हिंदी- आल्हा छंद (भीम राव अम्बेडकर)
एक मसीहा भीम राव जी, जिस पर हम सबको है नाज ।
बहुजन पिछड़े समाज दलितों, का जो बना मुखर आवाज ।।
बचपन से झेला जिसने है, छुआछूत का भारी दंश ।
सौदागर थे समाज के जो, छुपे हुए बन काला हंस ।।
शूल बिछा था पग पग में जब, जातपात का था अंगार ।
झुलस गया था तन मन सारा, फिर भी ना माने वे हार ।।
सीना ठोक कहा भीमा ने, अपना भी है एक समाज ।
एक मसीहा भीम राव जी, जिस पर हम सबको है नाज ।।1
माथ पसीना टप टप टपके, मुस्काये पर दुख को देख ।
ज्ञान कर्म खुद कड़ी लगन से,स्वयं भाग्य का बदला लेख ।।
किया भीम ने हासिल डिग्री, खोकर अपना घर परिवार ।
भला चुका कैसे पायेंगें, बाबा तेरा ये उपकार ।।
कर्मवीर तुम धीर साहसी, तर्कशील योद्धा जाबांज ।
एक मसीहा भीम राव जी, जिस पर हम सबको है नाज ।।2
दर्द पीड़ितों का देखा जब, भूख गरीबी अत्याचार ।
थाम कलम तब भीम राव ने, कदम बढ़ाया कर ललकार ।।
नहीं देखना पीछे मुड़कर, दिया सफलता तूने राज ।
एक मसीहा भीम राव जी, जिस पर हम सबको है नाज ।।3
रहो संगठित शिक्षित बनकर, संघर्ष करो नारा थाम ।
नेतृत्व ज्ञान का दीप जलाने, करना है अब मिलकर काम ।।
जिस मुकाम पर आज खड़े हैं, भीम राव का है वरदान ।
गजानंद जी सच कहता है, यही मसीहा जग भगवान ।।
समानता अधिकार लिये अब, करना है हमको आगाज ।
एक मसीहा भीम राव जी, जिस पर हम सबको है नाज ।।4
घर से निकलो मैदानों में, करता है सुन भीम पुकार ।
बदल रहे हैं संविधान को, राजनीति में कुछ गद्दार ।।
हो सपूत गर भीम राव का, भर लो रग में जोश जुनून ।
संविधान की रक्षा करने, अर्पित कतरा कतरा खून ।।
रग रग में हम भीम बसा लें, हर दिल में हो जिंदा आज ।
एक मसीहा भीम राव जी, जिस पर हम सबको है नाज ।।5
इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
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*जागो- जागो बहुजन भाई*
आओ उतरें मैदानों में, लेने को अपना अधिकार।
बदल रहें हैं आरक्षण को, सत्ता पर बैठे गद्दार।।
उठो नींद से अब तो बहुजन, करना मिलकर जोर दहाड़।
शक्ति एकजुटता को निशदिन, रहें विरोधी देखो ताड़।।
क्रीमीलेयर लागू करने, देख बिछाये हैं वे चाल।
उनसे लड़ने को तुम सुन लो, आरक्षण है असली ढाल।।
आरक्षण है भागीदारी, समझ नहीं इसको खैरात।
जिस दिन बहुजन जाग उठेगा, तुम्हें दिखा देगा औकात।।
युगों- युगों से बहुत सहें हैं, हम तो शोषण अत्याचार।
अब न सहेंगे जुल्म ज्यादती, संविधान पर क्रूर प्रहार।।
जातिवाद का भेद मिटाओ, जो देता हमकों नित घाव।
समानता तब सब में होगा, मिट जायेगा मन अलगाव।।
आरक्षण से समतामूलक, होगा समाज का निर्माण।
संविधान को आज विरोधी, तुले हुए करने निष्प्राण।।
आरक्षण पर आँख उठा जो, मच जायेगी हाहाकार।
हिल जायेगी शासन सत्ता, काँप उठेंगे सब गद्दार।।
जागो- जागो बहुजन भाई, पहचानों दुश्मन है कौन।
बाँध कफ़न सर पे अब आओ, समय नहीं रहने को मौन।।
भीम नाद से गूंज उठेगा, चप्पा-चप्पा अब गलियार।
गजानंद जी आरक्षण है, सभी बहुजनों का अधिकार।।
---इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 21/08/2024
आल्हा छन्द- *बाबा साहब भीम महान*
सबके आँसू पोछ गए जी, बाबा साहब भीम महान।
नारी को अधिकार दिए सम, दलित शोषितों का उत्थान।।
समता मूलक संविधान का, दिए देश को हैं उपहार।
सभ्य समाज बनाने को वे, खोल दिये शिक्षा का द्वार।।
भीम बदौलत मिला सभी को, रोटी कपड़ा और मकान।
सबके आँसू पोछ गए जी, बाबा साहब भीम महान।।
पाट विषमता की खाई को, किये सभी मानव को एक।
धर्म नहीं जग कर्म बड़ा है, भीम विचार दिए हैं नेक।।
विश्व बंधुता भाईचारा, हम सबको है रखना ध्यान।
सबके आँसू पोछ गए जी, बाबा साहब भीम महान।।
संविधान पर अब तो खतरा, रहा मंडरा चारों ओर।
जागो बहुजन जागो पिछड़े, रहो नहीं अब तो कमजोर।।
शेर समान दहाड़ लगाने, संविधान का थाम कमान।।
सबके आँसू पोछ गए जी, बाबा साहब भीम महान।।
