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*दिनांक -- 19/02/2024*
*दिन -- सोमवार*
*आधार छंद-- दीप्ति/ जयकरी/ चौपई सममात्रिक*
*मात्रा- 15
*मापनी-- 2222-2221*
*पदांत-- 21*
*सृजन शब्द-- रे मन ! कब लोगे विश्राम(2 युग्म)*
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रे मन! कब लोगे आराम, निस दिन जीवन में है काम।
छोड़ चलो इस जग में नाम, व्यर्थ न हो तन साँस विराम।।
क्या लाया है जो तू साथ, जाना भी है खाली हाथ।
छोड़ो कल की चिंता माथ, सुख-दुख के साथी हैं नाथ।।
छोड़ो आपस की तकरार, एक पेड़ के हम सब नार।
मानवता की करो पुकार, होगा हम सबका उद्धार।।
सत्य अहिंसा के बन दूत, भारत माँ के सच्चे पूत।
त्याग भावना छूत अछूत, जग में हो शांति फलीभूत।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 19/02/2024
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*आधार छंद-- दीप्ति/जयकरी/चौपई सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- रे मन! कब लोगे विश्राम (2 युग्म)*
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किया बहुत जीवन में काम, रे मन! कब लोगे विश्राम।
सत्कर्मों को लेना थाम, मिल जायेंगे प्रभु सुख धाम।।
झूठ अहं भय भ्रम को छोड़, रखना मन में ज्ञान निचोड़।
रहना सच से नाता जोड़, सुख आये या दुख का मोड़।।
करना सेवा दीन गरीब, रहना नित माँ-बाप करीब।
इस जीवन का खेल अजीब, कर्म बनाये नित्य नसीब।।
रखना मुख में मीठ जुबान, शब्द लगे मत तीर समान।
ध्यान धरे चल गुरु का ज्ञान, तभी बनोगे मनुज महान।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 19/02/2024
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*आधार छंद-- दीप्ति/जयकरी/चौपई सममात्रिक*
*सृजन शब्द- मत कर दौलत पर अभिमान*
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मत कर दौलत पर अभिमान, जीवन हो सत पथ बलिदान।
पार लगाये भव गुरु ज्ञान, कहना मानो संत सुजान।।
जीवन जीना रख नित धीर, समझो दीन दुखी का पीर।
रखो बचा कर मान जमीर, बहना बनकर पावन नीर।।
सुख के साथी हैं सब लोग, दुख में करें नहीं सहयोग।
जस करनी तस भरनी भोग, लाख लगा बैठो तुम जोग।।
मद मदिरा में होकर चूर, धन दौलत का किया गुरूर।
होकर अपनों से ही दूर, रहा जिंदगी भर मजबूर।।
इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 19/02/2024
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आधार छंद- *दीप्ति/जयकरी/चौपई सममात्रिक छंद*-
सृजन शब्द- *भारत का हर बच्चा वीर*
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भारत माँ करती आव्हान, आन-बान तुम मेरी शान।
बन सच्चे मेरी संतान, रहना रण में सीना तान।।
तोड़ गुलामी की जंजीर, बनो बुलन्दी का तुम तीर।
तुमसे है भावी तस्वीर, भारत का हर बच्चा वीर।।
भुजा समाये रख तूफान, शूरवीर योद्धा बलवान।।
बनना कर्मवीर इंसान, नाज करे यह हिंदुस्तान।।
वीर शहीदों को कर याद, जिसने देश किया आजाद।
लाल बाल बिस्मिल आजाद, सदा रहेंगे जिंदाबाद।।
भारत का हर बच्चा वीर, चतुर बहादुर अरु बलबीर।
दुश्मन का सीना दे चीर, मन को रखता शांत सुधीर।।
विपदाओं में बनते ढाल, लड़ते ऊँचा करके भाल।
देश सिपाही करे कमाल, खूब बजाओ जी करताल।।
लेते पल में पर्वत नाप, खुदी चंद्रशेखर की छाप।
नष्ट करे पापी का पाप, देश भक्ति का करते जाप।।
माने न कभी वे तो हार, शेर समान करे ललकार।
बच्चे दिल के सच्चे यार, बोलो अब तो जय जयकार।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 20/02/2024
