सुवा पिंजरा उड़ जही एक दिन
खिलय फूल जीवन सुखी डाल मा ।
रहव खुश सबो जी अपन हाल मा ।
चलव ना कभू जी बुरा चाल मा ।
लगा सत तिलक तँय अपन भाल मा ।।
सुवा पिंजरा उड़ जही एक दिन ।
मयारू मया रो लिही थोर किन ।
दिही फेक चिनहा गये तोर छिन ।
लिही बाँट जम्मो रखे चीज गिन ।।
उड़े पाप बनके धुँआ जग फिरे ।
कुँआ झूठ के खोद खुद ही गिरे ।
करे जग हँसाई बुरा काम हरे ।
उठव संत जन राह सतकाम धरे ।।
जपव नाम सतनाम हिरदे बसा
जपव नाम सतनाम हिरदे बसा ।
रखव संग दाई ददा ला हँसा ।
कहे बात घासी बबा जग दशा ।
करे नाश घर तन जुआ ये नशा ।।
उड़े पाप बनके धुँआ जग फिरे ।
कुँआ झूठ के खोद खुद ही गिरे ।
करे जग हँसाई बुरा काम हरे ।
उठव सबो संतन सतनाम धरे ।।
सुवा पिंजरा उड़ जही एक दिन ।
मया मोह जी रो लिही थोर किन ।
दिही फेंक चिनहा गये तोर छिन ।
लिही बाँट जम्मो रखे चीज गिन ।।
दया भाव जुग जुग रही काम के ।
खिले फूल बगिया सदा नाम के ।
करे मोह काबर इही चाम के ।
गये भूल मारग परम धाम के ।।

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