पाँव बढे सत मारग
पाँव बढे सत मारग मा अउ हाथ बढ़े सत कारज खातिर ।
देखव लूटत जी अब चोर फिरे पहिचान करौ ठग शातिर ।
पाप छले बनके छलिया जग मा बइठे चुपके अब माहिर ।
काबर हौ सिधवा बनके अब लूटत हे सब इज्जत बाहिर ।।
जग पाप भरे
लौ चतवार बने सुख मारग ला झन झाकव जी मुँह दूसर ।
देख हवे जग पाप भरे तन कूटत हाथ धरे अब मूसर ।।
हे अँधियार भरे मन मा करिया घुघवा नरियावय घूसर ।
जाँगर राहत जोर दया धन बाँट मया झन सो तँय फूसर ।।
तैं करिया करिया रहिगे
तैं करिया करिया रहिगे नइ तो बरसे मन झूमर बादर ।
रोवत हे सब माथ धरे अउ तैं हस सोवत ओढ़ ग चादर ।।
मैं कइसे तन चीर दिखावव बाजत हे मन मा दुख मांदर ।
तैं झन जी बनबे लबरा नइ तो कइसे करही जग आदर ।।
पालनहार तहीं जग के अब तो भर दे सबके सुख सागर ।
देख परे सब जंगल बंजर खेत- सुखावत हे तन जाँगर ।।
रोवत हे मन अंतस हा बइठे ठलहा बइला अउ नाँगर ।
हे बदरा अब तो बरसा जल होय ख़ुशी सब दू मन आगर ।।
महिमा तिरिया
भेद करै लड़की लड़का करिया करिया मन ओकर हावय ।
जानव जेकर से दुनिया सिरजे ममता रुप मातु कहावय ।।
कोंख रखै जब नौ महिना सहिके दुख ला हमला जग लावय ।
हे महिमा तिरिया जग वेद पुरान घलो गुनगान ल गावय ।।
बोझ हवे लड़की कहिके कुछ चाहत हे लड़का जनमे घर ।
मानय जी लड़का घर के कुल ता लड़की बनही धन दूसर ।।
सोंच रखै अइसे मनखे कब होवय जी इखरो मन साक्षर ।
आवव मान बढ़ाइन जी मिलके बस जानव एक बरोबर ।।
हे लछमी दुरगा जइसे जग मा अब ये अबला न कहावय ।
हाथ धरे कहुँ खप्पर ला तब दुश्मन के सिर काट मढ़ावय ।।
ऊँच हिमालय मा चढ़गे अउ चाँद धरे पग मान बढ़ावय ।
पूजत हे जग नौ दिन ला महिमा सुनके मन खूब सुहावय ।।
इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
बादर चादर ओढ़ सुते
बादर चादर ओढ़ सुते तँय देख सुखावत खेत बिना जल। सोच रखे करिया फरिया तँय होत किसान दुखी मन घायल।। अन्न बिना कइसे भरही जग पेट किसान बता कुछ हे हल। टूट यकीन कभू मत जावय धार बहा सुख पावन निर्मल।। :::::::::::::::::किरीट सवैया::::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 19/07/2024
भारत देश महान हवै
भारत देश महान हवै, जग मा बगरे यश मान दिनों दिन। राहँय लोग सदा मिल आपस, प्रेम दया सुमता सुख बाँटिन।। पावँय लोग सबो अधिकार, बढ़े झन द्वेष विकार ल रोकिन। गर्वित भूमि गजानन भारत, नाम विकास गढ़े नित सोचिन।। ::::::::::::::::किरीट सवैया::::::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 14/08/2024
नाश नशा बरबाद करे जिनगी
नाश नशा बरबाद करे जिनगी तन मा घुन रोग समावय। ध्यान रहै नइ तो घर के लइका खुद के धन मान लुटावय।। नाम पड़े दरुहा गँजहा घिनहा कहि लोग मजाक उड़ावय। छोड़ नशा सुख थाम गजानन शांति बसा मन मा समझावय।। ::::::::::::::::: किरीट सवैया:::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 04/09/2024

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