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*आधार छंद-- दीप्ति/ जयकरी/ चौपई सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- कविताई तू करले मीत*
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कविताई तू कर ले मीत, भरो सभी के मन में प्रीत।
मानवता के गाओ गीत, होये सबको मान प्रतीत।।
रहता कवि का हृदय उदार, सोचे सबका हो उपकार।
लिखता कविता में सच सार, करे झूठ प्रति नित्य प्रहार।।
सच्चाई पर लगते दाग, अंधभक्ति का गाते राग।
लोग बने हैं अब तो काग, व्यर्थ अलापे हैं अनुराग।।
सत्य प्रशंसा करे न लोग, लगा झूठ का सबको रोग।
पत्थर लगते छप्पन भोग, मरते घर का देव वियोग।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 20/02/2024
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*आधार छंद-- दीप्ति/ जयकरी/ चौपई सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- श्री सुरनायक मेरे राम (2 युग्म)*
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रघुपति राघव राजा राम, सिद्ध करे प्रभु सकल सुकाम।
पग में जिनके चारो धाम, श्री सुरनायक मेरे राम।।
सरिता सरयू पावन घाट, भक्त निषाद निहारे बाट।
पाया दर्शन रूप विराट, फेरा प्रभु ने हाथ ललाट।।
दीन दुखी के दाता राम, कष्ट हरे प्रभु का शुभ नाम।
गिरे पड़े को लेते थाम, देते सबको सुख अविराम।।
मानव जग में गढ़े सुराज, बने सुशासित सभ्य समाज।
धन्य गजानंद हुआ आज, नाम सियापति मन में साज।।
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श्री सुरनायक मेरे राम, चरण आपके सुख का धाम।
राम नाम है पावन नाम, सफल करे प्रभु सबका काम।।
करते क्षण में दुःख निदान, शरणागत हो जो इंसान।
सुबह शाम करना गुणगान, त्याग घमंड अहं अभिमान।।
कर्मपरायण नेह दुलार, भरा हृदय में प्रेम अपार।
दिए त्याग का शिक्षा सार, किये राम प्रभु जग उद्धार।।
भक्त रहा अंगद हनुमान, दिये सदा ही प्रभु में ध्यान।
केंवट शबरी को सम्मान, देकर जग में किये महान।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/02/2024
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*आधार छंद-- दीप्ति/ जयकरी/ चौपई सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- विनती सुन लो पालनहार*
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विनती सुन लो पालनहार, करना भवसागर से पार।
खड़ा आपके हूँ मैं द्वार, हाथ जोड़ कर करूँ पुकार।।
मैं अज्ञानी हूँ मतिहीन, शरण पड़ा हूँ बन मैं दीन।
ज्ञान बिना तड़पे मन मीन, सजा रहो आसन आसीन।।
संकट मोचन तारणहार, करना मुझ पर प्रभु उपकार।
बजे प्रीत का नित झंकार, देना मुझको यह उपहार।।
सही गलत प्रति हो प्रतिभान, रहे हृदय में मत अभिमान।
करें ज्ञान का जग में दान, तभी बनेंगे मनुज महान।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/02/2024
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*आधार छंद-- दीप्ति/ जयकरी/ चौपई सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- चोरी चोरी बोले नैन (2 युग्म)*
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चोरी-चोरी बोले नैन, छीन लिया है मेरा चैन।
तड़प-तड़प बीते हैं रैन, किसे सुनाऊँ दिल का बैन।।
विरह वेदना प्रीत अधीर, मीत हुआ है क्यों बेपीर।
दिया नैन में गम का नीर, मुरझाया बन पात शरीर।।
आया है अब ऋतु मधुमास, पिया मिलन की जागी प्यास।
छेड़े ताना फूल पलास, लौट चले आओ प्रिय पास।।
जब-जब कोयल बोले बोल, देते तब-तब दुख मन घोल।
तकती राह नैन पट खोल, समझो पिया मिलन का मोल।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 22/02/2024
