गुरु महिमा
सादा चिनहा ले के आये, संत घासीदास।
ताने छाती जीहौ कहिगे, वीर बालकदास।।
सदा ग्यान के बात बताये, भरे मन मा आस।
कंचन जइसे काया चमकय, नमन अम्मरदास।।
खपरी तेलासी गुरु महिमा, घरो घर पहिचान।
सतनामी कुल आके मिलगे, भक्त तेली जान।।
छोड़ निशानी बाबा बढ़गे, सत्य करे प्रचार।
आस लगाये महिमा जाने, संतो गुरु विचार।।
अइसे नाम कमाये बाबा, दिये सत के ग्यान।
अम्मर बालक गुरु के महिमा, सुनव संत सुजान।।
अमरदास गुरु अम्मर समाधि, चटुवा पुरी धाम।
बहरूपिया चाल मा फँसके, करिन काम तमाम।।
मान दिये अंग्रेजी शासन, भेंट हाथी पाय।
शूरवीर राजा के पदवी, गले लिये लगाय।।
औराबाँधा माटी बंदव, वीर बालक दास।
अमर शहादत गुरु स्थल हे, लगे देखे आस।।
शंकर छंद- संत गुरु घासीदास जग मा सत के अलख जगाये, संत घासीदास। ढोंग रूढ़ि पाखंड मिटाये, अउ मिटाये त्रास।। बँटे रहिस जब जाति-पाति अउ, धरम मा इंसान। मनखे ला मनखे के असली, दिये तब पहिचान।। करे एकजुट गुरु आंदोलन, चला के सतनाम। सत्य प्रतीक गड़ाये बाबा, सेत जोड़ा खाम।। फहर-फहर सादा के झंडा, सुमत के फहराय। छत्तीसगढ़ पावन माटी मा, जनम धर गुरु आय।। दीन-हीन के बने मसीहा, करे दुख ला दूर। करत रहिन जब सामंती मन, जिये बर मजबूर।। नारी के उत्थान करे अउ, दिलाये अधिकार। गजानंद कर जोर करत हे, तोर जय जयकार।। ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़)20/08/2026
कलम सिपाही
कलम चलावव कलम सिपाही, हाल जग के देख।
दशा दिशा अउ राह सुझावय, लिखव अइसन लेख।।
कलम बँधे हे ताकत बहुते, इही कवि तलवार।
समता सुमता ममता स्याही, जुलुम बर अंगार।।
कलम चलाइस सन्त कबीरा, हाल देख समाज।
ढोंग रूढ़िवादी बर बनगिस, कलम वोकर गाज।।
अंधभक्ति बर कलम चलाइस, सन्त गुरु रविदास।
बसे कठौती मा गंगा जी, रहे मन विश्वास।।
शब्द कलम जी गुरु घासी के, कहे मनखे एक।
जाति पाति के बँधना तोड़िस, काम करगिस नेक।।
आजादी बर कलम चलाइस, सुभाष चंद्र बोस।
क्रांति कलम मा देश उमड़गे, भरे मन मा जोश।।
संविधान बर कलम चलाइस, भीम जी साहेब।
सत्य कहत हँव भीम बदौलत, कलम सबके जेब।।
देश राज खुद स्वाभिमान बर, कलम लौ कवि थाम।
कलम दिलाही नाम जगत मा, कलम गुरु के नाम।।
बँटवारा
दया मया बँटवारा होगे, संग खेती खार।
भाई-भाई माते झगरा, दूर हे परिवार।।
जनम विधाता दाई बटगे, ददा होगे दूर।
बहिनी तरसे मइकारो बर, आज हो मजबूर।।
घर के भेदी लंका ढावय, कहे बात सियान।
लिगरी चारी पर के करथे, छोड़ काम धियान।।
संग सबो जन राहव भाई,चलय जब तक सांस।
गजानंद के मानौ कहना,मिल निकालव फांस।।
आजादी
याद करव कुरबानी ऊँखरो, नही जावव भूल।
हाँसत हाँसत आजादी बर, गइन फँदा झूल।।
आन बान के लडिंन लड़ाई, लगा तन ला दाँव।
बाँध कफ़न सर आजादी के, उठाइन उन पाँव।।
झुकन नही दिंन मर के भी उन, तिरंगा के शान।
आजादी बर खड़े रहिंन उन, अपन सीना तान।।
इंकलाब जयकार लगावय, खुदी शेखर बोस।
कतरा कतरा लहू बहादिंन, भरे तन मा जोश।।
सुनत फिरंगी थर-थर काँपय, चन्द्र शेखर नाम।
लाल बाल जी पाल करय जब, साथ मिलके काम।।
लक्ष्मी बाई तीर फिरंगी, चाँट खाइस धूल।
सत्य अहिंसा बापू के जी, बनिस चरखा शूल।।
पेड़ बचाबो आवव मिलके
कहाँ बाचगे रुखवा राई, कहाँ रइगे छाँव।
चौड़ीकरण सड़क होवत हे, मिलत नइहे ठाँव।।
ताते तात हवा हर बहथे, तिपत तरुवा घाम।
सजा पेड़ काटे के मिलथे, नाम जग बदनाम।।
तन मन धन ले ऊपर वन हे, मोर कहना मान।
पेड़ बचाबो देश बढ़ाबो, बढ़े भारत शान।।
नील गगन ला खींचत लाथे, पानी लाये घोर।
पेड़ औषधी जिनगी देथे, जड़ी बूटी जोर।।
पेड़ कटाई रोकव संगी, इही सुख के खान।
गाँव शहर ला हरियर रखबो, मिले साथ मितान।।
पेड़ बचाबो आवव मिलके, इही जिनगी सार।
हरा भरा तब जिनगी लगही, हरा जग संसार।।

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