मिताली छंद- *सूर्य सा चमकना*
मापनी- 212 122
पदांत- 2 (गुरू)
नित सचेत रहना, सत्य साज गहना।
छोड़ रूढ़ि रास्ता, गुरु कबीर वास्ता।।
मन सहेज रखना, प्रेम भाव चखना।
नेक राह बढ़ना, कीर्तिमान गढ़ना।।
कर्म को सुधारो, धर्म को उबारो।
सोच को बढ़ाना, श्रम शिखर चढ़ाना।।
त्याग दो बुराई, कर सदा भलाई।
फूल सा महकना, सूर्य सा चमकना।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
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[06/02, 3:23 pm] Er. G.N. Patre:
मिताली छंद- *सूर्य सा चमकना*
मेघ सा बरसना, सूर्य सा चमकना।
है मुकाम पाना, गीत जीत गाना।।
हौसला बढ़ाओ, साथ-साथ आओ।
बन कलम सिपाही, सत्यमेव ग्राही।।
सत्य में चलेंगे, फूल पथ खिलेंगे।
भूल को भुलाना, छोड़ दो बहाना।।
कामना करेंगे, भावना भरेंगे।
दीन हीन तबका, हो विकास सबका।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
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[06/02, 6:06 pm] Er. G.N. Patre:
मिताली छंद- *सूर्य-सा चमकना*
मापनी- 212 122
पदांत - 2 (गुरू)
आप ही विधाता, बुद्धि गुण प्रदाता।
हो सखा व भ्राता, है अटूट नाता।।
सुन पुकार आओ, प्रभु गले लगाओ।
है मुझे चहकना, सूर्य-सा चमकना।।
भक्ति गीत गाऊँ, प्रभु तुम्हें मनाऊँ।
हूँ शरण पड़ा मैं, द्वार पर खड़ा मैं।
कष्ट नष्ट करना, भक्ति भाव भरना।
आप विघ्नहर्ता, धर्म कर्मकर्ता।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
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मिताली छंद- प्रेम गीत गाऊँ
मापनी- 212 122
पदांत- 2(गुरू)
प्रेम गीत गाऊँ, आपको सुनाऊँ।
दूँ सदा गवाही, झूठ कर मनाही।।
रीति नीति गढ़ना, नेक पाठ पढ़ना।
सत्यबोध करना, सत्य साध मरना।।
भेदभाव छोड़ो, मनु कुरीति तोड़ो।
संविधान पढ़ लो, राह नेक गढ़ लो।।
छोड़ दो बहाना, हो सफर सुहाना।
एक खून काया, अंग है समाया।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
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[08/02, 6:24 pm] Er. G.N. Patre:
*आधार छंद-- मिताली*
*मापनी-- 212-122*
*पदांत-- 2*
*सृजन शब्द-- तोड़ दो गुलामी (2 युग्म)*
थाम लो तिरंगा, मन रखो मतंगा।
गर्व गान गाओ, फर्ज भी चुकाओ।।
कर नहीं मनाही, बन वतन सिपाही।
हो सदा सलामी, तोड़ दो गुलामी।।
रख जुनून बाहें, तीव्र हो निगाहें।
जोश रख जवानी, नीर-सा रवानी।।
खून काम आये, शान यश बढ़ाये।
राष्ट्र हित सुनामी, छोड़ दो गुलामी।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
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*आधार छंद-- मिताली*
*मापनी-- 212-122*
*पदांत-- 2(गुरू)*
*सृजन शब्द-- दिव्य साधना हो (2 युग्म)*
ईश प्रार्थना हो, दिव्य साधना हो।
क्रोध भय मिटाओ, लालसा घटाओ।।
नष्ट हो निराशा, हो प्रदीप्त आशा।
प्रीत पथ सुगम हो, मद विकार कम हो।।
द्वेष द्वंद त्यागो, बन सुधीर जागो।
प्रेम रस पिपासा, कह सुमीत भाषा।।
रार मत मचाओ, शांति सुख बचाओ।
सत्य कामना हो, दिव्य साधना हो।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 07/02/2024
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[08/02, 6:24 pm] Er. G.N. Patre:
मिताली छंद-- *तोड़ दो गुलामी*
मापनी-- 212 122
पदांत-- 2
द्वार ईश आओ, वेदना मिटाओ।
राह में पड़ा हूँ, भक्त बन खड़ा हूँ।।
नेक मन गढूँ मैं, प्रेम पथ बढूँ मैं।
भक्ति भावना हो, पूर्ण कामना हो।।
हो विकार आधा, क्रोध क्लेश व्याधा।
आत्म शांति पाये, मोक्ष मन समाये।।
पार प्रभु लगाओ, साँस में समाओ।
मन बने न कामी, तोड़ दो गुलामी।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 08/02/2024
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*दिनांक -- 08/02/2024*
*दिन -- गुरुवार*
*आधार छंद-- मिताली*
*मापनी-- 212-122*
*पदांत-- 2*
*सृजन शब्द-- लाड़ली चिरैया (2 युग्म)*
