सुनौ जी गजानंद
लिखौ छंद दोहा सवैया बने देश पीढ़ी भलाई धरे भाव ला ।
लिखौ संगवारी दशा हाल देखे तभे दे ग पाहू दिशा गाँव ला ।
जरे चाम हे घाम मा मोर भाई लगा पेड़ पाबो मया छाँव ला ।
सुनौ जी गजानंद नेकी धरौ भेद के तो अघौना मिटा घांव ला ।।
सुनौ बात भाई गजानंद के
सुनौ बात भाई गजानंद के जी बिना काम के ना मिले नाम हा ।
चले धीर बाँधे सदा जे जमाना मिले हे उही ला सुखी धाम हा ।
हवै छोड़ जाना सबो ला इँहे जी मिले रूप माटी मया चाम हा ।
चलौ राह नेकी दया भाव राखे तभे तो मिले जिंदगी दाम हा ।।
गजानंद के तैं कहाँ बात माने
धँधाये हवे पिंजरा बीच मैना कटे आज देखौ दुनो पाँख जी ।
उड़े जेन आगास मा दम्भ हाके मिटे वोखरे शान के साख जी ।
कहाँ काम आये सकेले मया मोह साथी सबो हा मिले राख जी ।
गजानंद के तैं कहाँ बात माने मुँदाये पड़े लोभ मा आँख जी ।।
धरे ढोंग पाखंड
धरे ढोंग पाखंड राखे दिखावा करे काम कौंआ छुपा जात ला ।
लगा माथ लाली भुलाये कहाँ तैं जपे नाम दूजा भुला बात ला ।
चुपेचाप खाली रहौ ना कभू जी बनौ ना सगा भात के खात ला ।
चलौ जी मनाबो रिसाये सगा ला दिखाबो नवा चाँदनी रात ला ।।
एकता मा बड़ा शक्ति
हवै एकता मा बड़ा शक्ति भाई अकेला चना भाड़ फोरे कहाँ ।
सुनौ बात मोरे धियाने लगाये सदा संग राखौ मया ला उहाँ ।
बटे रामनामी बटे सूर्यवंशी बहे राग धारा अनेको जिहाँ ।
कहाँ मान पाहौ भुलाके बबा ला चले लौट आहू सबो जी इहाँ ।।
नेता
गली खोर छागे पटागे दुवारी हवै देख नेता बड़े जी बड़े ।
दिखे छाप पंजा खिले फूल हाथी दुनो हाथ ला जोर कोनों खड़े ।
बने जान लौ छाप येला कहे जी सबो आप के वोट येमा पड़े ।
करे बात जादा रखे संग वादा बने बाद नेता इही हा अड़े ।।
इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
नँदागे बबा के सियानी जुबानी
नँदागे बबा के सियानी जुबानी नँदागे सुनौ गाँव चौपाल हे। फिरे कोट थाना अभी के जमाना लुटा चीज ला लोग कंगाल हे।। कटागे मया के लगे पेड़ डाली सुखागे दया के नदी ताल हे। गजानंद भारी दिखावा छलावा बिछे आज धोखा दगा जाल हे।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 22/07/2024
लगाबो चलौ पेड़ दू चार ठो
लगाबो चलौ पेड़ दू चार ठो खेत के पार दाई ददा नाम मा। हवै पेड़ तो लाभकारी सुनौ जी सबो ला दिये छाँव ये घाम मा।। जड़ी फूल पाना तना जी घलो आय भारी दवाई दवा काम मा। गजानंद ये खींच पानी गिराथे कराथे किसानी धरा धाम मा।। 🖊️इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 28/07/2024
मया मोल जानें नहीं
मया मोल जानें नहीं तो कभू तैं छलावा करे लोभ ला थाम के। बने मोह माया पुजारी फिरे तैं करे साँस ला फोकटे काम के।। लगाये नहीं ध्यान ला सत्य के राह माला जपे झूठ के नाम के। गजानंद आखंड पाखंड थामे बने भक्त तैं ढोंग के धाम के।। ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 12/08/2024

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