पुण्य मिले उपकार मिले
कोंन घड़ी तन छोड़ चले सब ला जग सांस उधार मिले।
छोड़ गुमान अहं मन के सत राह चलौ गुरु सार मिले।
ज्ञान विवेक बढ़ै सब के गुरु पावन प्रेम दुलार मिले।
हो चहुँओर विकास गजानन पुण्य मिले उपकार मिले।।
इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 01/10/22
बात कहे गुरु बालक दास
बाँध चलौ सुमता गठरी सबला मिलही तब मान बने ।
बात कहे गुरु बालक दास सुनौ कहना सब लोग जने ।।
राह बने सत थाम चलौ झन झूठ कभू जग हाथ सने ।
पाय धरोहर हौ पुरखा अपनो रख लौ अब बाँह तने ।।
रइहौ छुपके कब ला
देखव नोचत हे बनके गिधवा रइहौ छुपके कब ला ।
चाबत देख सुवारथ हा बनके घुघवा तन ला हब ला ।।
नीर भये अब खून सबो कहथे सब जी हमला अबला ।
शेर सही अब रे गरजौ मिल टूट पड़व सब जी खब ला ।।
नैन बसा समता
हाथ उठा सत कारज खातिर,दीन दुखी झन जी तरसे।
पाँव बढ़ा सत मारग खातिर,फूल सदा पग मा बरसे।।
नैन बसा समता सब खातिर,दूर हटा करिया घर से।
सोंच बढ़ा सबके हित खातिर,तोर दया सबला सरसे।।
भूख बड़े तन के दुनिया
भूख बड़े तन के दुनिया रचथे जग मा सच झूठ भला ।
कर्म करे तब पेट भरे खुद ना पहुँचै मुँह कौंर घला ।।
भाग तको सिरजे बढ़िया अब लोगन सीखव नेक कला ।
हो खुशहाल गढ़ौ सच मारग अंतस मा सत जोत जला ।।
कोंन भला अउ कोंन बुरा
कोंन भला अउ कोंन बुरा कइसे मन हा पतियावय जी ।
भेष धरे मुनि पंडित के अउ हे मन ढोंग बसायव जी ।।
नोंचत हे तन ला गिधवा करिया कउँवा नरियावय जी ।
दान चढ़ै अउ पान चढ़ै बइठे ठगवा हरियावय जी ।।
अलगे कथनी करनी
ये दुनिया भइगे बपुरा चुपचाप छले ठगवा छलिया ।
आड़ लिये भगवान तहाँ रस चूसत हे कलिया कलिया ।।
भोग लगे पकवान चढ़े अउ दूध दही मलिया मलिया ।
हे अलगे कथनी करनी अउ हे नकली इखरो हुलिया ।।
देखव ता पतियावव
माथ नवा सब पूजत हे कहिथे भवसागर पार करे ।
पाठ पढ़े बस राम रमायन अंतस हे जस पाप भरे ।।
देखव ता पतियावव जी कइसे बइठे बड़ ढोंग धरे ।
राह दिखावत हौं सच के अब तोड़व जी सत पेड़ फरे ।।
देख रिवाज गजानन जी
झूठ बने लगवार इहाँ सच ला अब कोंन धरे चलथे। मीठ जुबान भरे महुरा मन भीतर द्वेष अहं पलथे। राज करे चमचा लबरा सिधवा मन हाथ इहाँ मलथे।। देख रिवाज गजानन जी अपने बर तो अपने जलथे।। आज सियान सुजान गियान धरे अब कोंन कहाँ मिलथे। आपस मा झगरा करथे अउ नोट अदालत मा ढिलथे। प्रेम करे नित प्रेम बढ़े कुमता रख नींव मया हिलथे। याद रखौ यह बात गजानन नीर दिये बिरवा खिलथे। इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) १४/१०/२०२२
मदिरा सवैया- *जीवन के सुख वास गढ़ौ* बाँध चलौ सुमता बँधना अब नेक समाज विकास गढ़ौ। छोड़ गुमान अहं मन ले सबके हित खातिर आस गढ़ौ। बाँट खुशी अउ काट दुखी ककरो बर तो झन त्रास गढ़ौ। नाम कमा यश मान गजानन जीवन के सुख वास गढ़ौ।। इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ०८/१०/२०२२