गजानंद जी संविधान से, आज खड़ा है भारत देश।
याद करो पहले कैसा था, मानव समाज का परिवेश।।
बहरे को तो कान मिला अब, गूँगे को तो मिली जुबान।
सबके आँसू पोछ गए जी, बाबा साहब भीम महान।।
✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 14/04/2025
आल्हा छन्द- बाबा साहब भीमराव अंबेडकर
पावन माटी महू धाम को, वंदन करके बारम्बार।
गजानंद है आज सुनाता, भीम राव का जीवन सार।।
चौदह अप्रैल अट्ठारह सौ, दिन है इंक्यानबे महान।
पिता रामजी माता भीमा, के घर जन्म लिए संतान।।
धर्म परायण माता ऐसी, पिता सधे जी पंथ कबीर।
सैनिक सूबेदार राम जी, भीमा मन की बहुत सुधीर।।
लालन पालन अनुशासित था, भीम राव का बचपन काल।
पिता पेड़ बन छाया देता, माँ तो सुख ममता की डाल।।
प्रथम पढ़ाई दापोली में, और सितारा कर रहवास।
सन उन्नीस सौ सात में कर ली, मैट्रिक कक्षा उसने पास।।
अभिनंदन करने को आतुर, गुरु कृष्णा अर्जुन श्री मान।
बुद्ध चरित्र एक पुस्तक को, भीम राव को किये प्रदान।।
दी उपाधि जब फेलोशिप की, गायकवाड़ सिया जी राव।
कर ली स्नातक पास परीक्षा, कालेज मुंबई शिक्षा छाँव।।
संस्कृत पढ़ने रहा मनाही, किया फारसी में उत्तीर्ण।
भेद भाव था पाँव पसारे, दशा रहा तब बहुते जीर्ण।।
गायकवाड़ सिया जी ने फिर, दे दी फेलोशिप वरदान।
पास उच्च डिग्री की करने, कोलम्बिया को किये प्रस्थान।।
कोलम्बिया विश्वविद्यालय, मानक उपाधि किये वे पास।
लंदन स्कूल इकोनॉमी भी, था पोलिटिकल साइँस खास।।
एम एस सी व डी एस सी, किये नाम वे अपना दर्ज।
भारत लौटे भीम राव जी, उसे चुकाना था अब फर्ज।।
छात्रवृत्ति के शर्त मुताबिक, किया नौकरी वो मंजूर।
राज बड़ौदा के रहवासी, भेदभाव कर रखते दूर।।
नही किराया घर भी मिलता, पानी को तरसाते लोग।
मानवता भी शर्मसार था, छुआछूत था विषधर रोग।।
शहर मुंबई वापस लौटा, लगा दलित करने उत्थान।
अध्यापकी वकालत करके, छेड़ा उसने तब अभियान।।
मूक अशिक्षित निर्धन खातिर, किया जागरुकता का काम।
छाप पत्रिका दर्द दलित का, दिया बहिष्कृत भारत नाम।।
पूर्ण पढ़ाई करने फिर से, गये जर्मनी लन्दन आप।
एम एस सी बैरिस्टर की, लगा नाम पर मानद छाप।।
कोलम्बिया विश्वविद्यालय, एल एल डी मानद मान।
उस्मानिया विश्वविद्यालय, डी लिट् उसको किये प्रदान।।
युवा प्रेरणा स्रोत बना वे, हासिल किये उपाधि अनेक।
भारत रत्न भीम साहब को, कर लूँ वंदन माथा टेक।।
चलो सुनाऊँ संघर्षो की, अब तो आगे खुली किताब।
भीम राव जी के जीवन का, एक-एक पल का तुम्हें हिसाब।।
राजनीति सामाजिक आर्थिक, किया राष्ट्र निर्माण का काम।
इतिहासिकता और शैक्षणिक , सभी क्षेत्र में उनका नाम।।
औद्योगिक संवैधानिक में, रहा बखूबी उनको ज्ञान।
धार्मिक संस्कृति साहित्यिक का, योगदान भी रहा महान।।
पानी पीने दलित तरसते, मंदिर वर्जित रहा प्रवेश।
आदिवासियाँ भूखे मरते, खुद का था जो उनका देश।।
छूआछूत जब जातपात था, ऊँच-नीच का काला बाज।
तब मानव अधिकार दिलाया, उसने शोषित दलित समाज।।
देख बुराई तब समाज की, बाबा भीम किये ऐलान।
दहन किया मनु स्मृति का बाबा, सीना तान खुले मैदान।।
हिंदू धर्म का त्याग किये वे, बौद्ध शरण का थामा राह।
बौद्ध धर्म बौद्धिक वैज्ञानिक, जिसमें जीवन सार अथाह।।
जातिभेद निर्मूलन नामक, किया ग्रंथ उसने तैयार।
अंधभक्ति से मुक्ति दिलाने, लिखी बात उसमें वे सार।।
लिखा विधेयक हिन्दू संहिता, महिलाओं पर कर उपकार।
हो तलाक नारी उत्पीड़न, धन दौलत में सम अधिकार।।
आर्थिक वित्तीय समस्या का, किया भीम जी ने उपचार।
बैंक रिजर्व गठन को करने, उसने कहा ब्रिटिश सरकार।।
औद्योगिक नित विकास करने, किया भीम ने डटकर काज।
जल संचय सिंचाई से ही, सर्वप्रभुत सम्पन्न समाज।।
काम महान किये साहब ने, संविधान का कर निर्माण।
समता समानता दिल इसका, भाव बंधुता इसकी प्राण।।
रचना- इंजी.गजानंद पात्रे "सत्यबोध"
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

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