मंगलवार, 16 अगस्त 2022

वाम सवैया-

 हँसा तरसे गुरुनाम बिना

घड़ी घुमवावत चार दिशा मन घूमत हे बिरहा कस घानी ।

लदे फर पेड़ सदा झुकथे जइसे झुकथे सब संतन ज्ञानी ।।

गुमान नही रख ये तन के घुरवा कस जी घुरथे जिनगानी ।

हँसा तरसे गुरुनाम बिना जइसे तड़फे मछली बिन पानी ।।


बिना गुरु ज्ञान कहाँ

धरे चल लौ सब जी सत के रसदा कर लौ दुनिया उजियारी । 

बिहान नवा उगही सुख के जिनगी जब ये करिहौ बलिहारी ।।

चलौ सुसतालव जी छइहाँ सत के रइहौ बनके सदचारी ।

बिना गुरु ज्ञान कहाँ लखथे बिन काम कहाँ मिलथे फलचारी ।।


कष्ट हरौ गुरु हे अविनाशी

धरे चल राह सदा सत के मिलही सुख हा कहिगे गुरु घासी।

रहौ जिनगी भर हाँसत गावत राखव ना मन घोर उदासी।।

जपे सतनाम लगे भव पार तहूँ बन जा सतधाम निवासी।

गजानन जोर करे नित वंदन कष्ट हरौ गुरु हे अविनाशी।।

15/05/2021


छाहित हे सतनाम सहारा

गिरौदपुरी गुरु पावन धाम जिहाँ नित ज्ञान बहे सत धारा।

लगे मनभावन छात पहाड़ सुहावन जोक नदी वन प्यारा।।

लगे सतसंगत संतन के नित गूँजय नाम जिहाँ गुरु नारा।

गजानन तोर नसीब बड़े मन छाहित हे सतनाम सहारा।।

✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे 'सत्यबोध'

बिलासपुर ( छत्तीसगढ़ ) 15/05/2021


झूठ करे बिरथा जिनगानी

सुने सच ला अब कोन इहाँ धर झूठ करे बिरथा जिनगानी। बने अँधभक्त करे अँधभक्ति रितोवत हे पथरा भर पानी।। रहे सुख खोजत मंदिर मस्जिद चीज लुटावत हे मनमानी। रखौ सुख मा नित मातु पिता कहिथे असली इन देव सियानी।।


बादर आजा

सुखावत धान बिना जल के अब राख दया मन बादर आजा। सुनावय गीत धरे लय झींगुर झूम बजावय दादुर बाजा।। बने जग पालनहार करौ दुख दूर गिरा अब तो जल राजा।। लमावत शोर पुकार करे अब घाँव गजानन के भर ताजा।। 13/07/2024


बनौ हितवा मितवा सबके

उठावव हाथ बढ़ावव पाँव करे बर तो उपकार भलाई। बनौ हितवा मितवा सबके जग मा नित पावव मान बड़ाई।। सदा सच मारग मा चलके कर लौ जिनगी खुद के सुखदाई। गजानन ध्यान धरा सब ला झन झाँकय जी दुख के परछाई।। :::::::::::::::वाम सवैया::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 23/08/2024


सुन ले अरजी अब तो गुरु घासी

पुकारत हौं बन दीन दुखी, सुन ले अरजी अब तो गुरु घासी। करौं पग वंदन काज सँवारव, ये मन के मिट जाय उदासी।। दिये सत राह सदा सब ला बन के जग मा गुरु तँय अविनासी। जपे गुरु नाम गजानन जी कट जावय फाँस फँसे चउरासी।। ::::::::::::::::वाम सवैया:::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 02/09/2024


भावय तीज तिहार ग पोरा

धरे मइके अँचरा सुख आवय भावय तीज तिहार ग पोरा। लमावत हे सुध ला बहिनी करि आवत लेवनहार अगोरा।। झमाझम जी पहिरे लुगरा मन बाँध मया गठरी कर जोरा। नसीब गजानन तोर कहाँ बहिनी बिन हे बिरथा सुख कोरा।। ::::::::::::::::वाम सवैया::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 03/09/2024


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोहा छंद - गुरु (छत्तीसगढ़ी)

 दोहा छंद-  गुरु पग वंदन मँय करौं, दुनों हाथ ला जोर। अर्पन हे श्रद्धा सुमन, शुभमय हो नित भोर।।01 गावँव गुरु गुनगान ला, रोज सुबे अउ शाम। तोर ...