गुरु घासी नाम कहाये
गाँव गिरौद पुरी जनमें अमरौतिन के कोरा भर पाये ।
खूब मया महँगू पलना सबके मन ला जी तैं हरसाये ।
पाठ पढ़ावत तैं समता जग मा गुरु घासी नाम कहाये ।
माथ नवा नित बंदन जी कर लौ बिगड़ी ला देय बनाये ।।
इन सुग्घर आये जी बरदानी
संत कबीर रहीम कहे रवि नानक घासी जी सतज्ञानी ।
हे रसखान कहे तुलसी जग बोहत हे जी निर्मल बानी ।
लेख लिखे सबके हित खातिर मानवता के पाठ बखानी ।
दूर कुरीति समाज करे इन सुग्घर आये जी बरदानी ।।1
संत कबीर लिखे दुख रोवत सोंच धरे मानौ हितकारी ।
संगत साधय देख छुआ जब जात भरे मारै पिचकारी ।
डूबत राहय जी नइया सुख पाप करै भारी किलकारी ।
छोड़ कहे जग के रुढिता उठ संत कबीरा जी ललकारी ।।2
सोंच रहीम बनौ सत साधक मारग साधौ जी सदचारी ।
देवत राह बने हित कारक लोगन झोकौं जी फलचारी ।
रंग रहीमन साध चलौ दुनिया तब लागै जी मनुहारी ।
खूब कमावव नाम भले पर जीवन राखौ जी बलिहारी ।।3
संत कहे रवि दास सुनौ रख लौ अपने जी ये मन चंगा ।
ढोंग भरे दुनिया तुम छोड़व जान कठौती मा बस गंगा ।
पूरन होवय जी सब कारज होय नही काहीँ कुछ खंगा ।
रंग भरौ सत के जिनगी झन होवन दौ कारी बदरंगा ।।4
नानक पंगत साध चले सब बोल सुनावै जी गुरबानी ।
हाथ उठा गुरु नानक बोलय दूर भगावौ जी मनमानी ।
बंद करौ अब पूजन ये पथरा खुद संवारौ जिनगानी ।
धर्म नही बस कर्म बड़े जग सोंच रखौ जी ये मन ठानी ।।5
संगत पंगत अंगत संग रखे गुरु घासी गोठ सुहानी ।
हे मनखे सब एक बरोबर पी लव ऐके घाट म पानी ।
जाप करे सतनाम फिरे लहरावत झंडा श्वेत निशानी ।
संत कहाय शिरोमणि जे दुनिया गुरु घासी नाम गियानी ।।6
जे रसखान धरे जब मारग रंग चढ़े कान्हा गिरधारी ।
मोह मया जग के बिरथा सब जीवन वारे गोप मुरारी ।
रंग रचे करुणा निधि सागर प्रेम रखे जी खोल पिटारी ।
जोग लगे जब साँवरिया रसखान कहे भागै अँधियारी ।।7
निर्गुन राम बसा तुलसी मन ग्रन्थ लिखे जी राम कहानी ।
राम चरित्तर मानस जी जानव तुलसी के निर्मल बानी ।
राम रमायन गावय सुघ्घर बात बतावै पोठ सियानी ।
नाम भये तुलसी जग मा तरसे तबला जी गाँव निशानी ।।8
रंग लहू तैं एक बताये
माँ अमरौतिन के ललना बनके गुरु घासी दास कहाये। खोज करे सत ज्ञान चले अउ छात पहाड़ी ध्यान लगाये।। मानवता जग पाठ पढ़ा गुरु सत्य पुजारी नाम धराये।। एक सबो मनखे-मनखे कहि रंग लहू तैं एक बताये।। 29/06/2024
एक सबो मनखे-मनखे
एक सबो मनखे मनखे जग मा गुरु घासीदास बताये। एक हवै तन चाम घलो अउ रंग लहू भी एक समाये।। नीर हवा धरती नभ एक सबो महतारी कोंख ल आये। छूत अछूत महाविकराल गजानन येला कोंन बनाये।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 30/07/2024
बढ़िया जग मा हो नाम कहानी
वीर शहीद जवान किसान महान तिरंगा देश निशानी। प्रेम दया सब मा बसथे करथे भुइँया सेवा बन दानी।। गाँव सुहावय बोल मिठावय नीक लगे हे मीत मितानी। कर्म गजानन लोग करैं बढ़िया जग मा हो नाम कहानी।। ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 30/07/2024
