गाँव के हाल बेहाल हे
चीर के तो करेजा बतावै गजानंद जी गाँव के हाल बेहाल हे।
देख सुन्ना पड़े गाँव पारा गली खोर पैठा गुड़ी आज चौपाल हे।।
न्याय ला तो करे कोट थाना दरोगा सियानी लगे गोठ जंजाल हे।
छेक डारे नदी खार मैदान ला चीज पाये नही फेर कंगाल हे।।
ज्ञान के जोत
ज्ञान के जोत हा पाप ला नाशथे ले तराजू सही झूठ ला ताड़थे।
भाग के साथ दे मान हा डूबथे कर्म के साथ दे शान हा बाढ़थे।।
लोभ के फाँस हा भीतरी खोबथे खोपड़ी पाप के खूंट ला गाड़थे।
प्रेम गाड़ी जिहाँ खूब जी दौड़थे शांति के देवता द्वार मा माढ़थे।।
मोल नहीं जाने
चील गिद्धा बने ताकथे नोंच खाही लगे तोर ये खोपड़ी मांस ला।
मोल जाने नहीं मीठ बोली रहे दूर भागे फँसा पाप के फाँस ला।।
झूठ लागे सबो ज्ञान के गोंठ मानें नहीं तैं करे हाथ मा नाश ला।
सोंच के छोड़ माया मया काम ना आय दाई ददा जोर ले आस ला।।
धर्म के नाम मा लूट भारी
धर्म के नाम मा लूट भारी मचे देख ले आँख ला तैं बने खोल के। ढोंग पाखंड धंधा बना के पुजारी भरे जेब ला मीठ तो बोल के।। झूठ के साथ देबे कहूँ तो सुनौ जी पढ़ाई लिखाई बिना मोल के। धूर्त ढोंगी बने आज विद्वान बैठे गजानंद बोली कहे तोल के।।
ब्यर्थ तोरे लिखाई पढ़ाई
ढोंग पाखंड झूठा दिखावा छलावा करे खोखला सोच इंसान ला। मोह माया फँसे लोभ के लाभ मा बेच डारे दया प्रेम ईमान ला।। ब्यर्थ तोरे लिखाई पढ़ाई लगाये नहीं सत्य के बात मा ध्यान ला। राख ले तैं गजानंद बाँधे सदा संत विद्वान ज्ञानी गुरू ज्ञान ला।। :::::::::::::::::::गंगोदक सवैया:::::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" 16/07/2024
लेखनी ले लड़ाई लड़ौ
लेखनी ले लड़ाई लड़ौ जी सुनौ लेखनी मा बनाये रखौ धार ला। ढोंग पाखंड के नाश ला ये करे हे दिखा सत्य के राह संसार ला।। शब्द के बाण तीखा चला के करे हे बड़ा मीठ ये तो बने खार ला। लेखनी हा बढ़ावै दया ला मया ला गजानंद थामे उठे वार ला।। ::::::::::::::::::गंगोदक सवैया::::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 07/08/2024
नेकी चलौ थाम के
साँस ये तो मिले हे उधारी चुका कर्ज लौ राह नेकी चलौ थाम के। संग देहू पुजारी बने सत्य के पाठ ला तो पढ़ौ कर्म के नाम के।। छोड़ पूजा करे रूढ़ि पाखंड के पूज लौ देवता ला खुदे धाम के। हाथ लामै गजानंद जी दीन सेवा कहौं बात मैं तो सदा काम के।।
::::::::::::::::गंगोदक सवैया:::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 28/08/2024
संत गुरु घासी के कहानी संत घासी गुरू के कहानी जुबानी सुनौ जी लगा के सबो कान ला। मेट पाखंड के फाँस ला तो दिखाये हवै सत्य के राह इंसान ला।। जाल तोड़े गुरू जी छुआछूत के एक हे खून काया दिये ज्ञान ला। एक ही घाट पानी पिलाये सुनौ गाय चीता गजानंद नादान ला।। :::::::::::::::गंगोदक सवैया:::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 30/08/2024

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