कहाँ मिलथे गुरु के बिन ज्ञान
कहाँ मिलथे गुरु के बिन ज्ञान बिना गुरु के अँधियार हवे जग ।
धरे गुरु ज्ञान गुणी गुन सागर पार करे मझधार हवे जग ।।
बड़े जग मा नइहे गुरु ले सब देव घलो बलिहार हवे जग ।
गजानन के धर बात बरोबर जे बतलावय सार हवे जग ।।3
धरे सत मारग ले जिनगी चल
दिखे जग भोर अँजोर चकाचक काम बने सुमता धर के कर ।
बनै मितवा सब तोर सदा दिन तैं झन तो लिग़री पर के कर ।।
धरे सत मारग ले जिनगी चल काम कभू झन तैं डर के कर ।
गजानन ज्ञान बतावय लौ सुन नाम खुदे जग मा मर के कर ।।1
सुमता बिखरे दिखथे
बटे परिवार सुखी सुमता बिखरे दिखथे जइसे लँगड़ावत ।
धरे पर के बुध बाँटत हे सुख के कुरिया अब टाँग अड़ावत ।।
नदी बहिथे नरवा कहिथे मिलबो यमुना तट मा हरसावत ।
रखे रहिबे मन थोकुन धीरज भोर सबेर अँजोर उगावत ।।
करजा गुरु बालक के
नही उतरे करजा गुरु बालक के पहिरे पगड़ी अघुवावव ।
पुकारत हे बलिदान सदा हम ला झन जी बइठे सुरतावव ।।
थके नइहे सत के पग हा मिल साथ चलौ सुमता मढ़हावव ।
तभे बनही सच नेक समाज सुवारथ ला हिरदे फ़रियावव ।।
चलौ गढ़बो सुमता रसदा
लगे मड़ई कस भीड़ इहाँ बरदी कस गाय नही हरकावत ।
बने मुखिया कुछ भोग लगावय हे जइसे भइसा पगुरावत ।।
हवै बिजरावत दूसर जी हमला तुम हौ बइठे करलावत ।
चलौ गढ़बो सुमता रसदा झन जी धरिहौ कुमता इतरावत ।।
सुवारथ त्याग करौ
चलौ धर संत कबीर दिये सत मारग मा जिनगी गढ़ लौ सब ।
कहौ सबला अपने मितवा हित दीन गरीब करे बढ़ लौ सब ।।
सुवारथ त्याग करौ जग भोर तहाँ सुमता सिढ़ही चढ़ लौ सब ।
गजानन ज्ञान कहे गुन सागर आवव संत दया मढ़ लौ सब ।।2
इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
दहेज समाज कलंक हवै
दहेज समाज कलंक हवै मिल आवव ये अभिशाप मिटावव।
रखे मन लालच चीज दहेज कभू झन जी सुख नार जलावव।।
बहू असली धन मान सदा हर मातु पिता ग बिहाव रचावव।
दहेज नहीं घर शांति सहेज गजानन नेक विचार बढ़ावव।।
:::::::::::::::लवंग लता सवैया::::::::::::
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 15/07/2024
दिनोंदिन छीनत हें हक ला
दिनोंदिन छीनत हें हक ला मिलके सब तो अधिकार बचावव।
बढ़ावव पाँव करौ ललकार उठौ अब ताकत जोर बतावव।।
उठावय दुश्मन आँख कहूँ तब धूल चटावत मार भगावव।
गजानन बाँध चलौ सुमता गठरी अब वीर सपूत कहावव।।
:::::::::::: लवंग लता सवैया ::::::::::::::
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/08/2024

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