मंगलवार, 16 अगस्त 2022

सुखी सवैया-

 गुरु बंदना

गुरु बंदन भोर सबेर सुनौ अरजी बिगड़ी जग मोर बनावव ।

हँव बालक मैं मतिमंद धियान धरे सत मारग ज्ञान लखावव ।।

भटके पग ना सच राह दया मन कंचन हो गुरु कर्म बनावव ।

जग संत शिरोमणि हे गुरु जी हिरदे मन आसन आप बिराजव ।।


जिनगी बिरथा सतनाम बिना

कर ले बढ़िया गुणगान बबा जप ले हिरदे सतनाम भला मन ।

मिटही अँधियार बसे घर के तरही भव सागर नाव घला मन ।

मझधार नदी अटके नइया बर सीख बने कुछ नेक कला मन ।

जिनगी बिरथा सतनाम बिना झन फोकट पाप बसा मनवा मन ।।


*तलवार हरौं गुरु बालक के*

तलवार हरौं गुरु बालक के कुमता सर ला मँय काट मढ़ावँव।

सुमता मन जोर रखे चलथौं सत काम करे मँय पाँव बढावँव।।

भर ताकत ला कलमें सच मा नित मानवता मँय पाठ पढ़ावँव।

किरपा गुरु पाय गजानन हे मन भाव धरे मँय फूल चढ़ावँव।।


अनमोल धरोहर ये सतनाम हवे

करुणा निधि ये जग पालनहार चलौं सत थाम सदा अपनों पग ।

बिनती अतके सुन ले गुरु बासय जीयत तोर ग नाम सदा रग ।

झन लूट सके छुप चोर कनो झन छीन सके सिरतो छुपके ठग ।

अनमोल धरोहर ये सतनाम हवे मिलथे सबला नइ तो जग ।।


मतदान करौ, पहिचान करौ

मतदान करौ पहिचान करौ करगा बदरा सब छाँट निमारव ।

पड़ लालच ये मुरगा मदिरा झन जी अपनो अधिकार बिसारव ।

करके असली मतदान सबो नकली मन के मिल रंग उतारव ।

चुनके सरकार इहाँ बढ़िया हर हाल गजानन देश सुधारव ।।


लाल टमाटर

सब लोग कहे सुन तोर बिना नइ साग मिठावय लाल टमाटर। बरसात लगे तब दाम बढ़े अउ खूब रुलावय लाल टमाटर।। शहरी मनखे मुँह स्वाद धरे बड़ भाव बढ़ावय लाल टमाटर। जब गाँव किसान उगावय तो मुँह ला बिचकावय लाल टमाटर।।


सुरता लइकापन के

सुरता लइकापन के करके मन हा अबड़े अब तो पछतावय। सुख के दिन अल्हण वो जिनगी अब कोंन भला हम ला लहुटावय।। अँचरा छइँहा बड़ नीक लगे अउ माँ ममता धर गोद सुलावय। कपड़ा पहिना बसता पकड़ा तब रोज ददा हर स्कूल पठावय।। ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 06/08/2024


गुरु पारस सोन समान

गुरु भाव विचार गढ़े बढ़िया गुरु ले सिरजे कवि लेख लिखावट। महिमा गुरु के लिख का मँय पाहँव हे गुरु ले सब शब्द बनावट।। गुरु दीप बने उजियार भरे मन मा कर दै नित प्रेम बसाहट। गुरु पारस सोन समान गजानन जे कर दै गुण ज्ञान सजावट।। ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 09/08/2024

मीत मिले मन प्रेम बढ़ावन

बन सागर ज्ञान सदा मन हा छलके बन पावन नीर सुहावन। उपजे उपकार दया करुणा नित भाव नया ममता मनभावन।। बरसे बनके सुख बूँद टपाटप प्यास मिटावय ये बन सावन। मन धीर रखे मन जीत गजानन मीत मिले मन प्रेम बढ़ावन।। ::::::::::::::::::सुखी सवैया::::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 29/08/2024


चल ले सत मारग

चल ले सत मारग थाम सदा बिरथा जिनगी झन तो बन जावय। तज ले मन मोह मया जग के झन लालच हा बनके घुन खावय।। बड़ भागमनी मनुवा जग मा सत कर्म करे मनखे तन पावय। कर ले गुरु के गुणगान गजानन जे भवसागर पार लगावय।। :::::::::::::::::सुखी सवैया:::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 24/09/2024


धड़के हिरदे बनके जिनगी

धड़के हिरदे बनके जिनगी मनखे हिरदे सुख प्रेम बसावय। कठवा पथरा ककरो हिरदे ककरो हिरदे नम मोम जनावय।। लग जावय रोग मया हिरदे बनके बिरहा दिन रात जगावय। नित स्वस्थ गजानन जी हिरदे रख द्वेष अहं घुन हा झन खावय।। :::::::::::::::::::सुखी सवैया::::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 29/09/2024



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