रखौ सुमता ल सुराज
रखौ सुमता सुराज सदा तभे उगही नवा ग बिहान सुनौ।
बनै ग नही कुछु काम जपे बस ले सतनाम गियान भरौ।।
कहे पुरखा ह हमार करौ कुछ तो ग समाज सियान हरौ।
बनौ बघवा कस आज तभे मिलही सरताज धियान धरौ।।
रखौ गुरु मा बिसवास
कहे गुरु बालक दास रखौ गुरु मा बिसवास सुराज धरौ।
बरै दियना सरि रात इहाँ सत के बरसात अगाज करौ।।
बसे नयना म खुवाब खिले जस फूल गुलाब समाज हरौ।
करौ सतकाम सदा मनभावन कर्म बुरा बदनाम डरौ।।
बँटे हव भाग अनेक
बँटे हव भाग अनेक बसे इरखा मन फेक समाज गुनौ।
मिलौ नदिया जस घाट कभू कुमता झन बाँट सुराज चुनौ।।
रहौ जग मा उजियार उगा मन के भ्रम द्वेष दुराज तुनौ।
कहे अब बात गजानन जी सदा मन जोड़ अवाज सुनौ।।
गवाँ झन इज्जत मान नशा बश
उजाड़त हे घर के सुख ला मनखे बनके मतवार इहाँ।
बिगाड़त हे तन ला खुद के जिनगी कर डारिस उजार इहाँ।।
सुवारथ स्वाद धरे मुँह के अब बेचत हे धन खार इहाँ।
गवाँ झन इज्जत मान गजानन बात बने तँय बिचार इहाँ।।
::::::::::::::::::::सुमुखी सवैया::::::::::::::: ✍🏻इंजी. गजानंद पात्रे "सत्यबोध" बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 20/07/2024
सुनौ अब बात किसानन
सुनौ अब बात किसानन देख बतावत हौं कइसे बढ़िया।
चना तिवरा अउ राहर के बिन लागय खेत परे परिया।
बिना जल के बिरथा जग हे चल बाँध नदी नरवा तरिया।
रसायन खाद दिनों दिन धान अनाज घलो करथे करिया।।

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