माने नही बात घासी बबा के
माने नही बात घासी बबा के फिरे तैं कहाँ लोभ माया धरे।
नैना बसे तोर कारी अगासे सुखे संगवारी पराया करे।।
राखे नही संग दाई ददा ला बुढापा मया बाँट होगे परे।
झूठे लबारी रखे तैं दुवारी मया प्रेम के बोल काँटा भरे।।
छाता पहाड़ी रमाये धुनी
छाता पहाड़ी रमाये धुनी ला लखाये हवै सत्य के ज्ञान ला।
माड़ी दुनों मोड़ बैठे रहै जाप मा आँख मूँदे रमा ध्यान ला।।
भारी करे साधना हे तपस्या तभे पाय हावै गुरू मान ला।
थामे चलौ राह नेकी भलाई कहे हे गुरू बात इंसान ला।।
जाना हवे हाथ खाली सबो ला
जाना हवे हाथ खाली सबो ला तभो तैं बनाये अटारी बड़े ।
जाने नही बोल भाखा गरीबी पियासा भगाये दुवारी खड़े ।।
सोये नही नींद रैना बने तैं,सदा ध्यान हा चीज मा हे गड़े ।
हंसा उधारी चुका ले मया के,घड़ी काल के द्वार आये खड़े ।।
दाई- ददा
दाई ददा के मया भूलगे जी बुढ़ापा सहारा कहाँ तैं खड़े।
छाती रपोटे पिलाये हवे दूध पोसे करे आज तोला बड़े।।
हे कीमती सोन चाँदी सबो ले मिले पाँव आशीष मोती झड़े।
बेटा बहू दूरिहाये कभू ना गजानंद ये सोंच मा हे पड़े।।
इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
मंदारमाला सवैया लिखौं
मंदारमाला सवैया लिखौं मैं दयालू गुरू ले मिले ज्ञान हे। पाये हवौं आज मैं छंद छाया बनाये घलो नेक इंसान हे।। गोविंद गाये गुरू ज्ञान गाथा गुरू ही दया के बड़े खान हे। साजे हवै धार तो लेखनी मा गजानंद पाये सुनौ मान हे।। ::::::::::::::मंदारमाला सवैया:::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 24/08/2024
जाने नहीं मर्म माया मया के
इंसान ईमान खोई डरे आज, माया मया मोह मा हे पड़े। बोले कभू मीठ बोली नहीं जी, रहे प्रेम ले दूर ठाड़े खड़े।। रट्टा लगाये कहे मोर मोरे, रहे आँख हा लोभ मा तो गड़े। जाने नहीं मर्म माया मया के, गजानंद जी सोच ताला जड़े।। :::::::::::::::मंदारमाला सवैया::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 16/09/2024

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