गुरु महिमा
सादा चिनहा ले के आये, संत घासीदास ।
ताने छाती जीहौ कहिगे, वीर बालकदास ।।
सदा ग्यान के बात बताये, भरे मन मा आस ।
कंचन जइसे काया चमकय, नमन अम्मरदास ।।
खपरी तेलासी गुरु महिमा, घरो घर पहिचान ।
सतनामी कुल आके मिलगे, भक्त तेली जान ।।
छोड़ निशानी बाबा बढ़गे, सत्य करे प्रचार ।
आस लगाये महिमा जाने, संतो गुरु विचार ।।
अइसे नाम कमाये बाबा, दिये सत के ग्यान ।
अम्मर बालक गुरु के महिमा, सुनव संत सुजान ।।
अमरदास गुरु अम्मर समाधि, चटुवा पुरी धाम ।
बहरूपिया चाल मा फँसके, करिन काम तमाम ।।
मान दिये अंग्रेजी शासन, भेंट हाथी पाय ।
शूरवीर राजा के पदवी, गले लिये लगाय ।।
औराबाँधा माटी बंदव, वीर बालक दास ।
अमर शहादत गुरु स्थल हे, लगे देखे आस ।।
कलम सिपाही
कलम चलावव कलम सिपाही, हाल जग के देख ।
दशा दिशा अउ राह सुझावय, लिखव अइसन लेख ।।
कलम बँधे हे ताकत बहुते, इही कवि तलवार ।
समता सुमता ममता स्याही, जुलुम बर अंगार ।।
कलम चलाइस सन्त कबीरा, हाल देख समाज ।
ढोंग रूढ़िवादी बर बनगिस, कलम वोकर गाज ।।
अंधभक्ति बर कलम चलाइस, सन्त गुरु रविदास ।
बसे कठौती मा गंगा जी, रहे मन विश्वास ।।
शब्द कलम जी गुरु घासी के, कहे मनखे एक ।
जाति पाति के बँधना तोड़िस, काम करगिस नेक ।।
आजादी बर कलम चलाइस, सुभाष चंद्र बोस ।
क्रांति कलम मा देश उमड़गे, भरे मन मा जोश ।।
संविधान बर कलम चलाइस, भीम जी साहेब ।
सत्य कहत हँव भीम बदौलत, कलम सबके जेब ।।
देश राज खुद स्वाभिमान बर, कलम लौ कवि थाम ।
कलम दिलाही नाम जगत मा, कलम गुरु के नाम ।।
बँटवारा
दया मया बटवारा होगे, संग खेती खार ।
भाई भाई माते झगरा, दूर हे परिवार ।।
जनम विधाता दाई बटगे, ददा होगे दूर ।
बहिनी तरसे मइकारो बर, आज हो मजबूर ।।
घर के भेदी लंका ढावय, कहे बात सियान ।
लिगरी चारी पर के करथे, छोड़ काम धियान ।।
संग सबो जन राहव भाई,चलय जब तक सांस ।
गजानंद के मानौ कहना,मिल निकालव फांस ।।
आजादी
याद करव कुरबानी ऊँखरो, नही जावव भूल ।
हाँसत हाँसत आजादी बर, गइन फँदा झूल ।।
आन बान के लडिंन लड़ाई, लगा तन ला दाँव ।
बाँध कफ़न सर आजादी के, उठाइन उन पाँव ।।
झुकन नही दिंन मर के भी उन, तिरंगा के शान ।
आजादी बर खड़े रहिंन उन, अपन सीना तान ।।
इंकलाब जयकार लगावय, खुदी शेखर बोस ।
कतरा कतरा लहू बहादिंन, भरे तन मा जोश ।।
सुनत फिरंगी थर थर काँपय, चन्द्र शेखर नाम ।
लाल बाल जी पाल करय जब, साथ मिलके काम ।।
लक्ष्मी बाई तीर फिरंगी, चाँट खाइस धूल ।
सत्य अहिंसा बापू के जी, बनिस चरखा शूल ।।
पेड़ बचाबो आवव मिलके
कहाँ बाचगे रुखवा राई, कहाँ रइगे छाँव ।
चौड़ीकरण सड़क होवत हे, मिलत नइहे ठाँव ।।
ताते तात हवा हर बहथे, तिपत तरुवा घाम ।
सजा पेड़ काटे के मिलथे, नाम जग बदनाम ।।
तन मन धन ले ऊपर वन हे, मोर कहना मान ।
पेड़ बचाबो देश बढ़ाबो, बढ़े भारत शान ।।
नील गगन ला खींचत लाथे, पानी लाये घोर ।
पेड़ औषधी जिनगी देथे, जड़ी बूटी जोर ।।
पेड़ कटाई रोकव संगी, इही सुख के खान ।
गाँव शहर ला हरियर रखबो, मिले साथ मितान ।।
पेड़ बचाबो आवव मिलके, इही जिनगी सार ।
हरा भरा तब जिनगी लगही, हरा जग संसार ।।

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