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*आधार छंद-- दीप्ति/ जयकरी/ चौपई सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- मेरा प्यारा हिंदुस्तान (2 युग्म)*
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भाईचारा है पहचान, सभी धर्म का है सम्मान।
गाऊँ निस दिन मैं गुणगान, मेरा प्यारा हिंदस्तान।।
पावन गंगा का सुख धार, भरा खनिज से है भंडार।
संविधान समता आधार, दिया सभी को हक अधिकार।।
गीता ग्रंथ पुराण कुरान, देते नेक सदा सद्ज्ञान।
कहते मानव सभी समान, एक कोंख के हम संतान।।
जोड़ रखें सबसे हम प्रीत, होये सबको प्रेम प्रतीत।
गायें जनगण मन का गीत, रखें बचा हम अपना रीत।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 22/02/2024
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*आधार छंद-- दीप्ति/ जयकरी/ चौपई सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- छेड़े आओ भारत राग (2 युग्म)*
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बसा दिलों में नित अनुराग, गंगा जैसे प्रीत प्रयाग।
रखें भावना हित प्रति त्याग, छेड़ें आओ भारत राग।।
बुद्धि विवेक करें उपयोग, एक कोंख जन्में सब लोग।
जाति-धर्म का त्यागें रोग, मेल- मिलाप करें सहभोग।।
भारत का हो गौरवगान, रखें सदा हम इसका ध्यान।
हमें तिरंगा पर अभिमान, त्याग शांति उन्नति पहचान।।
राष्ट्रभक्ति का हो जयघोष, रहे सभी कोई निर्दोष।
मन में सबके हो संतोष, बढ़े देश का निस दिन कोष।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 23/02/2024
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*आधार छंद-- दीप्ति/ जयकरी/ चौपई सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- आओ गायें मंगल गीत (2 युग्म)*
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आओ गायें मंगल गीत, जोड़ें सबसे सच्चा प्रीत।
भाईचारा रख लें रीत, सबके दिल को लें हम जीत।।
धन्य धरा है भारत देश, शांति सुखद इसका परिवेश।
सत्य अहिंसा दे संदेश, रहे नहीं आपस में क्लेश।।
खुशहाली का गाये राग, एक डाल पर कोयल काग।
सभी जगा लें अपना भाग, मिटा द्वेष भय भ्रम का दाग।।
राह चलें हम उन्नत नेक, एक खून है तन भी एक।
सद्विचार हो सोच विवेक, बढ़े बंधुता नित अतिरेक।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 23/02/2024
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*आधार छंद-- दीप्ति/ जयकरी/ चौपई सममात्रिक*
*सृजन शब्द-- मेरा क्या बोलो अपराध (2 युग्म)*
मेरा क्या बोलो अपराध, प्रीत लिया जो तुमसे साध।
करता हूँ मैं प्रेम अगाध, चलने दो इसको निर्बाध।।
बसा लिया दिल में तस्वीर, समझ तुम्हें अपना तकदीर।
मैं राँझा तुम मेरी हीर, साथ-साथ सहना है पीर।।
साँसों से साँसों का तार, धकड़न में बस तेरा प्यार।
तुमसे ही है प्रीत बहार, तुम ही हो जीवन आधार।।
रहे प्रीत में न कभी होड़, देंगे सुख का सार निचोड़।
साथ रहेंगे हम हर मोड़, बन जीवन साथी बेजोड़।।
🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 24/02/2024
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*आधार छंद-- दीप्ति/ जयकरी/ चौपई सममात्रिक*
*सृजन शब्द--जीवन का ले लो आनंद (2 युग्म)*
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जीवन का ले लो आनंद, छोड़ो मन का अंतर्द्वंद।
मिला समय है कुछ ही चंद, रखें जोड़ प्रीत गजानंद।।
मधुर मिलन की हो बरसात, करें सदा सच्चाई बात।
दें सबको सुख की सौगात,आये कभी न दुख की रात।।
इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर
25/02/2024

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