मदिरा सवैया- सत्य सदा लबरा दिखथे ढोंग उठा चलना अब छोड़ बुरा सच के पहिचान करौ। माथ नवा अनजान बने झन झूठ कभू गुनगान करौ। लूट सजे दरबार इहाँ धन मान बचा अब ध्यान करौ। पूजन छोड़ चलौ पथरा घर मातु पिता भगवान करौ।। झूठ घरो घर आज बिराजत देव बने पथरा दिखथे। लोग सुजान कहाँ अब हे सब के सब तो अँधरा दिखथे। मान लुटा घर चीज लुटा तन मा कपड़ा चिथरा दिखथे। चेत करे अब कोंन गजानन सत्य सदा लबरा दिखथे।। इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 04/10/2022
5 जून विश्व पर्यावरण दिवस विशेष- मदिरा सवैया- कोंन लगावत पेड़ इँहा अब काम विकास विनाश हवे। रोज कटावत पेड़ जिहाँ मनखे सुख स्वारथ दास हवे।। शुद्ध हवा जलवायु कहाँ हर साँस प्रदूषण पास हवे। चेत गजानन तैं कर ले जिनगी बिरवा बिन लाश हवे।। मोटर कार अँधाधुँध दौड़त छोड़त खूब अशुद्ध हवा। पेड़ बिना भुइँया तिपगे जइसे तिपथे चढ़ आग तवा।। रोग समाय दमा तन मा तरसे मनखे तब साँस दवा। जान गजानन पेड़ बिना जिनगी नइ होय बिहान नवा।। रचना- इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
भूख करावय काम सबो
भूख करावय काम सबो दिन रात तभो नइ पेट भरे। हे बिधुना दुख खेल बिटोवन भूख धरे कुछ लोग मरे।। कोन करे परवाह दुखी जन लोभ भरे मुख झूठ झरे।। बात गजानन साँच कहे असली सुख ला धनवान धरे।। ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर
बाँध चलौ सुमता गठरी
बाँध चलौ सुमता गठरी अब शिक्षित नेक समाज बने। गाँव गली घर द्वार सजे सबके बढ़िया नित काज बने।। शांति रहे सबके मन मा दुख रात कटे सुख राज बने। मान गजानन दे सब ला पुरखा मनके तँय लाज बने।। ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 11/08/2024
कवि धर्म निभा
फर्ज चुका कवि धर्म निभा लिख बात हकीकत ला जग मा। मान मिले अपमान मिले परवाह किये बिन मारग मा।। छाँव मिले सब ला सुख के दुख शूल गड़े झन तो पग मा। राज करे झन झूठ गजानन लोग फँसे झन तो ठग मा।। :::::::::::::::::मदिरा सवैया:::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/09/2024
धर्म गुलाम बने मनखे
झूठ परोसत हें मनखे बनके अँधरा अब ढोंग धरे। दूर रहे सच ले जिनगी भर गोबर सोच विचार भरे।। छींनत हे सथरा पथरा जग भूखन लाँघन लोग मरे। धर्म गुलाम बने मनखे सच बात गजानन कोंन करे।। ::::::::::::::::::मदिरा सवैया:::::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 23/09/2024
पाठ पढ़ौ जग मानवता
पाठ पढ़ौ जग मानवता सब राह चलौ नित नेक भलाई। दान दया उपकार करौ करही दुनिया तब मान बड़ाई।। लोग उदार रखौ मन ला समझौ खुद के सम पीर पराई। एक बने सब नेक बने शुभ भाव गजानन ले रख भाई।। ::::::::::::::::::मदिरा सवैया:::::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 01/10/2024

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