मंगलवार, 16 अगस्त 2022

विधाता छंद-

कहे हे संत घासी हा

कहे हे संत घासी हा, बसा ले नाम काया मा ।

कहाँ तैं तो पड़े भाई, उधारी मोह माया मा ।

रखे हे का बता दे तैं,  सगा मोरे पराया मा ।

उड़ा जाही इही हंसा, जुड़ा जी ज्ञान छाया मा ।।


सबो हे एक भाई

सबो हे एक भाई ता, बता का के लड़ाई हे ।

रहौ सुंता धरे बाँधे, इही मा तो बड़ाई हे ।

मनावौ ईद दीवाली, इहाँ रोजे मड़ाई हे ।

रखे सुंता सबेरा ला, उठौ ले अंगड़ाई हे ।।

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