तान दे सुरैया, लाड़ली चिरैया।
पंख सुख पसारे,भूल को बिसारे।।
राग प्रीत गाते, जन सभी सुहाते।
सत्यबोध करता, सार ज्ञान भरता।।
प्रेम सुख बसेरा, हो सुप्रीत डेरा।
कामना यही है, चाह पथ सही है।।
काग राग छोड़ो, प्रेम रीत जोड़ो।
याद रख ठिठोली, कोयली सुबोली।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 08/02/2024
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*दिनांक -- 09/02/2024*
*दिन -- शुक्रवार*
*आधार छंद-- मिताली*
*मापनी-- 212-122*
*पदांत-- 2*
*सृजन शब्द-- छंद साधना हो (2 युग्म)*
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शब्द सामना हो, छंद साधना हो।
भाव मन उकेरो, छंदबद्ध घेरो।।
ज्ञान का खजाना, है हमें लुटाना।
युग नया गढ़ेंगे, नव युवा पढ़ेंगे।।
छंद ज्ञान ज्ञानी, बाँटते सुजानी।
लय विधा बताते, भावना जगाते।।
हो प्रशस्त राहें, रख खुली निगाहें।
पूर्ण कामना हो, छंद साधना हो।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
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*दिनांक -- 09/02/2024*
*दिन -- शुक्रवार*
*आधार छंद-- मिताली*
*मापनी-- 212-122*
*पदांत-- 2*
*सृजन शब्द-- हो विजय हमारी (2 युग्म)*
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हो विजय हमारी, गुरु कृपा तुम्हारी।
नाव है किनारा, साथ हो सहारा।।
प्रीत पुष्प पाऊँ, भाव मन जगाऊँ।
ध्यान उर लगाऊँ, शीश नित झुकाऊँ।।
धीर थाम बढ़ना, है विकास गढ़ना।
ज्ञान दिव्य मोती, चाह साथ होती।।
अंधकार भागे, प्रभु नसीब जागे।
कामना यही है, भावना सही है।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 09/02/2024
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*दिनांक -- 10/02/2024*
*दिन -- शनिवार*
*आधार छंद-- मिताली*
*मापनी-- 212-122*
*पदांत-- 2*
*सृजन शब्द-- अब समाधि लेना (2 युग्म)*
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मोह त्याग देना, अब समाधि लेना।
आ गया बुढ़ापा, दुख शरीर व्यापा।।
युक्ति मुक्ति करना, शुभ विचार भरना।
कर्म नित निभाना, दिल नहीं दुखाना।।
नेह मेघ बरसे, मन मयूर हरषे।
फूल पात डाली, साथ-साथ माली।।
हो गये पुराने, रात सुख सुहाने।
मत उपाधि देना, अब समाधि लेना।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 10/02/2024
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*दिनांक -- 10/02/2024*
*दिन -- शनिवार*
*आधार छंद-- मिताली*
*दैशिक 10 मात्रा/ वर्ग भेद 89*
*मापनी-- 212-122*
*पदांत-- 2*
*सृजन शब्द--*नैन तो मिलाओ* (2 युग्म)*
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शर्म को भगाओ, नैन तो मिलाओ।
रात चाँदनी है, साथ रागिनी है।।
अब करीब आओ, प्रीत मन जगाओ।
स्वच्छ भावना है, नेह साधना है।।
मैं नसीब वाला, हो रहा उजाला।
है समय सुहाना, पास तो बुलाना।।
बाँध प्रेम धागा, मत रहूँ अभागा।
घूँघटा हटाओ, नैन तो मिलाओ।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 10/02/2024
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🌀 *बिलासा छंद महालय* 🐚
*संध्याकालीन कक्षा*
*दिनांक -- 10/02/2024*
*दिन -- शनिवार*
*आधार छंद-- मिताली*
*दैशिक 10 मात्रा/ वर्ग भेद 89*
*मापनी-- 212-122*
*पदांत-- 2*
*सृजन शब्द--*नैन तो मिलाओ* (2 युग्म)*
पटल क्रमांक---1
समीक्षक 🍁अशोक पटसारिया नादान🍁
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नैन तो मिलाओ, रागिनी सुनाओ।
जीत का तराना, नित्य गुनगुनाना।।
ढूँढ लो ठिकाना, साथ नित निभाना।
पास कामयाबी, बैठ बन नवाबी।।
नाव नेह चढ़ना, एक साथ बढ़ना।
ध्यान साधना हो, प्रभु उपासना हो।।
पथ पुकारता है, मन उभारता है।
पास ईश पाओ, नैन तो मिलाओ।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 10/02/2024

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