* *गुरु विनय*
दे सतगुरु सत छाया
तोर चरण दासी
अर्पण ये मन काया
मन जोत कलश साजे
ये तन हे बाती
शुभ मंगल धुन बाजे
बिनती हे गुरु ज्ञानी
घट घट आप बसौ
दे ज्ञान सुधा बानी
गुरु सतबानी बोले
एक सबो मनखे
सत द्वार सुमत खोले
रख मानवता बाबा
जोत जला सत के
मन्दिर मस्जिद काबा
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर ( छत्तीसगढ़ )
-------------माहिया छंद-----------
🙏 गुरु विनय🙏
घपटे हे अँधियारी
तोर सहारा मैं
गुरु कर दे उजियारी
हो गुरु बालक बाना
काम करौं नित सत
सुमता अब हे लाना
मुड़ पगड़ी सत बाँधौ
पाँव बढ़े कारज
नित हाथ भला साधौं
हर लौं दुख दुखिया के
छाँव सुमत के मैं
सँगवारी सुखिया के
मैं बेटा सतनामी
सेत धजा थामे
सतगुरु के अनुगामी
✍🏻 इंजी. गजानंद पात्रे *"सत्यबोध"*
बिलासपुर ( छत्तीसगढ़ )
माहिया छंद- गुरु विनय
गुरु दर्शन अभिलाषी
माथ नवावँव मैं
हे सतगुरु अविनाशी
भोर सुनौं गुरु बानी
आव बसौ मन मा
ज्ञान धरा गुरु ज्ञानी
प्रेम दया मन राखौं
किरपा कर सतगुरु
नित शुभ बोली भाखौं
शुभ बेला दिन आये
जीव चराचर सब
गुरु महिमा ला गाये
नइ भटके सत राही
जे नाम जपे गुरु
सुख धाम परम पाही
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर ( छत्तीसगढ़ )
सादर समीक्षार्थ- (21/05/2025) विधा- *माहिया छन्द* विषय- (फूल) नित फूल बहारो में विचरण करते हैं मन मस्त नजारों में।। खिलते जब गुलशन में रंग बिरंगे गुल मधुरम मधुबन में।। गूँजन भौरें करते बैठे कलियों पर मुख मधुरस भरते।। देवों के दर चढ़ते गूँथ सुमन गजरा दुल्हन यौवन गढ़ते।। वीरों के पथ सजते इठलाते किस्मत जब शहनाई बजते।। ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/05/2025

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