मीत मया के गाँव गँवागे
स्वार्थ धरे मनखे दिखथे अब मीत मया के गाँव गँवागे। गोठ सियानन के न धरे अब छाँव गुड़ी चौपाल नँदागे।। छेक डरे परिया धरसा गरुवा मन के गौठान रुँधागे। टूटत हे परिवार गजानन आपस मा ही बैर भँजागे।। ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 31/07/2024
धाम गिरौदपुरी सत वंदन
धाम गिरौदपुरी सत वंदन माथ लगा के चंदन माटी। मान बढ़ा अउ नाम कमा जग मा बनके बेटा तँय खाँटी।। घात लगा जब वार करै तब ठोकय बैरी के तन काँटी। झूठ पसंद गजानन जी नइहे सतनामी के परिपाटी।। ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 01/08/2024
कोंन बड़े भगवान
कोंन बड़े भगवान इहाँ बतलावत तो मोला सँगवारी ।
देव बिराजय लाख जिहाँ कइसे तब होवै जी उजियारी ।।
बात बतावत हौं सुन लौ सब खेल हवे ये लूट ग भारी ।
एक सधे सब तो सधते सब चक्कर मा छाये अँधियारी ।।
सतनाम लखे
चंदन माथ सजे बढ़िया अउ पाँव खड़ाऊ हे गुरु घासी।
जाप करे सतनाम लखे सत बोलत हे जी वो अविनासी।
मानुष ये तन हा बिरथा झन होवय संगी फेर उदासी।
देव सबो घट मा अपने तँय काबर ढूँढे जी जग काँसी।।
पेड़ लगावव पेड़ बचावव
पेड़ लगावव पेड़ बचावव ये सबके हे जी सँगवारी ।
देवत हे सबला छइँहा फल औषधि जे हावै गुनकारी ।
खींचत लावय बादर ला बरसा मन नाचै हो मतवारी ।
ये जिनगी अनमोल हवे बड़ पेड़ लगावैं जी सदचारी ।।
कोरोना डर छाये
मौत बने जग मा अब देखव दुश्मन कोरोना डर छाये ।
हे भगवान कहाँ छुपगे तँय कोंन इहाँ चोला ल बचाये ।
दे बरदान भला कर दे परछो तब प्राणी तोर ग पाये ।
आस धरे सब हे बइठे अब कोंन बिमारी दूर भगाये ।।
इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
खेत किसानी पर्व हरेली
आज मनावत गाँव घरो घर खेत किसानी पर्व हरेली। नाचत दादुर गावत झींगुर मोर पपीहा हा बरपेली।। नीक लगे भँवरा मँडरावत बाग खिले हे फूल चमेली। देख रचारच बाजत झूमत खूब करे गेड़ी अठखेली।। ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 04/08/2024
हिंदी कहलाये
संत कबीर रहीम दिये उपदेश इहाँ हिंदी कहलाये। हे सुमता समता सब मा परिवेश इहाँ हिंदी कहलाये।। प्रेम दया सहयोग सुराज विशेष इहाँ हिंदी कहलाये। बाँटय ज्ञान गजानन भारत देश इहाँ हिंदी कहलाये।। ::::::::::::::::मोद सवैया::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 14/09/2024
शोषण अत्याचार बढ़े हे
देखव तो अब आँख उठा ठग शोषण अत्याचार बढ़े हे। राज सिंहासन मा बइठे बर झूठ लबारी पाठ पढ़े हे।। लूटत हें धन मान सबो डर धर्म दिखा व्यापार गढ़े हे। सोच बतावव आप गजानन ढोंग छलावा कोंन कढ़े हे।। :::::::::::::::::::मोद सवैया:::::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 20/09/2024

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