (2 युग्म)*

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वृंदावन शुभ गाँव है, कृष्ण सुहावन पाँव है।

पेड़ कदम का ठाँव है, राधा शीतल छाँव है।।

मित्र सुदामा साथ में, थामे बंसी हाथ में।

मोर मुकुट है माथ में, गोप मगन है नाथ में।।


हरने आया पाप को, दुनिया के संताप को।

धन्य किया माँ बाप को, साधा मित्र मिलाप को।।

दे गीता संदेश को, बदला जग परिवेश को।

नष्ट किये छल द्वेष को, सिद्ध किये अनिमेष को।।

🖊️इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 16/02/2024

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*आधार छंद-- चंडिका सममात्रिक*

*सृजन शब्द--क्यों व्याकुल मन आज है (2 युग्म)*

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क्यों व्याकुल मन आज है, खामोशी अंदाज है।

व्यर्थ छुपाता राज है, जीत बँधे सर ताज है।।

बाधाओं को तोड़ दो, दुख का मटका फोड़ दो।

भाग्य निराशा छोड़ दो, कर्म दिशा पथ मोड़ दो।।


कहते ऋषि-मुनि संत है, सद्गुरु ज्ञान अनंत है।

लोभ किये सब अंत है, त्याग मिले सुख पंत है।।

भाईचारा साथ हो, दीन दुखी प्रति हाथ हो।

श्रम का मोती माथ हो, मत कोई निर्नाथ हो।।

🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 17/02/2024


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