मंगलवार, 16 अगस्त 2022

नफ़रतों का उड़ रहा धूल

 "8889747888"

ईंजी.गजानंद पात्रे"सत्यबोध"


नफरतो का उड़ रहा है धूल,

ईर्ष्या का बरस रहा बादल है।

क्रोध अहं का बहता नदियाँ,

पाप आँखों में सजी काजल है।।


टूट रहा है विश्वासों का धागा,

बन्धुतत्व हो रहा चकनाचूर है।

प्रेम करुणा तो पत्थर बना है,

मदद की हाथ अब मजबूर है।।


मोह माया का लगा बजरिया,

बिक रहा दया धरम ईमान है।

भाई भाई का दुश्मन बना है,

समझो कुरुक्षेत्र का मैदान है।।


अमन चैन की मची है तौबा,

गुमनाम अब सुख-आनंद है।

समझो परखो ये बात हमारी,

कहत फिरे भाई गजानंद है।।


इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोहा छंद - गुरु (छत्तीसगढ़ी)

 दोहा छंद-  गुरु पग वंदन मँय करौं, दुनों हाथ ला जोर। अर्पन हे श्रद्धा सुमन, शुभमय हो नित भोर।।01 गावँव गुरु गुनगान ला, रोज सुबे अउ शाम। तोर ...