सतनामी हम खाटी
छन्न पकैया छन्न पकैया, छत्तीसगढ़ के माटी ।
सीना ताने चलथन बेटा, सतनामी हम खाटी ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, नोहय झूठ लबारी ।
सिधवा बर हन सिधवा हम तो, कपटी बर चिंगारी ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, सत के हम परछाई ।
वीर भान के छाती हम तो, अन सरहा जोधाई ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, जानत हवय जमाना ।
अत्याचार जुलुम बर लड़थन, गुरु बालक धर बाना ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, भुजबल के हम डोला ।
भुजा बँधाये पारस हमरो, रग रग बारुद गोला ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, गुरु के हम अनुयायी ।
अलख जगाबो सत के आवव, प्रण हे ममतामायी ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, गजानंद ये बेटा ।
पाँव बढ़ाये सुमता खातिर, बाँध मुड़ी सत फेटा ।।
मोर बेटा
छन्न पकैया छन्न पकैया, सुन ले चंदा मामा ।
आज मोर बेटा पहिने हे, सादा के पैजामा ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, गला म कंठी माला ।
झूम झूम के नाचत हावय, होके बड़ मतवाला ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, माथ म चंदन टीका ।
येकर गुरतुर बोल सामने, लागे सब कुछ फीका ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, हाथ म सादा झंडा ।
सतनामी के शान धरे हे, तेन्दु सार के डंडा ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, पहिने पाँव खड़ाऊ।
सतनामी के मान बढाहूँ, कहिथे सुन ले ताऊ ।।
वीरभान के छाती बनहूँ, अउ सरहा जोधाई ।
कहिथे अत्याचार जुलुम बर, लड़हूँ खूब लड़ाई ।।
खून समाये गुरु बालक के, रग रग बारुद गोला ।
रजवा बिट्ठल के अवतारी, भुजबल के हे चोला ।।
गुरु के गुन ला गा ले
छन्न पकैया छन्न पकैया, नोहय बात लबारी ।
छोड़ मोह दुनिया से जाना, हवे ओसरी पारी ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,मुट्ठी बाँधे आना ।
जीयत भरके मोर तहाँ ले, हाथ पसारे जाना ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, पथरा पड़ही छाती ।
करम धरम सिरजाले भाई, जुग जुग बरही बाती ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया,करम साथ बस जाथे ।
परहित जिनगी जेहा जीथे,नाम जगत मा पाथे ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, सुख दुख आना जाना ।
मोल समय के नइ जाने ले, पड़थे जी पछताना ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, गुरु के गुन ला गा ले ।
चरदिनिया हे ये जिनगानी, मीठ मीठ गुठियाले ।।
बरसे सावन राजा
छन्न पकैया छन्न पकैया, बरसे सावन राजा।
झिंगुर रतिहा गाना गाये, साँप बजाये बाजा।।1
छन्न पकैया छन्न पकैया, छा लौ परवा छानी ।
छाता ओढ़े घर से निकलव, खूब गिरत हे पानी ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, धान पान हरियागे ।
सावन के पानी पाये ले, सबके मन फरियागे ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, सुन लौ बात सियानी।
पानी कम होये ला संगी, होवय नहीं किसानी।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, गुरु के पूजा करबो ।
जाबो गिरौदपुर गा संगी, भक्ति भाव मन धरबो ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, माँग मनौती आबो ।
छत्तीसगढ़ बढ़े आघू जी, नवा बिहनिया लाबो ।।
छत्तीसगढ़ देख लूटागे
छन्न पकैया छन्न पकैया, दारू हे सरकारी ।
छत्तीसगढ़ देख लूटागे, बनके फिरत मदारी ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, देखव आज समारू ।
लोटा बरतन बेच बेच के, रोज पियत हे दारू ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, संग बिक़त हे चखना ।
आनी बानी दारू मिलथे, इँखर हवे का कहना ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, झूमत हे सब बढ़िया ।
दर दर भटकत भावी पीढ़ी, बनगे निचट कोढ़िया ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, जागव मूल निवासी।
परदेशी बर दूध मलाई, तुम खावत हव बासी।।
छन्न पपकैया छन्न पकैया, बात समझ नइ आवय ।
नशा नाश के विषधर खेती, छत्तीसगढ़ उगावय ।।
शौचालय
छन्न पकैया छन्न पकैया, खुला शौच झन जावव ।
दूर बिमारी घर से राखव, शौचालय बनवावव ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, बात सुनव सँगवारी ।
शौचालय घर मा बनवावव, घर के इज्जत नारी ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, गाँव शहर अपनावव ।
कचरा ला डिब्बा मा डारव, निरमल देश बनावव ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, सोंच बढ़ावव मन के ।
भारत के तस्वीर बदल दौ, वीर सिपाही बनके ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, का हे भारत उन्नतति ?
अस्वच्छता रहे के कारन, भारत के ये दुर्गति ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, खोल देख लौ लेखा ।
स्वच्छ देश मा सबले पाछू, हमर देश के रेखा ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, साफ रखव जिनगानी ।
साफ़ रखव सब आसपास ला, साफ़ रखव जी पानी ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, स्वच्छ राह ला धरबो ।
आवव मिल अब बापू जी के, सपना पूरा करबो ।।
इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
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छन्न पकैया छंद- नशा
छन्न पकैया छन्न पकैया, नशा नाश के जड़ हे।
तन धन ला बरबाद करे ये, लत येखर गड़बड़ हे।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, सुन ले बात बुधारू।
बछर एक सौ एक जिये बर, छोड़ पिये ला दारू।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, झन खावव जी गुटका।
जहर बरोबर ये जिनगी ला, करथे कुटका-कुटका।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, भांग चरस अउ बीड़ी।
गाँजा अफीम सिगरेट घलो, हवय मौत के सीढ़ी।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, खैनी खाना छोड़व।
टीबी केंसर दमा रोग सँग, झन नाता ला जोड़व।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, छोड़ गुड़ाखू घिसना।
जानबूझ के दुख चक्की मा, जिनगी ला झन पिसना।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, कहिथें लोग नशेड़ी।
पड़े नशा के लत मा मनखे, खुरचत रहिथें ऐड़ी।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, गाँव शहर अउ पारा।
गजानंद जी हवय लगावत, नशामुक्ति के नारा।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 29/07/2025

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