कहे बात गुरु संत घासी
बढ़ा पाँव आघू करव काम नेकी चलव थाम सच सत्य बोलव जुबाना ।
करम अउ धरम के सरेखा करे ले दिये मान सम्मान सब दिन जमाना ।।
कहे बात गुरु संत घासी कबीरा घुरे तन सरी ये बतासा समाना ।
करव झन कभू लोभ धन के घमंडी हवे एक दिन मोह जग छोड़ जाना ।।
जला जोत घासी बबा के
जला जोत घासी बबा के चलौ जी सबो गाँव बस्ती जयंती मनाबो ।
सजा फूल माला रखे पान थारी सुपारी धरे सेत झंडा चढाबो ।।
मनौती मनाबो तहाँ गीत पंथी सबो ला बबा के कहानी सुनाबो ।
बताये हवै ज्ञान गंगा भरे जी सुनौ संत मौका दुबारा न पाबो ।।
करौ काम नेकी सबो
धरौ बात ला संत घासी बबा के करौ काम नेकी सबो के भलाई ।
तभे मोर संतो मिले गा खुशी हा बुरा काम होवै सदा ही हँसाई ।।
अहिंसा धरौ राह सुंता चलौ जी करौ लोभ ना चीज नारी पराई ।
दया भाव राखे चलौ ये जमाना मिले मान सम्मान होवै बड़ाई ।।
नशा नाश करथे
नशा नाश करथे सुखी घर दुवारी करे खोखला तन धरे रोग भारी ।
जुआ जड़ बुरा लत पड़े ले बिके जी जमो घर रखाये कटोरी ग थारी ।।
बड़ा भागमानी मिले ये शरीरा कहे संत घासी चुका लौ उधारी।
करम नेक राखे चलव सब इहाँ जी चले ना बहाना कछू यम दुवारी ।।
नेता पड़े हे चपेटा
अभी देख नेता पड़े हे चपेटा दुनो हाथ जोरे परै पाँव भाई ।
कहूँ मेर बाँटे नशा दारु पैसा कहूँ मेर बोले ग रामा दुहाई ।।
करै पोठ वादा निभाहूँ सबो ला गली गाँव होही सबो के भलाई ।
बने हे अभी बोकरा वो बली के सुनौ बाद होही उही जी कसाई ।।
कहानी सखा ये सुदामा
सुनौ जी कहानी सखा ये सुदामा रहै द्वारिकाधीश संगे मितानी ।
गरीबी लचारी सुदामा बितावै भरै पेट ला माँग भिक्षा सियानी ।।
कहे ब्राह्मणी जाव कृष्णा सखा से मिले जीे दिही दान ग दानी।
रखे काँख मा चाउँरे पोटरी ला मिटाये गरीबी चले
वो निशानी ।।
भाजी चरोटा
नदी पार जाबो चलौ टोर लाबो बने राँध खाबो ग भाजी चरोटा। हवै ये दवाई भगे रोग राई तहूँ खा करे साफ ये पेट पोटा।। भरे खूब प्रोटीन विज्ञान बोले घटाथे वसा भार हे लोग मोटा। सुनौ खाय भाजी कभू भी गजानंद होये नहीं कोइ इंसान छोटा।।
उड़ाही मया पिंजरा तोड़ मैना
उड़ाही मया पिंजरा तोड़ मैना इँहे छूट जाही सबो चीज माया।
धरे मीत बानी कहाँ तैं सियानी गुमानी करे फोकटे रूप काया।।
पहाड़ा रटे मोर के ही हमेशा कभू पीर जाने नहीं तैं पराया।
गजानंद जी बाँट ले प्रेम पाले तहूँ हा सबो के बने नेह छाया।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 10/08/2024
मया राह मा छोड़ काँटा बिछाना
मया राह मा छोड़ काँटा बिछाना, मिटा द्वेष ईर्ष्या खुदे द्वंद खाई। लमा हाथ ला बाँध ले प्रीत धागा, उठा पाँव राखे सदाचार भाई।। उधारी मिले साँस ये तो हवै जी, चुका कर्ज ले थाम नेकी भलाई। गजानंद सम्मान पाबे तहूँ मान देबे बढ़ा के सबो ले मिताई।। :::::::::::::महाभुजंग प्रयात सवैया::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 06/09/2024

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें