सुनौ गुरु जी अरजी
पुकारत हे मन ले कुछ आस सुनौ गुरु जी अरजी ल हमार ।
जला सत जोत बढ़े सद ज्ञान जले कुमता मन हो उजियार ।।
सुने हँव मैं महिमा गुरु के करथे दुख के भव सागर पार ।
रखे रहिबे किरपा गुरु जी गुहरावत हे मन ये दुखियार ।।
लिखे गुरु नाम नसीब
जले सुमता दियना ह घरोघर ले चलबो सबला रख साथ ।
जियौ जिनगी रख के कुल मान सदा बढ़है सत कारज हाथ ।।
रहै झन भूखन मरै न पियास कभू झन रहे ग गरीबअनाथ ।
लिखे गुरु नाम नसीब तभे सहरावत आज लकीर ग माथ ।।
चलौ सत मारग
करौ उजियार जला सत ज्योति भरौ मन मा उपकार विचार। चलौ सत मारग पाँव उठा मिलही तब छाँव दया गुरु सार।। कभू ककरो बर शूल बिछा झन पेड़ लगा पथ मा फलदार। गजानन जी भव पार करे सतनाम पिता बन खेवनहार।।
हो जिनगी खुशहाल किसान
रखौ सपना सब नैन सजावत हो जिनगी खुशहाल किसान ।
इही सबके बन पालन हार भरे जग पेट बने भगवान ।।
रहै खुद भूख भले पर दूसर खातिर ये उपजावय धान ।
हे गुरु जी सुन ले विनती सुख जीवन राहय मोर मितान ।।
मुक्ताहरा सवैया- बचावव पेड़ बचावव पेड़ लगावव पेड़ इही जिनगी सुख के रखवार। गिरावय नीर मिटावय पीर दिये फल छाँव सुने मनुहार।। दुआ दवई बनके करथे उपचार पड़े जब लोग बिमार। करे बिनती कर जोर गजानन पेड़ बचा सुन मोर पुकार।।
इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
बिना गुरु के जिनगी बिरथा
नवाँवत माथ हवौं गुरु जी पग, ज्ञान सुधा करहू बरसात। बने पतवार दिखा सच राह, करौं शुभ काम सदा शुरुआत।। बिना गुरु के जिनगी बिरथा सुख छाँव दिनोंदिन हे दुरिहात। गजानन मातु पिता गुरु ले बड़का भगवान नहीं सुन बात।। ::::::::::::::::::::मुक्ताहरा सवैया:::::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/07/2024
भारत देश बने ग महान
विकास गढ़े नव मान बढ़े जग, भारत देश बने ग महान। विचार सदा सुमता समता, बन राहँय आपस मीत मितान।। मिले सब ला अधिकार बरोबर, ध्यान रखे सँविधान विधान। गजानन सोन चिड़ी बन उड़े नित भारत देश ह उच्च उड़ान।। ::::::::::::::मुक्ताहरा सवैया::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 15/08/2024
सदा सुख के रसता गढ़ ले
कहे गुरु संत सुजान सियान रखे चल अंतस मा पर पीर। निराश कभू जिनगी झन झाँकय नैनन मा भर ले सुख नीर।। सदा सुख के रसता गढ़ ले मन मोह बँधे झन होय अधीर। धरौ गुण ज्ञान गजानन जी करथे हित के नित बात गहीर।। ::::::::::::::मुक्ताहरा सवैया:::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/09/2024
जला के मया दीप
जला के मया दीप मोरे मयारू, नहीं बीच रद्दा कभू छोड़ जाबे। रखे आस हौं हाथ थामे सदा, सात जन्मों जहां संग तैं हा निभाबे।। बजा बैंड बाजा बराती धरे तैं, सजा मांग सिंदूर शादी रचाबे। सुनौ बात स्वामी गजानंद जी, जिंदगानी बने प्रेम तैं हा लुटाबे।। :::::::::::::::मुक्ताहरा सवैया::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 12/09/2024
दया धन दान रखौ गहना
चलै कुछ साथ नहीं सँग मा तज ले धन के तन के अभिमान। रहै मन शांति विचार गढ़ौ अउ कर्म बनावव नेक महान।। दया धन दान रखौ गहना कहिगे जग ला गुरु संत सुजान। मिले सब ला सुख कौर गजानन बात सदा रखबे तँय ध्यान।। :::::::::::::::मुक्ताहरा सवैया::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 17/09/2024

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें